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महाकाल में फिर उलझा महानिर्वाणी अखाड़े के गादीपति का मामला

महाकाल मंदिर स्थित पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के रमता पंच बगैर कोई निर्णय सुनाए हरिद्वार लौट जाने से गादीपति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई।

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उज्जैन. महाकाल मंदिर स्थित पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के रमता पंच बगैर कोई निर्णय सुनाए हरिद्वार लौट जाने से महाकाल मंदिर स्थित अखाड़े की गादीपति को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हुई। अखाड़े के महंत कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। इससे यही लगता है कि अखाड़े के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

अखाड़े में महंत दयापुरी की अनुपस्थिति में महंत प्रकाशपुरी महाराज के अचानक लौट आने से गादीपति को लेकर तीन दिन से सरगर्मी बनी हुई है। इस बीच गुरुवार देर रात पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा हरिद्वार के चार पंच श्रीमहंत रमेशगिरि, गंगासागर भारती, किशनगिरि और जमुनापुरी के अखाड़े आने के बाद शुक्रवार को अखाड़े में हलचल मची रहीं।

महंत कक्ष में, अधिकारी बाहर

चारों श्रीमहंत पंचों ने सुबह से लेकर दोपहर तक बंद कमरे में महंत प्रकाशपुरी से लंबी चर्चा की। इस दौरान एडीएम, होमगार्ड प्लाटून कमांडर, महाकाल थाना प्रभारी, महाकाल पुलिस चौकी प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मी,अन्य संत,महाकाल मंदिर के कुछ पुजारी अखाडे़ के गलियारे में बैठे रहे। पंचों और महंत प्रकाशपुरी महाराज की चर्चा के बाद अधिकारियों ने प्रकाशपुरी बात की ओर चले गए। अधिकारियों ने भीतर के घटनाक्रम पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।

हर किसी को प्रवेश नहीं

अखाड़े में शुक्रवार को सभी के प्रवेश की मनाही थी। केवल उन्हीं को प्रवेश दिया जा रहा जिनके लिए महंत प्रकाशपुरी या अधिकारी अनुमति दे रहे थे। प्रवेश रोकने के लिए गेट पर अखाड़े के अनुयायी और बाउंसरनुमा लोगों को तैनात किया गया था। भीतर क्या चल रहा है। यह कोई बताने को तैयार नहीं था। वैसे सूत्रों के अनुसार महंत प्रकाश पुरी के गादीपति बने रहने के मामले में अखाड़े के सभी रमता पंच एकमत नहीं है। रमता पंच में ८ श्रीमहंत और ८ अखाड़े के के पदाधिकारी शामिल है, जिसमें से चार पंचों को गुरुवार को आगमन हुआ था,जो दोपहर बाद गादीपति को लेकर स्थिति स्पष्ट किए बगैर हरिद्वार लौट गए।

मीडिया को देख भड़के

सुबह से लेकर दोपहर 1.30 बजे पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के चार पंच श्रीमहंत रमेशगिरि,गंगासागर भारती, किशनगिरि और जमुनापुरी हरिद्वार जाने के लिए अखाडे़ से निकले, उन्हें विदा करने के लिए महंत प्रकाशपुरी अखाडे के द्वार तक आए थे। इस दौरान बाहर मौजूद मीडिया को देख महंत प्रकाशपुरी भड़के और कहा कि क्या यहा तमाशा चल रहा है, जो फोटो ले रहे हैं। मीडियामर्मियों ने पूछा महाराज गादीपति को लेकर क्या हुआ। महंत प्रकाशपुरी महाराज बोले हमें कुछ नहीं कहना है।

विवादों की चर्चा भी

गादीपति को लेकर पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े में चल रहीं सरगर्मी के बीच अखाड़े में विवाद की चर्चा भी है। बताया जा रहा है कि महंत दयापुरी एक कक्ष में ताला लगाकर गए थे। महंत प्रकाशपुरी महाराज के बुधवार को अखाड़े में लौटने के बाद ताले को तोड़कर कक्ष में प्रवेश किया गया। इसके अलावा अन्य विवाद की बाते भी सामने आ रहीं है। अखाड़े की ओर से भी बयान देने को कोई तैयार नहीं है।

पुलिस सुरक्षा मांगी

महाकाल मंदिर स्थित पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े में विवादास्पद स्थिति के बीच महंत प्रकाशपुरी महाराज ने अखाड़े के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग की है। सूत्रों ने बताया कि प्रकाशपुरी महाराज ने महाकाल थाना प्रभारी को पत्र दिया है, इसे नियमानुसार पुलिस आरआइ को भेजा जा रहा है। गौरतलब है कि 17 अप्रैल 2018 को पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत दयापुरी ने मीडिया को बताया था कि महंत प्रकाशपुरी महाराज के गादीपति पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद मुझे गादीपति नियुक्त किया है। महंत दयापुरी ने नियुक्ती पत्र और महंत प्रकाशपुरी महाराज त्यागपत्र दिखते हुए कहा था कि पंचों द्वारा चादर रस्म पूर्ण करने के बाद वे गादी पर विराजित होंगे। इस बीच महंत प्रकाशपुरी महाराज 30 अप्रैल को अखाड़े आ गए। इनके अनुयायियों ने दावा किया कि महंत प्रकाशपुरी महाराज ही गादीपति है। विवाद की आशंका के बीच महाकाल मंदिर प्रबंध समिति,प्रशासन और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद दोनों महंतों से यह आश्वासन लिया गया कि अखाड़ा मुख्यालय से स्थिति और चादर रस्म की औपचारिक घोषणा होने तक विवाद नहीं किया जाएगा। 2 मई को महंत प्रकाशपुरी महाराज एकाएक अखाड़े से पहले भोपाल और फिर वहां से हरियाणा रवाना हो गए। १७ जून को महंत दयापुरी अखाड़े की बैठक में हिस्सा लेने के लिए हरिद्वार चले गए, तो 20 जून को महंत प्रकाशपुरी महाराज उज्जैन आ गए। इसके बाद से गादीपति को लेकर संशय बन गया है।