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एजुकेशन अपडेट: संस्कृत में कॅरियर की अपार संभावनाएं, आठवीं के बाद मिल जाता है कॉलेज में प्रवेश

संस्कृत महाविद्यालय में लगेगी फलितज्योतिष व नव्य व्याकरण की क्लास, ऑफलाइन एडमिशन

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उज्जैन. भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग संस्कृत भाषा अब कॅरियर बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। ज्योतिष, वेद व अनुवादक जैसे विषयों के जानकार की मांग देश-विदेश में बढ़ी है। इस मांग ने शिक्षा क्षेत्र में भी संस्कृत के विद्वानों की मांग को बढ़ाया है। एेसे में संस्कृत विषय से पढ़ाई कर विद्यार्थी कॅरियर को नई दिशा दे सकते हैं। उज्जैन में भी संस्कृत विषय की पढ़ाई के लिए संस्कृत महाविद्यालय, महर्षि वैदिक संस्कृत विश्वविद्यालय, विक्रम विवि संस्थान आदि प्रमुख हैं। इस सभी में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो गई। शहर के प्रमुख सरकारी कॉलेज शासकीय संस्कृत महाविद्यालय में नवीन सत्र के लिए ऑफलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं। विद्यार्थियों को स्नातक स्तर (शास्त्री) कक्षाओं में नियमित विद्यार्थियों के रूप में प्रवेश मिलेगा। कॉलेज की प्रवेश प्रक्रिया ऑफलाइन है। उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेज को विशेष रूप से ऑनलाइन एडमिशन प्रक्रिया से मुक्त रखा है।
आठवीं पास को प्रवेश
कॉलेज में संस्कृत विषय पढऩे के लिए स्कूल विषय के विद्यार्थियों को प्रवेश मिलेगा। इसमें पूर्वमध्यमा में प्रवेश के लिए न्यूनतम अर्हता कक्षा आठवीं है। इसी शास्त्री प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश के लिए कक्षा १२वीं व उत्तरमध्यमा उत्र्तीण होना चाहिए। प्रवेश के लिए महाविद्यालय कार्यालय से प्रवेश फॉर्म लेकर जमा किया जा सकता है। प्रवेश प्रक्रिया जून अंत तक संचालित होगी।
फलितज्योतिष विषय की पढ़ाई
महाविद्यालय में प्राच्य संस्कृत साहित्य, फलितज्योतिष, शुक्लयजुर्वेद एवं नव्य व्याकरण विषय की पढ़ाई कराई जा रही है। महाविद्यालय प्राचार्य आरसी जाटवा का कहना है कि संस्कृत विषय के विद्यार्थियों के लिए महाविद्यालय में नियमों में शिथिलता है। कक्षा आठवीं पास विद्यार्थी संस्कृत की पढ़ाई कर उच्च शिक्षा तक का सफर तय कर सकते हैं। विद्यार्थियों को पूर्व मध्यमा से उत्तर मध्यमा तक पढ़ाई करनी होगी। इसके बाद शास्त्री प्रथम वर्ष में प्रवेश मिल जाएगा। इसी के साथ हायर सेकंडरी पास विद्यार्थी सीधे शास्त्री प्रथम वर्ष में प्रवेश ले सकते हैं।