
मां ने लाकर दिया बेटे-बेटी को जहर, बच्चों की नसें कटने से बहा खून पिता को दिखाने के लिए फ्रीज में रखा
उज्जैन. केडी गेट स्थित सैफी मोहल्ले में रंगपंचमी के एक दिन पहले बोहरा परिवार में भाई-बहन की आत्महत्या मामले में पुलिस ने मंगलवार को खुलासा कर उनके माता-पिता को आत्महत्या उत्प्रेरण के आरोप में गिरफ्तार किया है। जहरा और भाई ताहिर की आत्महत्या के पीछे जो कारण सामने आया वह समाज और हर परिजनों को चौंकाने वाला है। माता-पिता के बीच खराब संबंध और उनकी गैरजिम्मेदाराना हरकत बच्चों की आत्महत्या का कारण बन गई। कुवैत में रह रहे पिता ने एक सप्ताह पहले रंतोधी (रात में दिखाई नहीं देना) की बीमारी से ग्रस्त बेटे ताहिर को मैसेज कर कहा था कि मुझ से अब ज्यादा उम्मीद मत रखना। मैं तुम्हारा पालन पोषण नहीं कर सकता। इससे दुखी होकर भाई-बहन ने आत्महत्या करने का मन बना लिया था। इसमें उनकी मां भी शामिल थी परंतु बच्चों की जिद थी कि पहले हम आत्महत्या करेंगे। उनका कहना था कि, हमारी मौत के बाद अब्बू आए या नहीं, आप यह देखना और वे आए तो उन्हें हमारा खून दिखाना। तब अब्बू को समझ आएगा कि हम उनके बगैर कितने परेशान थे।
हाथ की नस काटने तक मां थी उनके साथ
बच्चों के जहर की गोलियां खाने और चाकू से हाथ की नस काटने की घटना तक उनकी मां साथ थी। जब बच्चों के हाथों से खून बहना शुरू हुआ और वे अचेत होकर फर्श पर गिर गए तो मां कमरे से चली गई। दोपहर 3.30 बजे बच्चों के कमरे में जाकर हाथ से उनका खून बेसिन में बहाया। साथ ही थोड़ा खून पॉलीथिन में बांधकर फ्रीज में रख दिया ताकि पति के आने के बाद उन्हें दिखा सके
पिता के मुंह फेरने पर आत्महत्या की ठानी
26 मार्च को ताहिर ने कुवैत में रह रहे पिता को मैसेज किया था। इसमें लिखा था कि आप कब आओगे। आप हमारा ध्यान नहीं रख रहे हो। मेरी आंख का भी इलाज कराना है। ईद आने वाली है। हमारे पास नए कपड़े भी नहीं है। आपकी भी याद दिनरात परेशान करती है। इस मैसेज के बाद उसके पिता सादिक बादशाह ने लिखा था कि मुझ पर कर्ज ज्यादा है। मुझ से तुम लोग अब ज्यादा उम्मीद मत रखना। मैं तुम्हारे लिए अब खर्च नहीं भेज सकता। इस मैसेज के बाद तीनों ने आत्महत्या करने की ठान ली। मां फातिमा बच्चों के लिए जहर की गोलियां लेकर आई थी।
पिता के लिए बच्चे तरसते थे, पति को कभी भी हमारी याद नहीं आई
फातिमा ने पुलिस को दिए बयानों में बताया कि पति सादिक साल 2003 से कुवैत में रह रहे हैं। वे शुरू में तो साल दो साल में घर आ जाते थे। बाद में उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से भी मुंह मोड़ लिया और बुलाने के बाद भी नहीं आते थे। बच्चे पिता की याद में ही बढ़े हो गए। वे पिता के लिए तरसते रहते थे और मैं पति के लिए। परंतु पति को कभी हमारी याद नहीं आई। बेटे ताहिर को आंख की बीमारी थी। उसे शाम होने के बाद दिखाई नहीं देता था। इसकी वजह से वह काम नहीं कर पाता था। मैं बच्चों को स्कूल में पढ़ाकर जैसे तैसे घर चला रही थी। मैंने तो सास-ससुर को भी संभाला था। बाद में वे कोरोना के समय उनके छोटे बेटे के पास रहने चले गए। सादिक की बच्चों और मेरे प्रति लापरवाही के चलते हम में गुस्सा भरा था। हम तीनों मिलकर उसे सबक सिखाना चाहते थे। (जैसा की महिला ने पुलिस को बताया )
सुसाइड नोट बना अहम सबूत, वैज्ञानिक तथ्य भी जुटाए
एसपी प्रदीप शर्मा ने कंट्रोल रूम पर खुलासे के दौरान बताया कि इस आत्महत्या के मामले में पुलिस के पास सुसाइड नोट के अलावा कोई अहम सबूत नहीं था। हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से जांच और वैज्ञानिक तथ्यों से सामने आया कि महिला या किसी अन्य ने बच्चों की हत्या नहीं की बल्कि दोनों ने आत्महत्या की थी। हालांकि पुलिस ने कई एंगल पर काम कर तथ्य भी जुटाए थे परंतु उनका दोनों की मौत से कोई लेना देना नहीं था। महिला ने भी स्वीकारा कि वह भी बच्चों के साथ आत्महत्या करना चाहती थी ताकि पति को सबक सीखा सके। आर्थिक तंगी और पति द्वारा दूरी बनाने से वे डिप्रेशन में थे। बच्चों की आत्महत्या के पीछे पति पत्नी का उकसाना सामने आया। बच्चों की आत्महत्या मामले में पति पत्नी के खिलाफ 305 और 306 का केस दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार किया है। हालांकि साक्ष्य छिपाने सहित अन्य धाराएं जांच के बाद बढ़ाई जा सकती है।
Published on:
03 Apr 2024 12:54 am
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