कभी सम्राटों की आराध्यादेवी रही मां गढ़कालिका का यह मंदिर पुराने उज्जैन में आज भी शोभायमान है। यह मंदिर जिस स्थान पर अवस्थित है, उस संपूर्ण क्षेत्र को ही गढ़कालिका क्षेत्र कहा जाता है। महाकवि कालिदास, राजा विक्रमादित्य यहां साधनाएं करते थे। सम्राट हर्षवर्धन ने ई.स. 606 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। सिंदूर युक्त भव्य प्रतिका के मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित है तथा दाएं-बाएं महालक्ष्मी व महासरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित हैं।