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नागदा. शहर के आस-पास के करीब दर्जनों गांवों के किसान इन दिनों आवारा मवेशियों से खासे परेशान है। यह मवेशी रात के अंधेरे में किसानों की रबी फसलों को चट कर रहे हैं। किसानों ने कई बार मवेशियों द्वारा किए जा रहे नुकसान से प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को आगाह किया, लेकिन कोई भी नतीजा नहीं निकला। मजबूरन किसानों को इन मवेशियों को अपने गांव व खेतों से खदेडऩे पर विवश होना पड़ रहा है।
ऐसा ही नजारा सोमवार को नागदा-खाचरौद बायपास रोड पर नजर आया, जब सैकड़ों किसानों ने एकत्र होकर मवेशियों को खेत व गांवों से दूर भेजने का निर्णय लिया। करीब दो दर्जन गांवों के किसानों ने एकमत होकर एक हजार से ज्यादा मवेशियों को इक्ठ्ठा किया और गोशाला पहुंचाने के लिए निकल गए। सभी मवेशियों को शहर से करीब १०० किमी दूर रतलाम जिला स्थित गांव भीरमल की गोशाला में भेजने की योजना बनाई गई हंै, ताकि मवेशियों की समस्या से क्षेत्र के किसानों को छुटकारा मिल सकें।
ग्रामीणों क्षेत्रों में था मवेशियों का आंतक
मवेशियों का आंतक सबसे अधिक गांव पाड्ल्याकलां, जलोदिया, जूना नागदा, रुपेटा, रतन्याखेड़ी, झांझाखेड़ी, लसुडिया, बनबना, बनबनी, पारदी, अमलावदिया आदि में देखने को मिला है। इन ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर किसानों की फसलों को मवेशियों ने अपना आहार बना लिया। सभी मवेशियों को शहर से करीब १०० किमी दूर रतलाम जिला स्थित गांव भीरमल की गोशाला में भेजने की योजना बनाई गई हंै, ताकि मवेशियों की समस्या से क्षेत्र के किसानों को छुटकारा मिल सकें।
एक हजार बीघा से अधिक फसलें नष्ट
क्षेत्र का किसान मवेशियों से कितना कष्ट में था इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अभी तक मवेशी एक हजार बीघा से अधिक फसलों को अपना भोजन बना चुके हैं। इनमें ज्यादातर फसलें गेहूं व चने की है। कई किसान तो ऐसे हैं जिनकी दो-दो बार फसलों को मवेशी चट कर गए। मवेशियों के कारण किसानों को रातभर खेतों में पहरा देने के लिए विवश होना पड़ रहा हैं।
Published on:
28 Nov 2017 07:31 pm

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