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उफ…परीक्षाओं के दौर में ये लाउड स्पीकरों का शोर…कोई तो रोक लो…

प्रशासन भी ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर कार्रवाई में नाकाम
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उज्जैन

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Lalit Saxena

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Updated: 7 Feb 2018, 1:19 PM IST

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उज्जैन. अगले महीने से परीक्षाओं का दौर शुरू होने वाला है... हमारे नौनिहाल प्री-एक्जाम की तैयारी में दिन-रात जुटकर अपने भविष्य को संवारने में लगे हैं, लेकिन इनके सपने को शहर में होने वाला शोर खलल पैदा कर रहा है। शहर में धार्मिक स्थल हो, मैरिज गार्डन या जब तब निकलने वाले जलसे-जुलूस में बैखोफ होकर लाउडस्पीकर और डीजे का उपयोग किया जा रहा है बगैर इसके परवाह के लोगों को इससे क्या परेशानी हो रही है। शहर में बढ़ते शोर का सबसे ज्यादा असर विद्यार्थियों पर पढ़ रहा है। बावजूद इसके इन पर न रोक लग पा रही है न ही प्रशासन इन्हें रोकने में संजिदा दिखाई दे रहा है।

धार्मिक स्थलों से ज्यादा शोर
शहर में इन दिनों धार्मिक स्थल भी ध्वनि प्रदूषण के बड़े केंद्र बनते जा रहे है। धर्म स्थलों पर जरूरत से ज्यादा लाउडस्पीकर लगा दिए गए हैं तो दिन-रात इनसे आवाजे गूंज रही है। धार्मिक स्थल व धार्मिक भावनाएं जुड़ी होने के कारण लोग चाहकर भी इनका विरोध नहीं कर पा रहे है। शहर में कई धार्मिक स्थल ऐसे हैं जो तेज आवाज के लिए अतिरिक्त एम्पलीफायर भी लगाए हैं।

न मैरिज गार्डन पर कोई कार्रवाई न जुलूसों की जांच
शादी के इस सीजन में मैरिज गार्डन पर देर रात तक डीजे बजाए जा रहे हैं। शहर में निकलने वाले जुलूस में डीजे शामिल हो रहे हैं। नियमानुसार रात १० बजे बाद इन्हें बंद होना चाहिए वहीं जुलूस में तय सीमा में ध्वनि यंत्र लगाने हैं। स्थिति यह है कि पिछले महीनों ने प्रशासन की ओर से न तो मैरिज गार्डन पर कार्रवाई की गई न ही जुलूसों की जांच की गई। कोलाहल विरुपण अधिनियम को लेकर भी प्रशासन की ओर से सूचना तक जारी नहीं की गई है।

६० डेसीबल की आवाज सामान्य
मनुष्य के कान ८० डेसीबल तक की आवाज सुनने की क्षमता रखते हैं। सामान्य तौर पर ६० डेसीबल की आवाज सामान्य रहती है। स्थिति यह है कि शहर में बजने वाले डीजे व लाउड स्पीकरों की आवाज १०० से १५० डेसीबल तक रहती है।

बच्चों के खातिर शाजापुर में बंद हुए थे लाउडस्पीकर
परीक्षा के मद्देनजर और बच्चों के भविष्य को देखते हुए दो साल पहले शाजापुर में लाउडस्पीकरों को लेकर अभिनव पहल हुई थी। तत्कालीन कलेक्टर राजीव शर्मा ने शहर के मंदिर-मस्जिद प्रमुखों से अपील की थी वे परीक्षा के चलते लाउडस्पीकरों का उपयोग बंद करे या सीमित करें। उस समय कलेक्टर की अपील को धर्मप्रमुखों ने माना था। शहर के मंदिर-मस्जिदों में आरती और अजान बगैर लाउड स्पीकर के की जाने लगी थी। ऐसा ही प्रयोग शहर में भी किया जा सकता है।

मद्रास हाईकोर्ट ने दिए रोक के आदेश
लाउड स्पीकरों से बढ़ते शोर पर सोमवार को मद्राह हाईकोर्ट ने बढ़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने धार्मिक व सार्वजनिक स्थलों पर लाउड स्पीकर पर प्रतिबंध लगाने की बात कही। इस संबंध में पीएस को निर्देश जारी किए है। कोर्ट ने मामले में सख्त टिप्पणी भी की है ध्वनि प्रदूषण को लेकर समय-समय पर जारी निर्देशों का पालन भी नहीं हो रहा है। कोर्ट ने कहा कि हर धर्म में कहा गया है भगवान हर जगह मौजूद है भक्तों की प्रार्थना सुनने के लिए तो फिर ध्वनि यंत्रों की आवश्यकता नहीं। धर्म को निजी मामला बना रहना चाहिए। यही नहीं कोर्ट ने ध्वनि की तीव्रता जांचने अफसरों को उपकरण उपलब्ध करवाने की बात भी कही।

शिकायत मिलने पर करेंगे कार्रवाई
" बच्चे हमारी भी प्राथमिकता में हैं। ध्वनि प्रदूषण को लेकर हम आदेश जारी कर रहे हैं। जहां तक धर्मस्थलों की बात है तो इसके लिए नियम बने हैं। अगर कहीं शिकायत आती है तो हम कारवाई करेंगे। संकेत भोंडवे, कलेक्टर