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उज्जैन. एक परिवार के साथ आई दो युवतियां का सामान्य वस्त्रों पर साड़ी लपेटकर महाकाल मंदिर के गर्भगृह में जाने का प्रयास कर रही थीं, लेकिन वह विफल हो गया। मंदिर के सत्कार कक्ष में तैनात नायब तहसीलदार ने उन्हें रोक दिया। दोनों युवतियों को नंदी हॉल से ही दर्शन कर संतोष करना पड़ा।
गर्भगृह प्रवेश में प्रतिबंध
महाकाल मंदिर के गर्भगृह प्रवेश में प्रतिबंध की अवधि में निर्धारित ड्रेस पहनाने पर पूजन की अनुमति मिलती है। महाकाल मंदिर प्रबंध समिति का नियम है कि गर्भगृह के बाहर से दर्शन की व्यवस्था के दौरान गर्भगृह में प्रवेश के लिए पुरुष को सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है। सामान्य वेेशभूषा में प्रवेश वर्जित होता है। मंदिर के कतिपय सेवक और पुरोहित इस नियम का मखौल उड़ाते हैं।
पुलिस का वीआईपी प्रोटोकॉल था
वीआईपी प्रोटोकॉल की अनुमति के आधार पर दो युवतियों को जींस-टॉप पर साड़ी लपेटकर महाकाल मंदिर के गर्भगृह ले जाया जा रहा था। सोमवार को एक पुलिसकर्मी ने मंदिर के सत्कार कक्ष पर पुलिस वीआईपी प्रोटोकॉल का हवाला देकर चार महिला श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह में जाकर पूजन की प्रोटोकॉल अनुमति स्लीप प्राप्त की। एक पुलिसकर्मी के साथ चारों जब पुलिस चौकी स्थित डी-गेट से मंदिर परिसर में जा रही थीं, तब मंदिर के सत्कार कक्ष में तैनात नायब तहसीलदार सोनाली पटवा को जानकारी मिली कि चारों महिलाओं में से दो ने सामान्य वस्त्र पर साड़ी लपेट रखी है। नायब तहसीलदार पटवा ने चारों महिलाओं को रोक चर्चा कर वास्तविकता पता की। महिलाओं ने सामान्य वस्त्र पर साड़ी पहनने की बात स्वीकार की। इस पर नायब तहसीलदार ने नियमों का हवाला दिया और बताया कि इस तरह से साड़ी पहनकर मंदिर में नहीं जाने दिया जाएगा। महिलाओं ने नियम पालन की सहमति दी। इसके बाद प्रोटोकॉल अनुमति स्लीप संशोधन कर दो महिलाओं को गर्भगृह और युवतियों को नंदी हॉल तक की अनुमति प्रदान की गई। चूंकि मसला पुलिस अधिकारी के परिवार से जुड़ा हुआ है, इसलिए मंदिर के अधिकारी और सेवक यह बताने को तैयार नहीं थे, कि प्रोटोकॉल किसके नाम से था।
आसानी से मिल जाती है साड़ी
सामान्य वेशभूषा में दर्शन के लिए आने वाली महिला और युवतियों को पूर्व से पहने हुए कपड़ों के ऊपर ही साड़ी लपेटकर महाकाल मंदिर में प्रवेश आम बात हो गई है। साड़ी की व्यवस्था भी आसानी से हो जाती है। मंदिर के कतिपय सेवक, पुजारी और मंदिर के आसपास की दुकानें, होटल, रेस्ट हाउस वाले नाममात्र शुल्क और श्रद्धालुओं की मांग पर साड़ी भी बड़ी आसानी से उपलब्ध करा देते हैं। खास बात यह कि जींस-टॉप, सलवार-सूट पर साड़ी लपेटने के लिए किसी गुप्त स्थान की आवश्यकता ही नहीं है। एेसे में साड़ी लपेटने का कार्य खुलेआम होता है।
Published on:
10 Jul 2018 09:00 am
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