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पूज्यश्री मौनी बाबा के आशीर्वाद से अभिभूत होकर जाता था हर भक्त

गंगाघाट मौनतीर्थ आश्रम है, जहां वे वर्ष में सिर्फ दो बार ही भक्तों के सामने आकर दर्शन देते थे। उनकी आयु लगभग 108 वर्ष थी।

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उज्जैन. तपस्वी व ख्यात संत पूज्यश्री मौनी बाबा का शनिवार सुबह पुणे में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और पुणे में बीते एक माह से भर्ती थे। उज्जैन में अंकपात मार्ग पर इनका गंगाघाट मौनतीर्थ आश्रम है, जहां वे वर्ष में सिर्फ दो बार ही भक्तों के सामने आकर दर्शन देते थे। उनकी आयु लगभग 108 वर्ष थी।

हेलीकॉप्टर से उज्जैन आएगा पार्थिव शरीर
प्राप्त जानकारी के अनुसार मौनी बाबा का पार्थिव शरीर शाम तक विमान से उज्जैन लाया जाएगा और रविवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा। गौरतलब है कि उज्जैन में ही मंगलनाथ रोड पर मौनी बाबा का आश्रम है, जहां से बाबा को अंतिम विदाई दी जाएगी। अमर सिंह, दिग्विजय सिंह , अर्जुन सिंह, उमा भारती सहित कई नामी हस्तियां मौनी बाबा के अनुयायी हैं।

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पेड़ के नीचे बनाया आश्रम
मौनी बाबा ने उज्जैन में सात दशक पहले गंगाघाट के किराने एक पेड़ के नीचे अपना आश्रम बनाया था। करीब 108 वर्षीय मौनी बाबा भक्तों को वर्ष में सिर्फ दो बार गुरु पूर्णिमा तथा 14 दिसंबर को उनके जन्म दिन पर ही आश्रम में दर्शन होते थे। बाबा अधिकांश समय एकांत में बिताते थे।

हरिद्वार की तर्ज पर होती है शिप्रा-गंगा आरती
देश की धर्मनगरी उज्जैन, एक ऐसा शहर जहां शिप्रा नदी उत्तर की तरफ बहती है। इसलिए यहां शिप्रा को गंगा तुल्य मानकर गंगा भी कहा गया है। तभी तो इस नदी के घाट को गंगाघाट की मान्यता दी गई है। यहां प्रतिदिन हरिद्वार में हर की पौड़ी की तरह ही शिप्रा-गंगा आरती भी होती है।

कुछ ऐसी थी उनकी साधना
परम पूज्य श्रीश्री मौनी बाबा के दर्शन करने से तपस्या, साधना, भक्ति के एकसाथ दर्शन हो जाते थे। मौनी बाबा अपने भक्तों की आस्था का केंद्र थे। वे सतत मौन रहते तथा शिष्यों का मार्गदर्शन करते थे। बाबाश्री के कठोर तप से मौनतीर्थ गंगा घाट का वातावरण चमत्कारिक शांति व प्रसन्नता प्रदान तो करता ही है, एक नई ऊर्जा का अहसास भी हमें कराता है। उनके दर्शन के पश्चात जीवन के अनेक प्रसंगों में शुभ परिवर्तन के संकेत भक्तों को समय-समय पर मिलते थे। कहा जाता है कि परम पूज्य मौनी बाबा के दर्शन जीवन में अत्यंत दुर्लभ क्षणों में होते हैं। उनके आशीर्वाद के लिए भक्त देश-विदेश से यहां पहुंच ही जाते थे। पूज्य मौनी बाबा ब्रह्मर्षि तथा तपस्यारत योगी थे। उनका प्रत्येक भक्त उनके आशीर्वाद के पश्चात हुए चमत्कारों से अभिभूत होकर ही जाता था।