
kartik month 2018 shubh muhurat with hindi panchang
ललित सक्सेना@उज्जैन. शरद पूर्णिमा से महाकाल की नगरी उज्जैन में पुण्य सलिला मां शिप्रा के पावन तट पर कार्तिक स्नान का सिलसिला शुरू हुआ। पूरे एक माह तक भौर के तारे के उदय होने पर महिला-पुरुष तीर्थ तटों पर पहुंचेंगे और पुण्य लाभ अर्जित करेंगे। कार्तिक स्नान का जहां धार्मिक-पौराणिक महत्व तो है ही, साथ ही इस मास में होने वाली ऋतु परिवर्तन के चलते यह हमारे जीवन में भी विशेष महत्व रखता है। आइए...जानें इस मास का हमारे जीवन में क्या विशेष प्रतिफल है।
धर्म शास्त्र के अनुसार
धर्म शास्त्र के अनुसार बारह मास में कार्तिक का विशेष महत्व है। यह हमारे जीवन में भी विशेष महत्व रखता है। इसके कई आधार हैं, जिसमें ऋतु परिवर्तन के चक्र से लेकर मास पर्यंत सूर्य संक्रांंति का प्रभाव तथा सूर्य की तुला राशि में होने के बावजूद कार्तिक में वर्ष के श्रेष्ठ त्योहारों का होना, देव का जाग्रत होना, चातुर्मास का समापन आदि ये सब इस बात को स्पष्ट करते हैं, कि बारह माह में कार्तिक मास का हमारे जीवन में विशेष महत्व है।
पाप निवारण के लिए खास है यह महीना
ज्योतिषाचार्य पं. अमर डिब्बावाला ने बताया कि विष्णु पुराण के अनुसार राधा दामोदर की पूजा का यह माह बताया गया है। अपने जीवन के ज्ञात-अज्ञात, पाप दोषों से निवृत होने का यह विशिष्ट माह है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि कार्तिक माह के दौरान भगवत भक्ति, ईष्ट कृपा, महालक्ष्मी की कृपा, यम के भय से मुक्ति, भाई-बहनों के संबंधों को दृढ़ता प्रदान करने की विशेष अवस्था, साथ ही आरोग्यता प्राप्त करने के लिए आंवले का पूजन करना, यह इस माह की प्रमुख उपलब्धियां हैं, जो मानव जीवन में अपना विशेष प्रभाव रखती हैं।
ऋतु चक्र के आधार पर
ऋतु चक्र के आधार पर देखें तो शरद ऋतु का आगम्य प्रभाव तथा प्रकृति में ऊर्जा का परिवर्तन तथा उस ऊर्जा से मानसिक, वैचारिक, शारीरिक परिवर्तन तथा इससे प्रेरित जीवन की आर्थिक उपलब्धि, धार्मिक-आध्यात्मिक प्राप्ति का यह प्रभावशाली माह है। धर्म शास्त्र के अनुसार इस माह में सूर्य के उदयकाल से पहले तीर्थ नदियों पर स्नान करके राधा माधव के भक्ति गीत तथा तुलसी का पूजन करने से अपने पितरों के तारने के साथ-साथ परिवार में सुख-समृद्धि भी देता है।
तुलसी पूजन से परिवार में खुशियां
राधा दामोदर का पूजन जीवन में अनिष्ट, समस्त बाधा का निवारण करने वाली मानी गई है। तुलसी का पूजन परिवार में स्त्रियों के सौभाग्य वृद्धि का तथा विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष का कारक माना गया है। साथ ही तुलसी की कृपा से परिवार में सुख, शांति, आरोग्यता, पति की दीर्घायु प्राप्त होती है।
इस मास आते हैं प्रमुख त्योहार
इस मास के प्रमुख त्योहारों की दृष्टि से देखें तो करवा चौथ, एकादशी, द्वादशी, धनतेरस, रूपचौदस, दीपावली, अन्नकूट, भाई दूज, गौरी तृतीया, आंवला पंचमी, आंवला नवमी, पर्यंत तीन दिवसीय आंवल उत्सव तथा देवउठनी एकादशी एवं कार्तिक की चतुर्दशी व पूर्णिमा ये विशेष महत्वपूर्ण त्योहर व व्रत इस मास में करने से संपूर्ण वर्ष के श्रेष्ठ व्रतों का फल मिल जाता है।
यह करें इस माह में
इस माह में विशेष यह है कि तिल्ली के तेल का उबटन लगाने से अज्ञात भय से निवृति मिलती है। घर की छत पर अपनी ऊंचाई के बराबर अष्टदल पर दीपक चैतन्य करने से अर्थात अष्टदल पर आठ व मध्य में एक दीपक चैतन्य करने से लक्ष्मी व इंद्र की ही कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा भी पितृ लोक से पितृ इस मास में खासकर तुला राशि की सूर्य संक्रांति विशेष मानी गई है। क्योंकि कन्या राशि से लेकर वृश्चिक तक ये तीन राशियां सूर्य की परिभ्रमण की अवस्था पितरों के लिए विशेष मानी जाती है। इसके अंतर्गत देव अग्रजों के द्वारा पितरों की पूजा होती है, तो उनकी कृपा रहती है। यदि कन्या राशि के सूर्य में या तुला राशि के सूर्य में भी पूजा नहीं हो पाती है, तो पितृ कुपित होते हैं। मदन रत्न ग्रंथ के अनुसार पितृ श्राप देकर जाते हैं, इसलिए इस दोष से बचने के लिए कार्तिक माह में पितरों के निमित्त राधा दामोदर का पूजन करने के बाद तर्पण अवश्य करना चाहिए। काले तिल का दान ताम्र कलश में भरकर अवश्य करना चाहिए। साथ ही यदि पितरों के निमित्त पंच रत्नों का दान करें तो धन कोष कभी रिक्त नहीं होता कुबेर की कृपा बनी रहती है।
दीपों के दान का है यह महीना
यह माह दीपों के दान का है, अधिक से अधिक दीप चैतन्य करने से कुल की सात पीढ़ी तृप्त होती है, आगे वंश वृद्धि भी होती है। कार्तिक माह में तीर्थ पर दीप दान, अंधेरे मंदिरों में दीपदान, गाय घर में दीप, घोड़े का अस्तबल, बावड़ी की चौकी, कुएं का मुहाना, सुनसान गली का अंधेरा। इन क्षेत्रों में पूरे माह दीप प्रज्जवलित करें। यदि मास में नहीं हो सके, तो धन तेरस, रूप चौदस, दीपावली एवं कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी, एकादशी, चौदस व पूर्णिमा पर पंचमहाभूत एवं पितरों के निमित्त तीर्थ व उपयुक्त स्थानों पर दीप दान करने से जीवन में प्रतिष्ठा, पराक्रम, आर्थिक, पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है। वंश में वृद्धि के साथ ही अग्रजों को दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
Published on:
05 Oct 2017 07:42 pm

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