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धूमावती जयंती : तीन मुख वाली इस माता के मंदिर में पीएम मोदी के लिए हुए थे जप

शाजापुर के समीप स्थित नलखेड़ा में मां भगवती बगलामुखी का यह मंदिर बीच शमशान में बना हुआ है। धूमावती के नाम से भी इस देवी का पूजन किया जाता है।

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उज्जैन/नलखेड़ा. शाजापुर के समीप स्थित नलखेड़ा में मां भगवती बगलामुखी का यह मंदिर बीच शमशान में बना हुआ है। धूमावती के नाम से भी इस देवी का पूजन किया जाता है। धूमावती जयंती 20 जून को है, माता के दरबार में विशेष पूजन किया जाएगा। यहां देश के कई बड़े दिग्गज नेता अपनी मनोकामना पूरी करने और संकट से रक्षा के लिए पूजा-अनुष्ठान कराने आते हैं। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भी उनके भाई ने जप-अनुष्ठान किया था। इन देवी का महत्व समस्त देवियों में विशिष्ट है। विश्व में इनके सिर्फ तीन ही प्राचीन मंदिर हैं, जिन्हें सिद्धपीठ कहा जाता है। यह मंदिर तंत्र-मंत्र साधना के लिए भी प्रसिद्ध है।

तीन मुख, त्रिशक्ति का प्रतीक
मध्यप्रदेश में तीन मुखों वाली बगलामुखी माता का यह मंदिर त्रिशक्ति का प्रतीक है। यह मंदिर शाजापुर तहसील नलखेड़ा में लखुंदर नदी के किनारे स्थित है। द्वापर युग का यह मंदिर अत्यंत चमत्कारिक है। यहां देशभर से साधु-संत तांत्रिक अनुष्ठान के लिए आते रहते हैं।

मोदी के भाई ने कराए थे जाप
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई प्रहलाद मोदी ने यहां लोकसभा चुनाव के समय जाप अनुष्ठान कराए थे। स्मृति ईरानी भी माता के दरबार में मत्था टेकने आई थीं। यूपी से बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल यहां आ चुके हैं। टीवी सीरियल तारक मेहता..के अय्यर भाई, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री, वसुंधराजे सिंधिया, दिग्विजयसिंह, शिवराजसिंह चौहान, उत्तराखंड की महारानी भी यहां आ चुके हैं। पुजारी पं. कैलाशनारायण शर्मा ने बताया 1815 में मंदिर का जीर्णोंद्धार किया गया था। यहां लोग अपनी मनोकामना पूरी करने या किसी भी क्षेत्र में विजय प्राप्त करने के लिए यज्ञ, हवन, पूजन-पाठ कराते हैं।

श्रीकृष्ण के निर्देश पर हुई थी स्थापना
प्राप्त जानकारी अनुसार इस मंदिर की स्थापना महाभारत काल में विजय प्राप्ति के लिए भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर महाराज युधिष्ठिर ने की थी। मान्यता यह भी है कि यहां की बगलामुखी प्रतिमा स्वयंभू है। इस मंदिर में माता बगुलामुखी के अतिरिक्त माता लक्ष्मी, कृष्ण, हनुमान, भैरव तथा सरस्वती भी विराजमान हैं।

तंत्र की देवी मां बगलामुखी
बगलामुखी माता मूलत: तंत्र की देवी हैं, इसलिए यहां पर तांत्रिक अनुष्ठानों का महत्व अधिक है। यह मंदिर इसलिए महत्व रखता है, क्योंकि यहां की मूर्ति स्वयंभू और जाग्रत है तथा इस मंदिर की स्थापना स्वयं महाराज युधिष्ठिर ने की थी। इस मंदिर में बिल्वपत्र, चंपा, सफेद आंकड़ा, आंवला, नीम एवं पीपल के वृक्ष एक साथ स्थित हैं। इसके आसपास सुंदर और हरा-भरा बगीचा देखते ही बनता है। नवरात्रि में यहां पर भक्तों का हुजूम लगा रहता है।