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उज्जैन. बगैर अनुमति विकसित हुई अवैध कॉलोनियों को वैध कराने में संबंधित कॉलोनाइजर व रहवासी संघ के रुचि नहीं लेने पर अब नगर निगम ने नई कवायद शुरू की है, जिसके तहत ऐसी कॉलोनियों को चिन्हित कर निगम अमला वहां मैदानी सर्वे कर हकीकत देखेगा। जो काम होना है उनका एस्टीमेट बनाकर इसकी राशि संबंधित कॉलोनाइजर व रहवासियों से ली जाएगी। चुनावी साल होने से सरकार ने २०१२ की बजाय अब २०१६ से पहले विकसित कॉलोनियों को इस दायरें में रखा है। सिलसिलेवार निगम इनमें सर्वे की कार्रवाई करेगा।
हर क्षेत्र में अवैध कॉलोनियां
शहर के अमूमन हर क्षेत्र में अवैध कॉलोनियां बीतें सालों में कटी हैं। कुछ में तो निगम ने विकास कार्य करा दिए, लेकिन अधिकांश में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। सरकार के निर्देश पर साल २०१७ फरवरी में निगम ने ऐसी कॉलोनियों को वैध करने आवेदन बुलाए थे, लेकिन किसी ने रुचि नहीं ली। लिहाजा अब नए निर्देशों के पालन में निगम ऐसी कॉलोनियों में सर्वे कराकर जरूरतों का आकलन निकालेगा। जो विकास कार्य होना है इसके लिए कुछ अंश निगम देगा बाकी रहवासियों व कॉलोनाइजर से वसूला जाएगा।
ये कुछ कॉलोनियां चिह्नित
निगम ने पहली बार सर्वे कराने गायत्री नगर, सरस्वती नगर, मोहन नगर, दुर्गा कॉलोनी, संत बालीनाथ नगर, श्रीकृष्ण कॉलोनी आदि को चिन्हित किया है। यहां जो काम होना है इसका आकलन निकाल एस्टीमेट बनेगा। इस प्रक्रिया के बाद अगले चरण मंे अन्य अवैध कॉलोनियों मंे भी एेसे सर्वे होंगे।
नियम में संशोधन, पर असर नहीं
हाल ही में सरकार ने कॉलोनाइजर रजिस्ट्रीकरण नियम १९९८ में संशोधन करते हुए अवैध को वैध घोषित करने के मापदंड बनाए हैं। इसी के मद्देनजर कॉलोनी सेल ने बीते साल इसकी कार्रवाई आरंभ की थी, लेकिन संबंधित लोगों के रुचि नहीं दिखाने से अब निगम खुद इन कॉलोनियों की टोह लेगा।
एक नजर
शहर में वार्ड कुल ५४
कुल जोन ०६
२०१६ से पहले की अवैध
कॉलोनियां करीब १५०
इनके कुल रहवासी करीब १.३० लाख
रहवासियों को ये लाभ
कॉलोनी अवैध होने के चलते बैंकों से ऋण नहीं मिल पाता। वैध होने पर ये समस्या दूर होगी।
निगम अवैध कॉलोनियों में विकास कार्य नहीं कर सकता। वैध होने के बाद ये कार्य हो सकेंगे।
मूलभूत सुविधाओं जैसे सफाई, पानी, स्ट्रीट लाइट आदि की समस्याएं दूर हो सकेंगी।
कॉलोनी वैध होने से संबंधित कॉलोनी में भूखंड-भवन के दाम में २० फीसदी तक इजाफा हो सकता है।
संपत्ति नामांतरण आसानी से संपादित हो सकता है।
जटिल नियमों का रोड़ा
सरकार ने अवैध कॉलोनियों को वैध करने का प्रावधान साल २०१३ से बना रखा है।
प्रक्रिया व मापदंड जटिल होने से इस प्रक्रिया में अधिक लोग लाभान्वित नहीं हो पाते।
विकास शुल्क के नाम पर निगम भारीभरकम राशि मांगता है। कॉलोनाइजर ध्यान देते नहीं और रहवासी इतनी रकम एकत्रित नहीं कर पाते। यदि सरकार इन नियम में शिथिलता दें और इसे कम खर्च वाली प्रक्रिया बनाएं तो ही लोग लाभ ले सकेंगे।
" शासन के नए निर्देशों के तहत कुछ अवैध कॉलोनियों को पहली बार में चिन्हित किया है। वहां मैदानी सर्वे कराकर जरूरतों का आकलन निकालेंगे। फिर रहवासी व कॉलोनाइजरों को सूचना पत्र देकर जरूरी राशि लेंगे। ताकी ये बस्तियां भी वैध हो सकें और यहां अगले विकास कार्य कराने में अड़चन ना आएं। कॉलोनी सेल से प्रक्रिया जारी है। "
- डॉ. विजय कुमार जे., निगमायुक्त
Published on:
17 Feb 2018 10:16 am
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