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जिंदगी खुली किताब हो, कोई भी पन्ना पलटा जाए तो आंखें शर्म से झुकें नहीं

आज खाराकुंआ पेढ़ी मंदिर पर आगमन व प्रवचन

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Discourse,

उज्जैन. लाइफ ओपन बुक की तरह होना चाहिए, कभी भी कोई सा पन्ना पलटा जाए तो आंखें शर्म से झुकना नहीं चाहिए। चरित्र बचाने के लिए शर्म व संस्कारों को बचाना होगा। खुद की एेसी कोई भी प्रवृत्ति जिसके कारण किसी दूसरे के सामने आंखें शर्म से झुक जाए मानो चरित्र ठीक नहीं। ये उद्गार पद्भूषण आचार्य रत्नसुंदरसूरी ने हीर विजय सूरी बड़ा उपाश्रय में शुक्रवार को प्रवचन के दौरान व्यक्त किए। शनिवार सुबह ७ बजे उनका यहां से श्री ऋषभदेव छगनीराम पेढ़ी मंदिर पर आगमन होगा। सुबह ९ बजे यहीं उपाश्रय में प्रवचन होंगे।
आचार्यश्री ने कहा कि आज का माहौल बेशर्मी भरा है। हम नई पीढ़ी को इसके लिए कोसते हैं, लेकिन यहां बैठे लोगों को ये भी विचारना होगा कि हमने अपनी संतानों को कौन से एेसे संस्कार दिए, जिससे हमारा परिवार गर्व करे। एक बात तय मानें यदि मनुष्य का चरित्र गया तो मानो सब कुछ गया, लेकिन मुझे पता है मेरी इन बातों की कोई मॉर्केट वेल्यू नहीं है। प्रवचन के बाद लालचंद रांका परिवार की ओर से लड्डू प्रभावना वितरित की गई।
आज भी स्क्रीन पर प्रसारण, जगह पड़ी कम
बड़ा उपाश्रय में भी समाजजनों की अधिक संख्या के कारण नीचे हॉल में स्क्रीन पर प्रवचन लाइव प्रसारित हुए। खाराकुआं पेढ़ी मंदिर पर भी प्रथम तल वाले हॉल में स्क्रीन लगाई गई है। ताकी लोग यहां भी प्रवचन सुन सके। बारिश के मद्देनजर परिसर में वाटरप्रूफ पंडाल भी लगाया है। पेढ़ी सचिव जयंतीलाल तेलवाला के अनुसार सुबह ७ बजे समाजजन आचार्यश्री की अगवानी कर उन्हें पेढ़ी पर लाएंगे।
जैन संत का नगर प्रवेश कल
उज्जैन। जैन संत श्रीजनि मणिप्रभ सागर सूरीश्वर महाराज व महत्तरा पद विभूषिता दिव्य प्रभा व साध्वी मंडल का नगर प्रवेश रविवार को होगा। समाजजन सुबह 8 बजे कार्तिक मेला प्रांगण में संत की अगुवाई करेंगे, जिसके साथ नगर में एक चल समारोह निकाला जाएगा। संत उज्जैन में प्राचीन जैन तीर्थ अवंती पाश्र्वनाथ के जीर्णोद्धार का अवलोकन कर दोपहर 2 बजे मांगलिक प्रदान करेंगे। १६ जुलाई को संत इंदौर के लिए विहार करेंगे। संत का २२ जुलाई से इंदौर में चातुर्मास है। आयोजन के लिए हीराचंद्र छाजेड, पुखराज चौपड़ा, निर्मल सकलेचा, चंद्रशेखर डागा, ललितकुमार बाफना, रमेश बांठिया, विजयराज कोठारी, महेंद्र गादिया, नरेंद्र कुमार धाकड़, रजत मोहता आदि जुटे हुए हंै।