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रामानुजकोट में मनेगा दिव्य शताब्दी महोत्सव, 18 को निकलेगी भव्य कलश यात्रा

सात दिन चलने वाले महोत्सव में प्रतिदिन होंगे कई आयोजन

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उज्जैन. पतित पावनी मां शिप्रा के तट पर स्थापित श्रीरामानुजकोट आश्रम में भगवान लक्ष्मीवैंकटेश की प्रतिमा प्रतिष्ठा को इस साल सौ वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इस अवसर पर पीठाधीश्वर स्वामी रंगनाथाचार्य के सत्संकल्प, श्रीमैलकोटे मधुरकवि परंपरा के वर्तमान गादी स्वामी शैलानंतपुरुष जगद्गुरु आचार्य श्रीमहंत संत आदि की उपस्थिति में इस वर्ष संवत 2075 आषाढ़ शुक्ल षष्ठी से आषाढ़ शुक्ल द्वादशी यानी 18 से 24 जुलाई तक भगवान लक्ष्मीवैंकटेश महाप्रभुी का सप्त दिवसीय शताब्दी महोत्सव मनाया जाएगा।

सात दिन होंगे कई आयोजन
्आश्रम के पीआरओ आत्माराम शर्मा ने बताया कि 18 जुलाई को सुबह 9 बजे रामघाट से कलश यात्रा आरंभ होगी, जिसमें आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा अन्य शहरों से भक्त शामिल होंगे। 18 से 22 जुलाई तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 12.30 बजे तक दिव्य प्रबंधपाठ होगा। 18 से 24 जुलाई तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 12.30 बजे तक भागवत कथा, वाल्मीकि रामायण व श्रीविष्णु पुराण पारायण होगा। 20 जुलाई को सुबह 9 बजे कलश आवाहन व शाम को 7 बजे शयन अलंकार दर्शन होंगे। 21 जुलाई को सुबह 9 बजे अभिषेक द्रव्य आवाहन पूजन व शाम 7 बजे शयन सेवा दर्शन होंगे। 22 जुलाई को सुबह 7 बजे दिव्य सहस्त्रकलशाभिषेक, शाम 5 बजे शृंगार दर्शन, 6 बजे महाआरती व 7 बजे से महाप्रसादी वितरण की जाएगी।

18 से होगी भक्तमाल कथा
18 से 24 जुलाई तक प्रतिदिन दोपहर 3.30 से 7 बजे तक भक्तमाल कथा के अंतर्गत श्रीरामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य महाराज सद्भक्तों के दिव्य अमर चरित्र की प्रेमास्पद कथा का आयोजन होगा।

क्या है रामानुजकोट का इतिहास
सप्त मोक्ष पुरियों में से एक अवंतिका नगरी में एक शताब्दी पूर्व अनंतश्री विभूषित वै. वा. श्रीस्वामी गरुड़ध्वजाचार्य महाराज की तप:स्थली बनी उज्जैन। शिप्रा तट पर अपनी तपस्या आरंभ की। तपस्या के फलस्वरूप श्रीठाकुरजी का भव्य मंदिर एवं रामानुज संप्रदाय के इस भव्य मंदिर की स्थापना हुई। आश्रम बन गया, अब विचार चला कि इसमें कौन से ठाकुरजी विराजमान होंगे। उसी समय अनंत विभूषित स्वामी रामानुजाचार्य स्वामी महाराज को प्रेरणा हुई और उन्होंने स्वयं ही परंपरा से कमलाकांत महाप्रभुजी के मंगलविग्रह लक्ष्मीवैंकटेश महाप्रभुजी की स्थापना की। आश्रम में संस्कृत विद्यालय, गौशाला, पुष्प वाटिका, अन्नक्षेत्र, छात्रावास, पुस्तकालय एवं अतिथि कक्ष आदि विद्यमान हैं।