
उज्जैन के बड़नगर के कलीम खान
एमपी के उज्जैन के बड़नगर के कलीम खान ने कमाल कर दिखाया है। छोटे से किसान का यह बेटा अब भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानि सेबी का रिसर्च एनालिस्ट बन गया। कलीम खान ने बेहद संघर्ष के बाद यह उपलब्धि पाई। वे अपने गांव पलदूना में कच्चे घर में रहे, उनके पास कोचिंग तक के लिए पैसे नहीं थे पर हौसला नहीं खोया।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा आयोजित परीक्षा में हर वर्ष ये उपलब्धि हासिल करने के लिए हज़ारों विद्यार्थी प्रयास करते हैं लेकिन कलीम ने प्रथम प्रयास में यह सफलता अर्जित की है और पंजीकृत हुए हैं। कलीम अब तक ये उपलब्धि हासिल करने वाले उज्जैन जिले के तीसरे व्यक्ति तथा मध्य प्रदेश के 62वें व्यक्ति हैं।
कलीम सीए (न्यू दिल्ली) और एसीसीए (लंदन यूके) के भी फाइनल स्तर के अभ्यर्थी हैं। चर्चा में उन्होंने बताया कि स्कूली शिक्षा शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल बडनगर से हुई है। स्नातक एवं स्नातकोत्तर विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से किया। रिसर्च एनालिस्ट बने कलीम अपनी फर्म पेट्रेल कैपिटल रिसर्च में कार्य करते हुए इक्विटी, डेरीवेटिव और फोरेक्स पर रिसर्च रिपोर्ट और कंसल्टेंसी की सेवाएं बड़नगर तथा उज्जैन में स्थित कार्यालय द्वारा देंगे।
पॉजिटिव सोच ने आगे बढ़ाया
कलीम बताते हैं कि उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। इनका खेत में ही कच्चा मकान है। पिता सलीम खान खेती और लोडिंग वाहन चलाकर घर खर्च चलाते हैं। आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद पिता ने कलीम को खूब पढ़ाया और कलीम ने भी कभी हार नहीं मानी। इसे चुनौती के रूप स्वीकार कर लक्ष्य हासिल किया।
नहीं कर सके कोचिंग
अभी वे सीए फाइनल ईयर स्टूेंड्टस हैं, वहीं लंदन से ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। रिचर्स एनालिस्ट बनने के लिए कोचिंग नहीं की। अब वे शेयर मार्केट में ट्रेडिंग करने वालों को कंपनी के डेटा एनालिसीस कर रिकमंड करेंगे। उन्होंने कहा सफलता का श्रेय मेरे माता-पिता को है।
Published on:
16 Feb 2024 03:13 pm
बड़ी खबरें
View Allउज्जैन
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
