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उज्जैन में तंत्र-मंत्र के लिए सिद्ध स्थान गढ़कालिका मंदिर

नवरात्रि में कई साधक आते हैं पूजा-अर्चना करने

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Lalit Saxena

Apr 05, 2016

garh kalika temple ujjain

garh kalika temple ujjain

उज्जैन. नवरात्रि के दिनों में तंत्र-मंत्र और कई तरह की सिद्धियां प्राप्त करने का स्थान है गढ़कालिका का मंदिर। नवरात्रि में यहां कई साधक आते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। सामान्य दिनों में भी यहां इस प्रकार की क्रियाएं होती रहती हैं। यह तांत्रिक सिद्धि हेतु प्रमुख स्थान माना जाता है।

सम्राटों की आराध्यादेवी है गढ़कालिका माता
कभी सम्राटों की आराध्यादेवी रही मां गढ़कालिका का यह मंदिर पुराने उज्जैन में आज भी शोभायमान है। यह मंदिर जिस स्थान पर अवस्थित है, उस संपूर्ण क्षेत्र को ही गढ़कालिका क्षेत्र कहा जाता है। महाकवि कालिदास, राजा विक्रमादित्य यहां साधनाएं करते थे। सम्राट हर्षवर्धन ने ई.स. 606 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। सिंदूर युक्त भव्य प्रतिका के मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित है तथा दाएं-बाएं महालक्ष्मी व महासरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित हैं।

महाकवि कालिदास की आराध्या
महाकवि कालिदास को शास्त्रों का दिव्य ज्ञान इसी मंदिर से मिला था। त्रिपुरा महात्म्य के अनुसार देश के बारह शक्तिपीठों में से यह छठा स्थान है। यह मंदिर जिस जगह पर है, वहां पुरानी अवंतिका नगरी बसी हुई थी, जहां कालांतर में धूलकोट (धूल का गुबार) के कारण दब गई थी। गढ़ की देवी होने के कारण इनका नाम गढ़कालिका पड़ा।

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