12 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पोते के लिए बुजुर्ग दादी ने दी जान, पढ़ें दादी-पोते के प्यार की अनोखी कहानी

दर्दभरी दास्तां... पारिवारिक कलह के बाद शुरू हुआ था विवाद, गुस्से में पोते ने घर की दहलीज लांघी तो दादी ने काट ली जीवन की डोर...>

2 min read
Google source verification
nagda1.png

 

 

ये कहानी नहीं हकीकत है, जिसमें दादी-पोते के प्यार के बीच दादी का दर्द छिपा है, जिसे वे अपने साथ लेकर इस दुनिया से अलविदा हो गई। दादी-पोते में इतना प्यार जैसे एक दूजे के बिना अधूरे, लेकिन घर में हुए पारिवारिक कलह में पोता इस कदर गुस्साया कि वह दादी के समझाने पर भी नहीं माना और घर की दहलीज लांघ गया...। दादी ने समझाया कि वह घर का कुलदीपक है...। यदि वह चला गया तो बाकी सभी का क्या होगा...। मगर वह नहीं माना...। पोते के गुस्से से आहत दादी ने ट्रेन के नीचे आकर अपना जीवन खत्म कर लिया।

इंद्रादेवी वर्मा (78) पति श्यामलाल वर्मा विद्यानगर क्षेत्र में अपने पति श्यामलाल, बेटे दीपक, बहू, पोते जय व पोता बहू के साथ रहती थी। इंद्रा के घर में पारिवारिक कलह हो गई थी। इस विवाद में जय नाम का पोता घर छोड़कर जाने लगा। दादी इंद्रादेवी ने पोते को रोकने के लिए उससे काफी मिन्नतें की, लेकिन वह नहीं माना और घर से निकल गया। पोते की जिद ने दादी के दिल पर इतना गहरा असर हआ कि दादी भी घर से निकलकर रेलवे ट्रैक तक जा पहुंची। इंद्रा को सामने से ब्लास्टिंग ट्रेन आती नजर आई। जिसके सामने वे लेट गई। हादसे में इंद्रादेवी की मौके पर ही मौत हो गई।

 

चार कोच निकलने के बाद लेटी

बिरलाग्राम थाने की एसआई योगिता उपाध्याय ने बताया, ब्लास्टिंग के ट्रेन कोच निकल जाने के बाद इंद्रादेवी ट्रैक पर लेटी। इससे ट्रेन का पहिया इंद्रादेवी की गर्दन पर से गुजर गया। इंद्रदेवी का सिर धड़ से अलग हो गया और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। ट्रैकमैन कृष्णकुमार मीणा निवासी रेलवे कॉलोनी की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। उन्होंने पंचनामा बनाकर शव पीएम के लिए सरकारी अस्पताल भेजा। सरकारी अस्पताल में पीएम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

 

अपीलः रिश्ते तराजू जैसे हैं, इन्हें बैलेंस करके रखें

घर में हुए एक विवाद में एक वृद्धा ने जान दे दी। इसे समय का कालचक्र कहें या परिजन की नादानी कि यदि विवाद शुरू होते ही उस पर बातों के शांत छिंटे डाल दिए जाते तो इतना बड़ा दर्द परिवार को नहीं मिलता। यह हादसा समाज के लिए सीख है कि घर में यदि कलह की चिंगारी छूटे तो आग बनने से बुझा दी जाएं, क्योंकि... रिश्ते तराजू की तरह हैं...इन्हें बैलेंस करके रखें...एक भी सिरा झुका तो सबकुछ बदल जाएगा।

 

परिवार में आने वाली थी खुशी

जानकारी के अनुसार जय की पत्नी गर्भवती है। परिवार में कुछ समय बाद किलकारियां गूंजने वाली थीं। खुशी का माहौल था। इंद्रादेवी के गोद में पोते का बच्चा खेलने वाला था, लेकिन उससे पहले ही यह घटना हो गई।