
अभी अस्पताल में 700 मरीज आते लेकिन एंट्री 500 की ही हो रही है, नई व्यवस्था में डॉक्टर्स को जांच करवाने से पहले ओपीडी में पुरानी पर्ची दिखाना होगी, नहीं लगेगा शुल्क
उज्जैन. जिला अस्पताल की ओपीडी अंतर्गत रोज जितने मरीज डॉक्टर्स से उपचार करवा रहे हैं, उसकी तुलना में ७०-८० फीसदी की ही रिकार्ड में एंट्री हो रही है। वर्षों से रिकार्ड में हो रही इस चुक को दूर करने के लिए अब नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके अंतर्गत जो मरीज पूर्व में ओपीडी काउंटर से पर्ची बनवाकर जांच करवा चुका है, दोबारा डॉक्टर्स से जांच करवाने के लिए उसे फिर ओपीडी काउंटर से पुरानी पर्ची पर एंट्री करवाना होगी। हालांकि दूसरी बार उसे पंजीयन शुल्क नहीं चुकाना होगा।
वर्तमान में जिला अस्पताल की ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) में प्रतिदिन औसत करीब ७०० मरीज स्वास्थ्य परीक्षण के लिए पहुंच रहे हैं जबकि ओपीडी रिकार्ड में एंट्री करीब ५००-५५० लोगों की ही होती है। दरअसल फोलोअप अंतर्गत दोबारा जांच करवाने आने वाले मरीजों की दोबारा एंट्री नहीं होती थी। इससे रोज अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की वास्तविक संख्या रिकार्ड पर नहीं आ पा रही थी। ऐसे में अब स्वास्थ्य प्रशासन ने व्यस्था में बदलाव किया है। नई व्यवस्था से मरीज या परिजन पर आर्थिक भार नहीं बढ़ेगा लेकिन थोड़ा समय जरूर अतिरिक्त लगेगा।
अभी यह व्यवस्था थी
अभी नए मरीजों को डॉक्टर्स से जांच करवाने के पूर्व ओपीडी काउंटर पर तय शुल्क देकर पंजीयन करवाना होता था। काउंटर से प्राप्त पर्ची के आधार पर ही डॉक्टर मरीज की जांच करते और इससे ही नि:शुल्क दवाई मिलती। कुछ दिन में उक्त मरीज को उसी स्वास्थ्य समस्या को लेकर दोबारा जांच करवाना होती तो उसे दूसरी बार ओपीडी काउंटर पर जाने की आवश्यकता नहीं थी। वह पुरानी पर्ची के आधार पर ही सीधे डॉक्टर्स से परीक्षण करवाता और दवा ले सकता था। इस प्रक्रिया में मरीज तो अस्पताल आ रहा है लेकिन ओपीडी रिकार्ड में इसकी एंट्री नहीं हुई। इससे मरीजों की वास्तविक संख्या और ओपीडी की एंट्री संख्या में बड़ा अंतर आ रहा था।
अब यह व्यव्स्था होगी
नए मरीज को उपचार सुविधा के लिए ओपीडी कांउटर पर पंजीयन करवाने व पर्ची लेकर डॉक्टर्स से परामर्श, दवाई लेने आदि की प्रक्रिया पूर्व की तरह ही रहेगी। यदि उक्त मरीज उसी बीमारी को लेकर कुछ दिन बाद दोबारा आता है तो अब वह पुरानी पर्ची के आधार पर सीधे डॉक्टर से नहीं मिल सकेगा। उसे पहले पुरानी पर्ची ओपीडी काउंटर पर दिखाना होगी। काउंटर पर उस पर्ची की एंट्री होगी, तारीख लिखाएगी और इसके बाद वह डॉक्टर्स से मिल सकेगा, दवाई ले सकेगा। ऐसा होने से अस्पताल में आने वाले नए-पुराने दोनो प्रकार के मरीजों की ओपीडी रिकार्ड में एंट्री हो सकेगी।
योजना में अस्पताल को मिलेगा लाभ
शासकीय योजना, फंड आदि के निर्धारण का बड़ा आधार शासकीय अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या होती है। यदि शासकीय अस्पताल की ओपीडी, एमरजेंसी आदि में आने वाले मरीजों की संख्या अधिक है तो वहां डॉक्टर्स व अन्य स्टॉफ की संख्या का निर्धारण, बेड, सुविधाओं के लिए जारी होने वाला फंड आदि का निर्धारण भी अधिक होता है। जिला अस्पताल के ओपीडी रिकार्ड में वर्षों से हो रही चुक दूर होने से अब रिकार्ड में दैनिक मरीजों की संख्या बढ़ेगी और वास्तविक आंकड़े के आधार पर मरीजों की सुविधा का निर्धारण होगा।
इनका कहना
ओपीडी में पंजीयन की व्यवस्था में संशोधन किया गया है। फालोअप के लिए दोबारा आने वाले मरीजों की पुरानी रसीद पर भी एंट्री की जाएगी जिससे असप्ताल आने वाले मरीजों की वास्तविक संख्या रिकार्ड में आ सके।
- डॉ. बीआर शर्मा, आरएमओ जिला चिकित्सालय
Published on:
18 Jun 2022 09:30 am
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