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सावन में कोरोना का साया, इस बार भी नहीं आ सकेंगे कावड़ यात्री

kawad yatra 2021 : कोरोना महामारी के बाद अब तीसरी लहर के प्रकोप से बचने के लिए प्रशासन नहीं देगा अनुमति...।

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उज्जैन. बाबा महाकाल की नगरी में हर रिमझिम फुहारों के बीच सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए जल चढ़ाने कावडि़ए दौड़े चले आते हैं। पिछले साल की तरह इस बार भी कोरोना के कहर ने इनके कदमों को रोक दिया है। इस बार भी सावन मास में कावडिय़ों के आने पर प्रतिबंध रहेगा।

25 जुलाई से सावन मास आरंभ होगा। बाबा महाकाल के मंदिर (mahakal temple ujjain) में सावन मास को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। कलेक्टर ने नंदी हॉल और गर्भगृह में आम व खास के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। बीते वर्ष की भांति इस बार भी कावड़ यात्री शहर में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। आम दर्शनार्थियों की संख्या भी सीमित रखी जाएगी।

देशभर से आते हैं श्रद्धालु

श्रावण-भादौ मास में बाबा महाकाल की एक झलक पाने देशभर से भक्त भगवान महाकाल के दरबार में उमड़ते हैं। परंपरानुसार श्रावण मास में भगवान महाकाल की हर सोमवार को सवारी भी निकलती है, इस बार कुल सात सवारियां निकाली जाएंगी। भस्म आरती भी निर्धारित समय से दो घंटे पहले शुरू होती है। मंदिर के पट रात्रि 2.30 बजे खुलते हैं।

बीते वर्ष कावडिय़ों के लिए ये थी व्यवस्था

पिछले साल कोरोना काल के चलते श्रद्धालुओं को श्रावण मास में अग्रिम बुकिंग के आधार पर दर्शन कराए गए थे। कावड़ यात्री तथा भक्तों के जलाभिषेक पर रोक थी। मंदिर प्रशासन कावड़ यात्रियों द्वारा लाया गया जल एक पात्र में एकत्र किया जाता था। पात्र के भर जाने पर उसमें से प्रतीकात्मक रूप से दो घड़े जल भरकर भगवान को अर्पित किया जाता था।