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किसी को दे गए रोशनी, तो किसी के काम आएगी त्वचा

मरने के बाद किसी की जिंदगी रोशन कर सकें, ऐसा ही मामला शहर में देखने को मिला। पिता की मौत के बाद बेटे ने उनकी आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए उनके नेत्र और देहदान करने का निर्णय लिया। बेटे के इस निर्णय में सभी ने साथ भी दिया। 

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Lalit Saxena

Jun 11, 2016

father's death, Son last wish fulfilled

father's death, Son last wish fulfilled

उज्जैन. सेठी नगर के समीप स्थित अरिहंत विक्रम नगर निवासी जीवन पिता केशवदास अंबवाणी (69) की शुक्रवार दोपहर दिल का दौरा पडऩे से मौत हो गई। बेटे प्रकाश ने बताया पिता की हमेशा से ही नेत्रदान और देहदान करने की इच्छा थी। कुछ दिन पूर्व उन्होंने मुझे कहा भी था, लेकिन व्यस्तता के चलते रजिस्ट्रेशन नहीं करा सके।

हॉस्पिटल की टीम को जानकारी दी
शुक्रवार को अचानक यह वज्रपात हुआ। सूचना पर मुस्कान ग्रुप के सिंधी कॉलोनी निवासी तरुण रोचवानी ने संपर्क किया और इंदौर आई बैंक तथा त्वचा दान के लिए चोइथराम हॉस्पिटल की टीम को जानकारी दी। शाम तक नेत्र व त्वचा दान की प्रोसेस पूरी हुई। शनिवार सुबह 10 बजे निवास से अंतिम यात्रा निकाली जाएगी।

अब तक करवाए 18 नेत्र और 4 त्वचा दान
तरुण रोचवानी ने बताया वे दो वर्ष से नेत्र, देह और त्वचा दान पर ही काम कर रहे हैं। ग्रुप के अन्य सदस्यों के सहयोग से बीते एक वर्ष मे 18 नेत्र दान और 4 बार त्वचा दान करवा चुके हैं। मौत की जानकारी लगने के बाद वे परिजनों से संपर्क करते हैं। उन्हें नेत्र, त्वचा या देहदान के लिए प्रेरित करते हैं। इससे समाज और चिकित्सा क्षेत्र में होने वाले प्रभाव की जानकारी देते हैं। कई बार परिजनों का गुस्सा भी बर्दाश्त करना पड़ जाता है और कहीं-कहीं सफलता हाथ लगती है। सिंधी कॉलोनी निवासी दीपक बैलानी ने बताया माता मोहिनी किशनचंद बैलानी के देहवसान के बाद उक्त ग्रुप से ही नेत्रदान करवाया था।

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