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उज्जैन. मरीजों को दर्द से निजात दिलाने के नाम पर अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टर्स की कितनी मिलीभगत चल रही है और मेडिकल लैंग्वेज का फायदा उठाकर मरीज का इस्तेमाल किस प्रकार किया जा रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तीन महीने पहले जिस मर्ज का ऑपरेशन किया गया, जब वही दिक्कत मरीज को दोबारा हुई तो मालूम हुआ कि उसका ऑपरेशन तो किया ही नहीं गया था। जबकि इसके नाम पर मरीज के हेल्थ इंश्योरेंस से ४० हजार का बिल बनाया दिया गया।
वेदनगर निवासी बबन राव (६३) पिता नानक साहब बांदल का इंदौर रोड के निजी अस्पताल में ४ मार्च को प्रोस्टेड का ऑपरेशन किया था। बबन राव ने बताया कि उन्हें ढाई घंटे तक ऑपरेशन थियेटर में रखा था। डॉ.पुनित महाडिक ने उनका ऑपरेशन किया था। १० दिन पहले उन्हें फिर से वही दिक्कत होने लगी तो वे डॉ.महाडिक से मिले, तो उन्होंने बताया कि उनका प्रोस्टेड ऑपरेशन नहीं बल्कि सिस्टोस्कॉपी और डायलिटेशन किया गया था, जबकि प्रोस्टेड के ऑपरेशन के नाम पर इंदौर रोड के निजी अस्पताल प्रबंधन द्वारा हेल्थ इंश्योरेंस में से ४० हजार का बिल बना दिया गया।
की है शिकायत
मरीज बबन राव ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर की मिलीभगत के चलते उन्हे प्रोस्टेड का दर्द झेलना पड़ रहा है। अन्य चिकित्सक द्वारा लिखी गई सोनोग्राफी में उन्हें ५६ ग्राम का प्रोस्टेड निकला है, जबकि पहली बार तो सोनोग्राफी तक नहीं हुई। डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन की मेडिकल भाषा वे समझ नहीं पाए। वो लोग जो बोलते
गए मैं वो करता गया। इसलिए अब कलेक्टर से इसकी शिकायत की है।
दूरबीन से जांच और चौड़ीकरण
असलियत में बबन राव का ऑपरेशन के नाम पर दूरबीन से जांच और नसों के संकुचन के चलते चौड़ीकरण किया गया था। मरीज की फाइल के अनुसार उसे एसजीए एनेस्थिसिया दिया गया था। इसे पूरी प्रक्रिया में महज १५ मिनट लगते हैं। खुद डॉक्टर भी इस बात को स्वीकार रहे हैं। डॉ. महाडिक के अनुसार वे १५ मिनट बाद चले गए थे। मरीज को ढाई घंटे तक क्यों ओटी में रखा गया। इसे लेकर अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली शंका के घेरे में है।
मुझे मिली २००० रुपए फीस
डॉ. पुनित महाडिक ने बताया कि उनकी फीस २००० रुपए थी। मेरे पास इसकी रसीद है। उन्होंने मरीज को सिस्टोस्कॉपी की जानकारी दे दी थी। लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को क्या बताया ये मुझे नहीं पता। उक्त अस्पताल की शिकायत पूर्व में कई बार हो चुकी है। उनके पास एेसे कई मरीज हैं, जिन्हें अस्पताल प्रबंधन ने गलत जानकारी देकर अंधेरे में रखा है। इसलिए उन्होंने इस अस्पताल में जाना बंद ही कर दिया है। हेल्थ इंश्योरेंस के चलते ये पूरा खेल खेला जा रहा है।
कमेटी गठित कर करवाएंगे जांच
मामले की जानकारी नहीं है। फिलहाल शिकायत कलेक्टर कार्यालय से यहां नहीं पहुंची है। मामले की जांच कमेटी गठित कर करवाई जाएगीं। जो भी दोषी होगा कार्रवाई करेंगे।
डॉ.राजू निदारिया, सीएमएचओ
Published on:
16 Jun 2018 08:02 am
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