तरुण रोचवानी ने बताया वे दो वर्ष से नेत्र, देह और त्वचा दान पर ही काम कर रहे हैं। ग्रुप के अन्य सदस्यों के सहयोग से बीते एक वर्ष मे 18 नेत्र दान और 4 बार त्वचा दान करवा चुके हैं। मौत की जानकारी लगने के बाद वे परिजनों से संपर्क करते हैं। उन्हें नेत्र, त्वचा या देहदान के लिए प्रेरित करते हैं। इससे समाज और चिकित्सा क्षेत्र में होने वाले प्रभाव की जानकारी देते हैं। कई बार परिजनों का गुस्सा भी बर्दाश्त करना पड़ जाता है और कहीं-कहीं सफलता हाथ लगती है। सिंधी कॉलोनी निवासी दीपक बैलानी ने बताया माता मोहिनी किशनचंद बैलानी के देहवसान के बाद उक्त ग्रुप से ही नेत्रदान करवाया था।