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पिछले साल की तरह ही निकलेगी महाकाल की पालकी, कावड़ पर रोक

कावड़ यात्रियों को अनुमति देने से प्रशासन का इनकार

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baba mahakal corona pandemic

उज्जैन. जैसे-जैसे सावन नजदीक आ रहा है, भोले की दीवानगी बढ़ती जा रही है। भीड़ संभाले नहीं संभल रही। कोरोना का जैसे कोई डर नहीं। जुबां पर एक ही नाम...जय महाकाल....। नंगे पैर लोग तपती धूप में दौड़ रहे, लेकिन फिर भी कदम नहीं रुक रहे। कई परेशानियां हैं, घंटों तक कतार में खड़े रहना है, लेकिन दर्शन करके ही जाएंगे, मन में यही लक्ष्य है।

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25 जुलाई से सावन मास आरंभ होगा, दूसरे दिन 26 को राजाधिराज बाबा महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने भ्रमण पर निकलेंगे। मंदिर में सावन मास को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। कलेक्टर ने नंदी हॉल और गर्भगृह में आम व खास सभी के लिए प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। बीते वर्ष की भांति इस बार भी पालकी हरसिद्धि के पीछे से होकर निकालने की योजना बन रही है। वहीं कावड़ यात्री भी बाबा पर जल नहीं चढ़ा पाएंगे।

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रात 2.30 बजे खुलेंगे पट
श्रावण-भादौ मास में महाकाल मंदिर के पट रात 2.30 बजे खुलेंगे। उनकी एक झलक पाने देशभर से भक्त भगवान महाकाल के दरबार में उमड़ते हैं। परंपरानुसार श्रावण मास में भगवान महाकाल की हर सोमवार को सवारी निकलती है, इस बार कुल सात सवारियां निकाली जाएंगी। भस्म आरती भी निर्धारित समय से दो घंटे पहले शुरू होती है।
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कावडिय़ों के लिए ये थी पिछले साल व्यवस्था
पिछले साल मंदिर प्रशासन द्वारा कावड़ यात्रियों द्वारा लाए गए जल को एक पात्र में इकट्ठा किया जाता था। पात्र के भर जाने पर उसमें से प्रतीकात्मक रूप से दो घड़े जल भरकर भगवान को अर्पित किया जाता था। कोरोना काल में श्रद्धालुओं को श्रावण मास में अग्रिम बुकिंग के आधार पर दर्शन कराए गए थे।