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विडंबना ! सब्जियों का राजा आलू बना मुसीबत…

मंडी में आलू का भाव नहीं मिलने से किसानों ने कोल्ड स्टोरेज में छोड़ा, ऐसा भाव कि किराया भी नहीं निकल रहा

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प्रशांत शर्मा@उज्जैन. सब्जियों का राजा आलू इन दिनों किसानों के लिए मुसीबत बन गया है। किसानों के साथ आलू ने कोल्ड स्टोरेज के मालिकों की भी परेशानी बढ़ा दी है। मंडी में आलू का भाव नहीं मिलने के कारण जिले के कई किसानों ने कोल्ड स्टोरेज में आलू छोड़ दिया है और कोल्ड स्टोरेज के मालिक उस आलू को न तो बेच पा रहे हैं और न ही उसका सौदा कर पा रहे हैं। स्टोरेज संचालकों का कहना है कि उनकी भी लागत लग रही है और परेशानी का हल नजर नहीं आ रहा है। आलू भी सड़ रहे हैं।

फरवरी और मार्च में आलू की फसल निकलने के बाद अधिकतर किसानों ने आलू खराब न हो इसके लिए कोल्ड स्टोरेज में आलू रखा था। मंडी में आलू का भाव नहीं मिल पाने के कारण अब ये किसान कोल्ड स्टोरेज से आलू नहीं उठा रहे हैं। किसानों का कहना है कि जिस भाव में आलू बिक रहा है, उस भाव से तो कोल्ड स्टोरेज का किराया भी नहीं निकल पा रहा है। अगर कोल्ड स्टोरेज से आलू लेने जाते भी हैं तो अपनी जेब से भुगतान कर आलू लेना होगा और हम्माली से लेकर मंडी तक लाने का खर्च अलग से हो जाएगा और उतने भाव पर आलू मंडी में बिक नहीं रहा है।

नहीं बेच सकते आलू
नागदा रोड पर श्री सांई कृपा कोल्ड स्टोर संचालित करने वाले संजय पाटीदार का कहना है कि उनके कोल्ड स्टोरेज में करीब १०० किसानों के १० हजार आलू कट्टे पड़े हैं। उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है और आलू को बचाने के लिए उन्हें मशीन चलाना पड़ती है। संजय का कहना है कि वे तो आलू भी नहीं बेच सकते हैं, क्योंकि अगर बाद में किसान आलू लेने आ गया तो वह उन पर अमानत में खयानत का प्रकरण भी दर्ज करा सकता है या उपभोक्ता फोरम में वाद दायर कर सकता है।

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नहीं मिलती प्रशासन से कोई सहायता
उन्होंने बताया कि एेसी स्थिति में उन्हें प्रशासन या सरकार से कोई मदद नहीं मिलती है। कोल्ड स्टोरेज में आलू रखकर फिर आलू न उठाने की स्थिति पिछले ३ सालों से चल रही है। आलू का भाव नहीं मिलने के कारण किसान आलू उठाते ही नहीं है और नुकसान कोल्ड स्टोरेज संचालकों व मालिकों को उठाना पड़ता है। प्रशासन या सरकार भी उनकी कोई सहायता नहीं करती है। करीब १० वर्ष पूर्व प्रशासन से सब्सिडी की मांग भी की गई थी, परंतु उस मांग पर आज तक विचार नहीं किया गया है। कायथा में उनके यूएस कटियार कोल्ड स्टोर में ही करीब १० हजार आलू के कट्टे पड़े हैं।

कोल्ड स्टोरेज मालिक भी परेशान
किसानों द्वारा आलू नहीं उठाने के कारण कोल्ड स्टोरेज मालिकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कोल्ड स्टोरेज का किराया, हम्माली मिलाकर करीब ३० से ४० रुपए का खर्च प्रति कट्टे पर आता है। एेसे में उनकी लागत भी किसान नहीं दे पा रहा है। हजारों क्विंटल आलू वर्तमान में कोल्ड स्टोरेज में पड़ा हुआ है। कोल्ड स्टोरेज मालिकों का कहना है कि कुछ तो वे बेच रहे हैं और कुछ वे किसानों का इंतजार कर रहे हैं कि वे आलू लेकर जाए, परंतु भाव नहीं मिलने के कारण किसान आलू नहीं उठा रहे हैं। कुछ स्थानों पर आलू सड़ भी गया है और उसे फेंक भी नहीं पा रहे हैं।

शाजापुर व उज्जैन में करीब ६० कोल्ड स्टोरेज
कोल्ड स्टोरेज संघ के अध्यक्ष सत्येंद्र कटियार का कहना है कि शाजापुर और उज्जैन जिले में मिलाकर करीब ६० कोल्ड स्टोरेज हैं। अधिकांश में किसानों ने आलू छोड़ दिया है। एक अनुमान के मुताबिक वर्तमान में करीब ६ लाख कट्टे आलू कोल्ड स्टोरेज में पड़ा है। कटियार ने बताया कि फरवरी-मार्च में स्टोर होने के बाद से करीब ६ लाख कट्टे आलू फेंका जा चुका है, जो पूरी तरह से खराब हो गया था। किसानों से माल उठाने को कहा जाता है तो वे भाव नहीं मिलने का हवाला देते हैं और आलू नहीं उठाते हैं। एेसे में कोल्ड स्टोरेज इंडस्ट्री को करीब १० से १५ लाख रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इन सभी कोल्ड स्टोर में करीब १२ लाख कट्टे आलू पड़ा है। इंदौर मंडी में भी आलू बेचे तो करीब ४० रुपए लागत आ रही है और भाव १० से १५ रुपए प्रति कट्टा मिल रहा है। एक कट्टे में ३५ किलो आलू होता है।

१० रुपए कट्टा है आलू का भाव
आलू-प्याज विक्रेता पंकज सांखला का कहना है कि फिलहाल मंडी में आलू का भाव १० से १५ रुपए प्रति कट्टा चल रहा है। थोक में भाव कम है और खेरची में भी भाव कम ही चल रहा है। बड़ा आलू अब बाजार में नहीं आ रहा है और छोटे आलू के भाव नहीं मिल रहे हैं। एेसे में किसान आलू कोल्ड स्टोरेज से उठा नहीं रहे हैं। किसानों का कहना है कि कोल्ड स्टोरेज के किराए की राशि भी उन्हें आलू बेचने से नहीं मिल पा रही है।

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