
उज्जैन. महाकालेश्वर मंदिर में भीड़ की स्थिति को देखते हुए ही गर्भगृह में प्रवेश व दर्शन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। भ्रामक प्रचार के कारण भ्रम की स्थिति पैदा हो गई, जिससे शुक्रवार को मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश लेने के इच्छुक श्रद्धालुओं की अचानक भीड़ बढ़ गई।
प्रशासक गणेश कुमार धाकड़ ने बताया कि भीड़ कम होने पर ही गर्भगृह में प्रवेश दिया जाएगा, 6 दिसंबर को जो प्रबंध समिति ने निर्णय लिए थे, उसी अनुसार व्यवस्था संचालित रहेगी।
महाकाल मंदिर प्रबंध समिति द्वारा कलेक्टर आशीष सिंह के मार्गदर्शन व दिशा-निर्देशों के परिपालन में 6 दिसंबर से मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश प्रारंभ किया गया है। भ्रामक प्रचार होने के कारण श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति पैदा होकर दर्शन गर्भगृह से नहीं हो पाने के कारण असंतोष व्याप्त हो रहा है। प्रशासक धाकड़ ने बताया सामान्य दर्शनार्थी के लिए भीड़ की स्थिति को देखते हुए ही गर्भगृह से दर्शन की व्यवस्था मंदिर प्रशासन द्वारा यथानुरूप सुनिश्चित की जा रही है।
पूजन सामग्री ले जाना प्रतिबंधित
मंदिर के गर्भगृह में किसी भी प्रकार का पूजन, अभिषेक, आरती इत्यदि किया जाना तथा दूध, फूल-प्रसाद या किसी भी प्रकार की पूजन सामग्री ले जाने पर प्रतिबंध रहेगा। मंदिर प्रबंध समिति द्वारा इन व्यवस्थाओं के सुचारू रूप से संचालन के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है तथा अधिकारियों द्वारा प्राप्त निर्देशों के अक्षराक्ष पालन करने का आदेश दिया गया है। सभी की जिम्मेदारी तय की गई है। संपूर्ण व्यवस्था के सुचारू संचालन हेतु सहायक प्रशासक पूर्णिमा सिंघी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
पूर्ववत ही रहेगी दर्शन व प्रवेश व्यवस्था
प्रशासक धाकड़ ने बताया प्रवेश बंद के दौरान 1500 की रसीद पर 2 श्रद्धालु, लघु रूद्र की रसीद पर 3 और महारूद्र की रसीद पर 5 श्रद्धालुओं को गर्भगृह से दर्शन कराए जाएंगे। इस दौरान श्रद्धालु केवल जलाभिषेक ही कर सकते हैं। अधिकृत 16 पुजारी व 22 पुरोहित अपने यजमानों के लिए एक दिन में अधिकतम 1500 की 3 रसीदें व लघुरूद्र की 2 रसीदें ही काउंटर से कटवा सकेंगे तथा रसीद कटाने वाले श्रद्धालुओं को अधिकृत पुजारी/पुरोहित व उनके प्रतिनिधि द्वारा परिचय पत्र धारण कर यजमानों को गर्भगृह में प्रवेश कराया जा सकेगा।
Published on:
11 Dec 2021 03:34 pm
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