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उज्जैन. कभी बदहाल व अनदेखी का शिकार उद्यान अब हरियाली, झूले, रोशनी व पाथवे से संवर गए हैं। सुबह सवेरे वॉकिंग के साथ ये दिनभर बच्चों की मस्ती का केंद्र बन गए हैं। बीते एक साल में निगम ने उद्यान विकास पर करोड़ों रुपए खर्च किए, जिससे खुली भूमि तक सीमित स्थान अब आधुनिक पार्क की शक्ल ले चुके हैं। क्षेत्रीय रहवासी भी सजग होकर पार्कों की देखभाल करते हैं और पार्कों के खुलने-बंद होने के टाइमिंग भी तय है।
किसी भी कॉलोनी की मूलभूत जरूरतों के साथ अब विकसित पार्क की भी खासी मांग रहती है। नगर निगम ने सिंहस्थ बाद उद्यान व निगम मद के करोड़ों रुपए खर्च कर पार्कों को सुंदर व आकर्षक बनाया है। पहले पार्षद पार्कों की सुध नहीं लेते थे, लेकिन एक-दूसरे वार्डों में हुए कार्यों से वे भी अपने क्षेत्र में पार्क विकास के लिए विशेष रुचि ले रहे हैं। यही कारण है कि अधिकारी चिंता लेकर उद्यान संबंधी फाइलें समय से दौड़ा रहे हैं।
विकास लागत : २२ लाख रुपए
ये हुए काम : उद्यान में ५ से ७ फीट लंबाई के पौधे, नया पाथ-वे, सेमी कारपेट घास, फूलों की क्यारी के साथ बदहाल हो चुके इसके स्पॉट संवारे गए हैं। १४ हजार वर्गफीट में फैले इस उद्यान में पुराने झूलों का मेंटेनेंस किया गया है। अब यहां एक भाग में ओपन जिम की प्लानिंग है, ताकि आसपास के लोग वॉकिंग के साथ व्यायाम भी कर सकें। क्षेत्रीय पार्षद बुद्धिप्रकाश सोनी के अनुसार उद्यान संबंधी और जरूरतों को भी जल्द पूरा कराएंगे।
विकास लागत : २५ लाख रुपए
ये हुए काम : शिंदे नर्सिंग होम के सामने कचरा फिंकने वाला ये स्थान नई शक्ल में उभरा है। यहां स्पाईलर फिसलपट्टी, झूले व आसपास बड़े पौधे लगे हैं। पास में तालाब व ओपन जिम है। शुरुआती दौर में विवादों के चलते कुछ विकास रुक गया। बावजूद वार्ड ही नहीं आसपास वार्ड के बच्चें यहां झूलों का आनंद लेने आते हैं। पार्षद विजयसिंह दरबार के अनुसार सतह पर रबर कोटिंग (ईपीडीएम) होगा। ताकि बच्चे नीचे गिरे तो भी उन्हें चोट नहीं लगेगी।
डे्रनेज पानी व गंदगी का ढेर था, अब कॉलोनी की शान
लागत : १६ लाख रुपए
ये हुए काम : एमआर ५ पर सेंटपॉल स्कूल के पीछे बाफना पार्क कॉलोनी में उद्यान आरक्षित जगह सालों से डे्रनेज पानी व गंदगी के ढेर में तब्दील थी। निगम ने हाल ही में इसे संवारा। यहां पर्वत शृखला के बीच शिव प्रतिमा, मनोरंजक झूले, फिसलपट्टी व सीसी पाथवे निर्मित हुआ है। कारपेट घास व आकर्षक पौधे मनमोहित करते हैं। अब ये पार्क कॉलोनी की नाक है। क्षेत्रीय पार्षद राजेश सेठी के अनुसार लोग जिस जगह से परेशान थे, आज उतने ही खुश। उनसे कहा गया है कि इसकी देखभाल वे जनभागीदारी से कराएं।
योगेश्वर टेकरी, हरियाली व रोशनी से सराबोर
लागत : २४ लाख रुपए
ये हुए काम - क्षीरसागर स्थित योगेश्वर टेकरी को संवारने में भी निगम ने विशेष रुचि ली। यहां टेकरी प्रवेश सीढिय़ों से लेकर ऊपर के गार्डन में हरियाली की गई है। यहां मनोरंजक झूले भी हैं। कभी अंधेरे में डूबा रहने वाला ये स्थान अब रात के समय एलईडी से रोशन रहता है। क्षेत्रीय पार्षद आरती तिवारी के अनुसार काफी कुछ विकास कार्य वहां किए हैं। कुछ और मांग आई है, जिसे लेकर पत्राचार जारी है। अवकाश के दिनों में कई लोग परिवार संग यहां पिकनिक व महादेव मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।
Published on:
29 Jan 2018 11:47 am
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