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उज्जैन

महाकाल को निहारने में भक्तों को मिली थप्पड़ों की सजा…देखिए vedio

वीडियो वायरल कर लोगों ने गुस्सा जताया...पालकी के आसपास आने पर श्रद्धालुओं को पंडे-पुजारी ने मारे धक्के, सुरक्षाकर्मी-पुलिसवाले ने जड़े तमाचे

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उज्जैन. बाबा महाकाल की सवारी में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को थप्पड़ों की सजा मिली, तो मन दु:खी हो गया। सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। इसमें पालकी के आसपास चलने वाले पुजारी-पंडे और सुरक्षाकर्मी तथा पुलिसवालों ने श्रद्धालुओं को न सिर्फ बुरी तरह से धक्का दिया, बल्कि उन्हें थप्पड़ मारे। इस वीडियो को जिसने भी देखा, हतप्रभ रह गया। आस्था पर प्रहार करने वाले इस घटनाक्रम के वीडियो ने लोगों को अंदर तक झकझोर दिया। इस मामले में पत्रिका ने शहरवासियों से चर्चा की, तो सभी का यह कहना था कि इस तरह से किसी भी भक्त की पिटाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह अन्याय है।

बाबा को भक्तों से दूर कर दिया
भारत विकास परिषद की प्रांतीय संस्कार प्रमुख पूजा चित्तौड़ा का कहना है कि महाकाल मंदिर में वैसे ही कितने सारे प्रयोग होते रहते हैं। वीआइपी आने पर सारे नियम ध्वस्त हो जाते हैं, लेकिन आम आदमी न तो मंदिर में सामान्य रूप से प्रवेश कर सकता है, न ठीक से दर्शन कर पाता है। भगवान महाकाल भक्त से दूर हो गए हैं। अब जब वे स्वयं प्रजा को दर्शन देने नगर भ्रमण पर आ रहे हैं, तो वहां भी ठीक से दर्शन मत करने दो, मारने लग जाओ, यह तो सरासर गलत है।

पालकी को ट्राले पर लेकर खड़ा करें, कोई विवाद नहीं होगा
कम्प्यूटर इंजीनियर योगेश भट्ट ने बताया कि बाबा महाकाल सभी के आराध्य देव हैं, उनकी एक झलक के लिए लोग दूर-दूर से भूखे-प्यासे और परेशानी उठाने को तैयार रहते हैं। यदि तमाम परेशानियों के बाद भी ठीक से दर्शन न हों, तो क्या फायदा। इसलिए मेरा तो सुझाव है कि पालकी को एक ट्राले पर लेकर कहार खड़े हो जाएं, न कोई धक्का-मुक्की होगी, न विवाद होंगे।

रस्सी के घेरे में कोई कैसे घुस सकता है, यह विचारणीय प्रश्न
समाजसेविका सरोज अग्रवाल ने बताया कि पालकी के आसपास जब इतने पुलिस वाले रहते हैं, तो घेराबंदी तोडऩे वाले अंदर कैसे आ सकते हैं, जाहिर है वे पंडे-पुजारी के ही जान-पहचान वाले रहते होंगे। इसीलिए अव्यवस्था होती है। रस्सी के घेरे में किसी को भी आने ही क्यों दिया जाता है। साल दस साल सवारी में भीड़ बढ़ती जा रही है। ऐसे में बच्चों, युवतियों और महिलाओं के लिए सवारी मार्ग पर कुछ स्थान ऐसे आरक्षित कर दिए जाएं, जहां सिर्फ महिलाएं ही बैठें।

पंडे-पुजारी जो चाहें, वही होता है
व्यापारी हर्षित जैन ने बताया कि महाकाल मंदिर में वहां के पंडे-पुजारी ही असली हीरो हैं। वे जो चाहें वही होता है। सवारी के साथ चलने वाले पालकी को कहां किसके घर के सामने रोकना है, उसे उधर ले जाकर रोकते हैं। लोग रस्सी के अंदर जाकर माला-प्रसाद चढाने लगते हैं, इसी बीच दूसरे भी घुस आते हैं, जिन्हें पुलिस वाले और अन्य लोग मारकर भगाने का प्रयास करते हैं, जो कि गलत है।

क्या 1950 में सवारी का स्वरूप बेहतर था
सवारी के दौरान भक्तों से अभद्र व्यवहार का बड़ा भगवान महाकाल की सवारी में लोगो को भगवान के दर्शन नहीं होना है। पालकी की ऊंचाई बढाने पर खास अन्तर नहीं आया, इसलिए लोगों की भावना और बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखते हुए अब पालकी का स्वरूप पुराने समय जैसा वापस कर देना चाहिए। यह दृश्य वर्ष 1950 का है। यह केवल एक सुझाव है, उचित लगे तो मंदिर प्रशासन अपना सकता है।