5 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

video : दिनभर में पांच रूप बदलते हैं महाकाल, दर्शन पाकर धन्य होते हैं भक्त

सुबह 4 बजे भस्म आरती में पहले जल-दूध से स्नान कराया जाता है, इसके बाद चंदन लेपन कर फूलों से बनी माला उन्हें धारण कराई जाती है।

2 min read
Google source verification
patrika

mahakal,Mahakal Temple,ujjain mahakal,ujjain mahakal temple,Ujjain Mahakal Mandir,

उज्जैन. भगवान महाकाल का प्रतिदिन अनूठा शृंगार किया जाता है। दिनभर में पांच बार आरती होती है, इस दौरान उनका अलग-अलग स्वरूपों में शृंगार किया जाता है। सुबह 4 बजे भस्म आरती में पहले जल-दूध से स्नान कराया जाता है, इसके बाद चंदन लेपन कर फूलों से बनी माला उन्हें धारण कराई जाती है। बाबा पर भस्मी चढ़ती है। इधर, भक्त भी टकटकी लगाए बाबा की एक झलक पाने को बेताब रहते हैं। झांझ-डमरू और शंख-नगाड़ों के साथ बाबा की भस्म आरती प्रतिदिन होती है। भक्त तालियां बजाकर बाबा की आरती का आनंद लेते हैं।

भोग आरती में फिर बदलता है रूप
भगवान महाकाल की प्रतिदिन भस्म आरती के बाद सुबह प्रात:कालीन आरती होती है। इसके बाद उन्हें 10.30 बजे भोग लगाया जाता है। इस आरती के दौरान वे फिर से अपना रूप बदलते हैं। बाबा को भोग नेवैद्य के रूप में लगाया जाता है, इसके पहले अनूठा शृंगार किया जाता है। पुजारी-पुरोहित और अन्य भक्त भी इस भोग आरती में शामिल होते हैं।

कभी लड्डू तो कभी भांग
बाबा महाकाल को कभी लड्डू तो कभी भांग चढ़ाई जाती है। धतूरा, आंकड़ा, बिल्व पत्र की मालाएं उन पर सदा ही शोभायमान रहती हैं। छत्र, मुकुट, चंदन और अन्य वस्त्र-आभूषणों के साथ दिनभर बाबा अनेक रूप बदल-बदल कर भक्तों को दर्शन देते हैं।

शयन आरती में गूंजते हैं नगाड़े
बाबा जिस अंदाज से सुबह जागते हैं, उसी तर्ज पर सोते भी हैं। बाबा महाकाल की शयन आरती भी बहुत भव्य होती है। रात 10.30 बजे शयन आरती शुरू होती है, जो 11 बजे तक चलती है। इसमें शामिल होने वाले भक्त बाबा को झांझ-डमरू, शंख-नगाड़ों के साथ सुलाते हैं और भोर की प्रथम किरण के साथ वे सुबह 4 बजे भस्म आरती के लिए फिर जगाते हैं।

दिनभर चलता है दर्शन का सिलसिला
बाबा महाकाल के दर्शनों का सिलसिला दिनभर चलता है। भीड़ अधिक होने के कारण कई बार गर्भगृह में प्रवेश वर्जित होता है, लेकिन सामान्य स्थिति में सभी लोग अंदर जाकर बाबा पर जल-दूध अर्पण करते हैं। दूर-दूर से आने वाले भक्त यहां आकर अपने आपको धन्य महसूस करते हैं।

अन्य मंदिर भी हैं यहां
बाबा महाकाल के इस एक मंदिर में करीब 42 से अधिक छोटे-बड़े मंदिर मौजूद हैं। यहां आने वाले हर भक्त इन मंदिरों में दर्शन लाभ पाते हैं। साथ ही शहर के अन्य कई बड़े मंदिरों में जाकर वे पूजा-अर्चना भी करते हैं।