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बुधवार को महाकाल का हुआ कुछ ऐसा शृंगार, पुत्र गजानन के रूप में दिए दर्शन

बुधवार ११ अपे्रल को पुत्र गजानन के रूप में शृंगार किया गया। जल-दूध अर्पण करने का सिलसिला सुबह से लेकर शाम तक चलता रहता है।

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उज्जैन. भगवान महाकाल दिनभर में कई रूप बदलते हैं। हर रूप बड़ा ही निराला है। भक्त भी इन निराले स्वरूपों के दर्शन पाकर धन्य हो जाते हैं। बुधवार ११ अपे्रल को पुत्र गजानन के रूप में शृंगार किया गया। स्नान, पूजा, शृंगार और जल-दूध अर्पण करने का सिलसिला सुबह से लेकर शाम तक चलता रहता है। शाम 5 बजे के बाद बाबा को जल-दूध चढऩा बंद हो जाता है। क्योंकि इसके बाद संध्या आरती के पहले भांग और ड्रायफ्रूट्स का शृंगार होता है। यह शृंगार शयन आरती तक रहता है।

दर्शन करना सौभाग्य की बात
भगवान महाकाल की प्रतिदिन सुबह 4 बजे भस्म आरती होती है। इस विशेष आरती में भस्म के अलावा शृंगार भी किया जाता है। इस आरती का दर्शन करना बड़े सौभाग्य की बात होती है। पुजारी प्रदीप गुरु का कहना है, इस एक आरती में जीवन से लेकर मरण तक का दृश्य उपस्थित होता है। बाबा महाकाल निराकार से साकार और फिर साकार से निराकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।

भोग आरती का प्रसाद नहीं खाते पंडे-पुजारी
प्रतिदिन सुबह १०.30 बजे भोग आरती होती है। बाबा महाकाल को हर दिन नैवेद्य अर्पण किया जाता है। इसके लिए मंदिर में ही एक कक्ष बना हुआ है, जहां साफ-स्वच्छ वातावरण में शुद्ध भोग तैयार किया जाता है। भोग आरती में चढ़ाया हुआ खाना पंडा या कोई पुजारी नहीं खाता, बल्कि यह महानिर्वाणी के महंत प्रकाशपुरी महाराज के लिए पहुंचाया जाता है।

संध्या आरती में भांग और ड्रायफ्रूट्स
भगवान महाकाल की संध्या आरती बड़ी विशेष होती है। इस दौरान बाबा का भांग और ड्रायफू्रट से अद्भुत शृंगार किया जाता है। आरती में शंख, झालर, नगाड़े आदि बजाए जाते हैं। भोले के भक्त इस महाशृंगार के दर्शन पाकर खुद को धन्य पाते हैं। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल पर भस्मी चढ़ाई गई। महानिर्वाणी के महंत प्रकाश पुरी महाराज के यहां से उनका प्रतिनिधि यहां आकर हर दिन भस्मी चढ़ाता है। यह कार्य मंदिर के पंडे या पुजारी आदि नहीं करते हैं।भस्म चढ़ाई जाने के बाद बाबा महाकाल को पुन: शृंगारित कर झांझ-मंजीरों, डमरुओं और नगाड़ों के साथ महाआरती उतारी जाती है।

आरती होती है, तब लाइटें बंद कर दी जाती हैं

जब भस्म आरती होती है, तब नंदी हॉल व कार्तिकेय मंडपम की सभी लाइटें बंद कर दी जाती हैं। गर्भगृह में केवल दीपों की प्रज्जवलित लौ में ही बाबा महाकाल के अद्भुत दर्शन होते हैं। जिन्हें निहार कर भक्त धन्य हो जाते हैं। इस महाआरती का दर्शन पाने के लिए हर कोई लालायित रहता है। नेता, मंत्री हो या अन्य कोई भी वीवीआईपी। सभी की एक बस यही लालसा रहती है, कि जैसे भी हो जीवन में एक बार बाबा महाकाल की यह अनूठी आरती का दर्शन जरूर करें।