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महाकाल की नगरी पधारीं मां गंगा

लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने गंगाजल योजना की शुरुआत की है। इस योजना की जिम्मेदारी  भारतीय डाक विभाग के पास है। उज्जैन में मंगलवार को गंगाजल योजना शुभारंभ हो गया। 

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Lalit Saxena

Jun 22, 2016

Ma Ganga arrival, city of  Mahakal

Ma Ganga arrival, city of Mahakal

उज्जैन. भारत में गंगाजल आस्था से जुड़ा हुआ है और हिंदू धर्म में सबसे पवित्र माना गया है। घर में कोई भी शुभ और धार्मिक काम हो। गंगाजल आवश्यक होता है। पहले लोगों को गंगा जल के लिए हरिद्वार और बनारस तक जाना पड़ता या फिर वहां जाने वाले से मदद लेनी पड़ती थी।

केंद्र सरकार ने गंगाजल योजना की शुरुआत की
लोगों की इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने गंगाजल योजना की शुरुआत की है। इस योजना की जिम्मेदारी भारतीय डाक विभाग के पास है। उज्जैन में मंगलवार को गंगाजल योजना शुभारंभ हो गया। देवास गेट स्थित पोस्ट ऑफिस में गंगाजल विक्रय के लिए काउंटर शुरू हुआ है। यहां पर 200 और 400 मि.ली. में बॉटल बंद गंगाजल लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध होगा।

सीधे ऋषिकेश से आया जल
गंगाजल की बॉटल तैयार करने का काम डाक विभाग के उत्तराखंड रीजन के पास है। ऋषिकेश में सीधे नदी से बोटल में जल को भरा जा रहा है और पैक कर अन्य शहरों में भेजा जा रहा है। पानी को सीधे नदी से भरने के पीछे भी पवित्रता ही कारण है।

विक्रय के लिए बॉटल पहुची उज्जैन
उज्जैन में योजना की शुरुआत के लिए करीब 50 बॉटल विक्रय के लिए भेजे गए हैं। मंगलवार को देवास गेट प्रवर अधीक्षक केएस तोमर, पोस्टमास्टर देवासगेट मुकेश कुमार लाड, शांतनु श्रीवास्तव, मुकेश कुम्भकार, दर्शन आदि की मौजूदगी में विक्रय शुरू हुआ। गंगाजल की छोटी बॉटल 15 रुपए और बड़ी बॉटल 22 रुपए की है।

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