
Mahakal Temple,ujjain mahakal,ujjain mahakal temple,Ujjain Mahakal Mandir,
उज्जैन. कार्तिक-अगहन मास में श्रावण-भादौ की तर्ज पर बाबा महाकाल की सवारी निकालने की परंपरा है। राजाधिराज भगवान महाकाल कार्तिक एवं अगहन मास में राजसी ठाठ बाट से नगर भ्रमण पर निकलेंगे। इसमें दो सवारी कार्तिक मास और दो सवारी अगहन मास की रहेगी। वैकुंठ चतुर्दशी पर हरिहर मिलन की सवारी पर भगवान महाकाल रात 12 बजे भगवान गोपालजी से मिलने पहुंचेंगे।
पहली सवारी 12 नवंबर को
मंदिर के पुजारी प्रदीप गुरु के अनुसार इस बार कार्तिक मास में राजा महाकाल की प्रथम सवारी 12 नवंबर को निकाली जाएगी। दूसरी 19 नवंबर, तीसरी 26 नवंबर तथा शाही सवारी 3 दिसंबर को निकाली जाएगी। इसके अलावा वैकुंठ चतुर्दशी की तिथि ग्वालियर पंचाग और स्थानीय पंचाग में अलग-अलग होने से हरिहर मिलन की सवारी 21 नवंबर को निकलेगी। इस दिन भगवान महाकाल गोपालजी से मिलने जाएंगे। रात 12 बजे महाकाल की सवारी गोपाल मंदिर पहुंचेगी।
हर पर्व की शुरुआत महाकाल से
शहर में हर पर्व की शुरुआत राजा महाकाल के आंगन से होती है। इसके बाद शहर भर में पर्व की शुरुआत होती है। दीपोत्सव की शुरुआत भी भगवान के आंगन से होगी। इसमें धनतेरस से गोवर्धन पूजन परंपरागत तरीके से किया जाएगा।
रूप चौदस पर उबटन स्नान
राजाधिराज के आंगन में दीपपर्व का उल्लास धनतेरस सोमवार से शुरू हो गया है। रूप चौदस मंगलवार को भगवान महाकाल का रूप निखारने के लिए उबटन से स्नान कराया जाएगा। दीपावली पर तड़के भस्मआरती, संध्या तथा रात्रि को शयन आरती में दीपों और फूलझड़ी के साथ होगी। महाकाल मंदिर में प्रत्येक त्योहार एक दिन पहले मनाया जाता है। महाकाल मंदिर के पुजारी प्रदीप गुरु ने बताया कि 6 नवंबर को रूप चौदस पर महाकाल मंदिर में देव दीपावली मनेगी। तड़के 4 बजे भस्म आरती में भगवान का पंचामृत अभिषेक होने के बाद पुजारी परिवार की महिलाएं भगवान महाकाल को उबटन लगाएंगी। इसके बाद भगवान को गर्मजल से स्नान कराया जाएगा। पुजारी राजा को इत्र लगाएंगे। कपूर से भगवान की आरती होगी।
भांग व ड्रायफ्रूट्स से शृंगार
भांग व सूखे मेवे से आकर्षक शृंगार कर नवीन वस्त्र व आभूषण धारण कराए जाएंगे। अभिषेक, शृंगार व पूजन की प्रक्रिया संपन्न होने के बाद भगवान को अन्नकूट का नैवेद्य लगेगा। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में ऋतु अनुसार भगवान की सेवा होती है। सर्दी में भगवान को गर्मजल से स्नान कराया जाता है। इसकी शुरुआत रूप चौदस पर अभ्यंग स्नान के साथ होती है। ऋतु परिवर्तन के साथ राजाधिराज महाकाल की दैनिक गतिविधियों में बदलाव होता है। बाबा महाकाल ६ माह गर्म और ६ माह ठंडे जल से स्नान करते हैं। इस क्रम में कार्तिक की चौदस ६ नवंबर को गर्म स्नान शुरू करेंगे। यह सिलसिला फाल्गुन माह की पूर्णिमा तक चलेगा।
धनतेरस पर सिक्के न्यौछावर
धनतेरस के अवसर पर पुरोहित समिति द्वारा धनतेरस पर भगवान महाकाल का विशेष पूजन किया गया। आरती के बाद भगवान पर चांदी के सिक्के न्योछावर किए गए। इसी प्रकार दीपावली के अगले दिन मंदिर में गोवर्धन पूजा होती है। चिंतामण स्थित गोशाला में गायों का पूजन करने के बाद गोबर से बनाए गए गोवर्धन की पूजा की जाती है।
Published on:
05 Nov 2018 05:46 pm
बड़ी खबरें
View Allउज्जैन
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
