5 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कमाल की मेमोरी : 3 साल की उम्र में कंठस्थ है हनुमान चालीसा और गायत्री मंत्र

तोतले शब्दों में जब विदिता हनुमान चालीसा का पाठ करती है तो मंदिर में मौजूद अन्य श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

2 min read
Google source verification
patrika

childhood,hanuman chalisa,ujjain news,Vedic mantra,

आशीषप्रताप सिंह भदौरिया@उज्जैन. नाम दिविजा बूंदीवाल...। उम्र साढ़े तीन साल...। खासियत हनुमान चालीसा, गायत्री पाठ और वैदिक मंत्र कंठस्थ...। तोतले शब्दों में जब विदिता हनुमान चालीसा का पाठ करती है तो मंदिर में मौजूद अन्य श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। बीते छह महीने से दिविजा की तोतले शब्दों और बचपन की मधुर ध्वनि से गंूजित हनुमान चालीसा, गायत्री पाठ को सुनने उसके निवास पर आते हैं।

वैदिक मंत्र कंठस्थ याद

कॉसमॉस मॉल के सामने जवाहर नगर निवासी दिविजा पिता डॉ.अविनाश बूंदीवाल को तीन साल की उम्र से हनुमान चालीसा, गायत्री पाठ, वैदिक मंत्र कंठस्थ याद है। मां डॉ. सपना बूंदीवाल ने बताया कि विदिता को सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक सभी क्रियाओं के लिए बोले जाने वाले वैदिक मंत्र याद है। खास बात तो ये है कि अधिकांश मंत्रों का जिनका वह उच्चारण करती है वह तोतले शब्दों के कारण उन्हें भी समझ नहीं आते हैं। सुबह उठने के पहले धरती माता से क्षमा याचना और रात को सोने से पहले के वैदिक मंत्र उन्होंने सिखाए हैं। शेष मंत्र उसे स्कूल में सिखाए हैं।

वैदिक मंत्रों का जीवन में सकारात्मक प्रभाव

पिता डॉ. अविनाश बूंदीवाल ने बताया डॉक्टरी पेशे के कारण बेटी को कम समय दे पाते हैं। बावजूद जितना समय उसका सकारात्मक प्रभाव पड़े, गायत्री मंत्र, हनुमान चालीसा, वैदिक मंत्र से ज्यादा सकारात्मकता जीवन में और कोई नहीं ला सकता। इसलिए हनुमान चालीसा सुनाकर सुलाने का नियम शुरू किया।

मां लोरी की जगह सुनाती हैं चालीसा
डॉ. सपना बूंदीवाल ने बताया कि वे दिविजा को सुलाने के लिए लोरी की जगह हनुमान चालीसा, गायत्री पाठ सुनाती थी। चालीसा का पाठ करते-करते पीठ थपथपाते हुए उसे सुलाती है। जिसके चलते उसने इसे कंठस्थ कर लिया।

१४ वर्ष की उम्र तक बच्चों का मस्तिष्क की याद करने और सीखने की शक्ति बेहद मजबूत रहती है, इसलिए इस उम्र में बच्चों को जो भी सिखाया जाता है वह आसानी से सीख जाते हैं। बच्चों के साथ इस प्रकार के प्रयोगों के परिणाम सकारात्मक आते हैं, क्योंकि हनुमान चालीसा, गायत्री मंत्र, गायत्री पाठ, वैदिक मंत्रो की सकारात्मकता वैज्ञानिक भी मान चुके हैं। डिप्रेशन और स्ट्रेच के मरीजों को जल्द से जल्द फायदे के लिए ऊँ उच्चारण और योग की सलाह देते हैं।
- डॉ.अभय जैन, मनोचिकित्सक