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भारतीय रंगों में रंगी यूरोप की ‘क्रिस्टिना’ और ‘सारा’, जमकर उड़ाया गुलाल

क्रिस्टीना स्केंदेर है वो पीएचडी कर रही है और दूसरी सारा वेन-डे वेयर हैं, जो मास्टर डिग्री कर रही हैं.....

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Holi

उज्जैन। भारत एकमात्र देश ऐसा है जहां की संस्कृति, अध्यात्म, फेस्टिवल्स के रंग हर देश से जुदा हैं, ये अल्हदा रंग किसी भी परदेशी पर अपनी छाप छोड़ ही देते हैं। फिर अवसर बाबा महाकाल के महाशिवरात्रि उत्सव का हो या फिर होली-रंगपंचमी पर शहर में छाए चटक रंगों का। पूरब का जादू हमेशा से ही पश्चिमी संस्कृति को प्रभावित करता रहा है। जब से श्री महाकाल लोक की ख्याति विश्वभर में फैली है तब उज्जैन में कहीं न कहीं फॉरेनर्स आपको दिख ही जाएंगे। वहीं कुछ विदेशी स्टूडेंटस तो बरसों से भगवान कृष्ण की शिक्षास्थली उज्जैन में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। वे भारतीय फेस्टिवल के उल्लास में ऐसा रम जाते हैं कि लगता ही नहीं है कि यह हमारे देश के नहीं हैं।

जमकर उड़ाया गुलाल

ऐसा ही नजारा रविवार को रंगपंचमी पर बिड़ला हॉस्पिटल के नजदीक बने हनुमानजी और श्री खाटूश्याम के मंदिर पर दिखा, जहां रंगपंचमी के आयोजन रंग-गुलाल उड़ाए जा रहे थे। इसमें कुछ विदेशी छात्राएं भी बॉलीवुड और ठेठ लोकगीतों पर डांस कर रहे थीं। उनके उत्साह का यह अंदाज हर किसी को अचंभित और आनंदित कर रहा था।

शहर में रहकर कर रहे हैं पढ़ाई

दरअसल ये लोग आरडीगार्डी मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. मेघा शर्मा व उनके ग्रुप के साथ होली खेलने यहां पहुंचे थे। डॉ. शर्मा ने बताया दोनों मेरी स्टूडेंट्स हैं जो क्रोएशिया और बेल्जियम से आरडीगार्डी में मेरे मार्गदर्शन में पढ़ाई कर रही हैं। एक का नाम क्रिस्टीना स्केंदेर है वो पीएचडी कर रही है और दूसरी सारा वेन-डे वेयर हैं, जो मास्टर डिग्री कर रही हैं। वह रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। करोलिंस्का इंस्टिट्यूट स्वीडन से एफिलिएटेड रिचर्सर डॉ. शर्मा आगे बताती हैं कि वे 2009 से लगातार विदेशी स्टूडेंट्स को उज्जैन में पढ़ा रही हैं। अब तक 30 विदेशी स्टूडेंट सुपरवाइज कर चुकी हैं और अनेक बार विदेशों में व्याखान भी दे चुकी हैं।