14 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सावन मास : महाकाल की नगरी में छाई आस्था की बहार, श्रद्धालुओं का जमघट

महाकाल की नगरी सावन मास में आस्था के सागर जैसी हिलौरे ले रही है। देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन में बाबा महाकाल विराजित हैं।

3 min read
Google source verification
patrika

ujjain news,mahakaleshwar bhasma aarti,Nagchandreshwar darshan,mahakal daily darshan,mahakal ujjain live darshan,mahakaleshwar shivratri darshan,mahakaleshwar bhasma aarti video,mahakaleshwar app,mahakal bhasmarti darshan,

उज्जैन. भगवान महाकाल की नगरी सावन मास में आस्था के सागर जैसी हिलौरे ले रही है। देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन में बाबा महाकाल विराजित हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में यहां श्रद्धालुओं का जमघट लगा रहता है। यहां हर पर्व, तीज-त्योहार विधिपूर्वक मनाए जाते हैं। श्रावण मास में आस्था की बहार सी छाई नजर आ रही है। महाकाल मंदिर के बाहर का नजारा इन दिनों देखते ही बनता है, कब दिन होता है, कब रात...पता ही नहीं चलता।

सावन में उमड़ रहा भक्तों का सैलाब
सावन मास में भक्तों का सैलाब यहां उमड़ रहा है। शिवरात्रि, नागपंचमी या अन्य अवसरों पर इस धार्मिक नगरी में गांव-गांव से भक्त पहुंचते हैं। इस नगरी में सभी धर्म-संप्रदाय के लोग सौहाद्र्र के साथ रहते हैं। बड़ी संख्या में आने वाले कावडिय़ों और सिर पर कलश धारण कर नगर में आने वाली महिलाओं का सभीजन मिलकर स्वागत करते हैं।

रात ढाई बजे से खुल जाते हैं मंदिर के पट
12 ज्योतिर्लिंगों में सिर्फ भगवान महाकालेश्वर का ही ऐसा मंदिर है, जहां प्रतिदिन तड़के 4 बजे भस्म आरती होती है। सावन मास में भीड़ को देखते हुए रात ढाई बजे से मंदिर के पट खोल दिए जाते हैं। सबसे पहले भस्म आरती से शुरुआत होती है, इसके बाद दिनभर में करीब पांच अलग-अलग समय पर अलग-अलग आरतीयां यहां होती हैं।

तिल भर बड़ा है यहां का महत्व
इस नगरी का महत्व अन्य तीर्थ स्थलों से तिलभर ज्यादा है। राजाधिराज महाराज भगवान महाकाल इस नगर के राजा है। यहां सावन-भादौ मास के अलावा कार्तिक और दशहरे पर हर सोमवार को बाबा महाकाल चांदी की पालकी में विराजमान होकर नगरवासियों का हाल जानने शाही अंदाज से निकलते हैं। यह सवारी पूरी दुनिया में सुप्रसिद्ध है।

वर्ष में एक बार होते हैं इस मंदिर के दर्शन, उमड़ता है सैलाब
महाकाल मंदिर के शिखर में स्थित श्रीनागचंद्रेश्वर मंदिर के पट वर्ष में केवल एक बार नागपंचमी के दिन ही २४ घंटे के लिए खुलते हैं। इसके लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। इस बार पर्व 15 अगस्त को है। देशभर के श्रद्धालुओं में नागचंद्रेश्वर के दर्शन के प्रति श्रद्धा और उत्साह रहता है। नागपंचमी पर्व पर हर साल की तरह ही श्रद्धालु भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन कर सकेंगे। शिखर पर पहुंचाने वाली लोहे की सीढिय़ों के कारण कोई दुर्घटना नहीं हो व अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं के लिए प्रशासन ने कदम उठाए हैं।

प्रतिदिन होते हैं अनूठे शृंगार
भगवान महाकाल के प्रतिदिन अनूठे शृंगार होते हैं। पुजारी-पंडों द्वारा हर दिन उन्हें भांग, चंदन-ड्रायफ्रूट आदि से सजाया जाता है। महाकाल की आरती में शंख-झालर और डमरुओं की गूंज होती है। तड़के 4 बजे भस्म आरती के बाद सुबह 10.30 बजे भोग आरती होती है। भोलेनाथ को जल-दूध, दही और चंदन से स्नान के बाद पंचामृत पूजन किया जाता है। इसके बाद उन्हें भस्मी चढ़ाई जाती है।

महाकाल में हैं 40 से अधिक छोटे-बड़े मंदिर
महाकाल मंदिर में करीब 40 से अधिक छोटे-बड़े मंदिर हैं। इनके दर्शन के लिए भी श्रद्धालु रोज यहां पहुंचते हैं। सावन-भादौ मास में मंदिर आने वाले भक्तों की संख्या को देखते हुए मंदिर प्रबंध समिति और पुलिस-प्रशासन द्वारा चौबंद व्यवस्था की गई है। सामान्य दर्शनार्थियों को बैरिकेड्स से तथा वीवीआईपी लोगों के लिए प्रवचन हॉल के पीछे से रास्ता तय किया गया है। इसके अलावा प्रोटोकॉल से आने वाले दर्शनार्थियों के लिए पर्ची की व्यवस्था की गई है।

प्रतिदिन हजारों लोग खाते हैं यहां नि:शुल्क खाना
कोई पर्व हो या न हो महाकाल मंदिर में प्रतिदिन हजारों लोग नि:शुल्क भोजन करते हैं। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से यहां अन्न क्षेत्र चलाया जाता है। दूर-दराज से आने वाले भक्त पहले बाबा महाकालेश्वर का दर्शन लाभ लेते हैं, इसके बाद वे अन्नक्षेत्र की रसीद प्राप्त कर भोजन का आनंद लेते हैं।

मरीजों और दिव्यांगों के लिए ये है व्यवस्था
महाकाल पहुंचने वाले दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए मंदिर के मुख्य गेट पर ही ट्राइसिकल की नि:शुल्क व्यवस्था है। इसी तरह यहां एंबुलेंस और मरीजों के लिए इमरजेंसी डिस्पेंसरी सर्वसुविधायुक्त छोटा अस्पताल है, जहां नियमित रूप से चिकित्सक मौजूद रहते हैं। इसके अलावा नि:शुल्क शव वाहन भी मंदिर समिति द्वारा चलाया जाता है।

उज्जैन आएं तो यह भी जरूर देखें
बाहर से आने वाले दर्शनार्थी और पर्यटक उज्जैन आकर सिर्फ महाकाल दर्शन तक ही सीमित न रहें, बल्कि यहां काल भैरव, पाताल भैरवी, गढ़कालिका मंदिर, चारधाम मंदिर, चिंतामण गणेश मंदिर, हरसिद्धि शक्तिपीठ मंदिर, सम्राट विक्रमादित्य का आलीशान दरबार 32 पुतलियों की गाथा के साथ, भूखी माता मंदिर, भर्तृहरि गुफा, मंगलनाथ मंदिर, ऋणमुक्तेश्वर धाम आदि ऐसे अनेक प्राचीन तीर्थ स्थल हैं, जहां परिवार के साथ घूमने जाया जा सकता है।