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स्त्रियों के बारे में प्लॉट खाली होने की बात कहना अमर्यादित-डॉ. सुमनानन्द गिरि

महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. सुमनानन्द गिरि महाराज ने कहा इस तरह के शब्दों का उपयोग व्यासपीठ से बिलकुल नहीं किया जाना चाहिए।

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Dhirendrakrishna Shastri of Bageshwar Dham said wrong things for women

महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. सुमनानन्द गिरि महाराज ने कहा इस तरह के शब्दों का उपयोग व्यासपीठ से बिलकुल नहीं किया जाना चाहिए।

उज्जैन। व्यासपीठ से हिंदू राष्ट्र की मांग करने का स्वागत है। व्यासपीठ से श्रीरामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग करना भी स्वागतयोग्य है लेकिन व्यासपीठ पर बैठकर स्त्रियों के बारे में यह कहना कि अगर मांग में सिंदूर नहीं और गले में मंगलसूत्र नहीं तो समझो प्लॉट खाली है। यह अमर्यादित और निंदनीय है। ऐसी बात कहना किसी भी संत को शोभा नहीं देता। महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. सुमनानन्द गिरि महाराज ने इसकी निंदा की है। उन्होंने कहा बागेश्वरधाम के धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य के परम शिष्य हैं।

उन्हें व्यासपीठ से अमर्यादित शब्दों का उपयोग करना शोभा नहीं देता। सोशल मीडिया पर धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर किसी महिला की मांग में सिंदूर न हो और गले में न मंगलसूत्र तो हम समझते हैं कि प्लॉट खाली है और अगर मांग में सिंदूर और गले में मंगलसूत्र हो तो हम समझते हैं प्लॉट की रजिस्ट्री हो गई। महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. सुमनानन्द गिरि महाराज ने कहा इस तरह के शब्दों का उपयोग व्यासपीठ से बिलकुल नहीं किया जाना चाहिए। व्यासपीठ हमें मर्यादित बनाती है।

श्रीरामचरितमानस विश्व की आचार संहिता है। इसलिए वक्ता को इसका अधिकारी होना चाहिए। संयमित भाषा कहनी चाहिए। व्यासपीठ हास्य या मनोरंजन का साधन नहीं है अपितु अध्यात्म का मंच है। एक एक शब्द संयमित बोलना चाहिए, क्योंकि इससे श्रोता पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।