4 मार्च 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

चंद्रग्रहण के बाद बाबा महाकाल का शुद्धिकरण, पवित्र नदियों के जल और दूध से कराया गया स्नान

Baba Mahakal Purified : चंद्रग्रहण के सूतक काल खत्म होते ही बाबा महाकाल का पवित्र नदियों के जल से शुद्धिकरण किया गया। महाकाल मंदिर की शिखर समेत गर्भगृह, नंदी हॉल और परिसर की जल से सफाई की गई।

less than 1 minute read
Google source verification
Baba Mahakal Purified

चंद्रग्रहण के बाद बाबा महाकाल का शुद्धिकरण (Photo Source- patrika)

Baba Mahakal Purified : चंद्रग्रहण के सूतक काल खत्म होने के बाद मध्य प्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन के बाबा महाकाल का शुद्धिकरण किया गया। महाकालेश्वर मंदिर की शिखर समेत गर्भगृह, नंदी हॉल और परिसर की जल से सफाई की गई। जबकि बाबा महाकाल भगवान को पवित्र नदियों के जल और दूध से स्नान कराया गया।

दरअसल, चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण के खत्म होने के बाद मंदिर का विधिवत रूप से शुद्धिकरण करना होता है। इसी कड़ी में महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर शुद्ध पानी से जलवर्षा कर शुद्धिकरण किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार कर संध्या आरती की गई।

संध्या आरती में बाबा को लगाया गया महाभोग

वेदकाल में अनादिकाल से ग्रहण के दौरान भोग नहीं लगाने की परंपरा है। यही कारण है कि, संध्या आरती में बाबा महाकाल को महाभोग लगाया जाता है। बता दें कि धार्मिक नगरी उज्जैन में सूतक काल की शुरुआत सुबह 6:20 से हुई, जिसके बाद शहर के अधिकांश वैष्णव मंदिरों में पट बंद रहे। कई जगह मंदिर के मेन गेट पर ताले लगा दिए गए। वहीं, मूर्तियों को कपड़े से ढंक दिया गया। हालांकि, दर्शन का सिलसिला जारी रहा।

सभी मंदिरों में लटके ताले

साल का पहला चंद्र ग्रहण मंगलवार को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर लगा, जिसका सूतक काल सुबह 6.20 से लगा है। सूतक काल में देवी देवताओं के पूजन पर प्रतिबंध लगने के कारण मंदिरों के कपाट को बंद रखा गया। शहर के छोटे बड़े मंदिरों के पट सुबह 6 बजे ही बंद कर दिए गए। इस दौरान मंदिरों में सन्नाटा पसरा रहा। उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनि आश्रम, अंगारेश्वर महादेव मंदिर के पट भी बंद रहे, जिन्हें चंद्रग्रहण खत्म होने के बाद खोला गया।