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साधु के सपने में आई मां तो इस गांव में की कामाख्या देवी की स्थापना

देशभर में कहलाएगा तीसरा मंदिर, दर्शन के लिए दूर-दराज से पहुंचने लगे श्रद्धालु

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नागदा. शहर से करीब 10 किमी दूर स्थित गांव भीकमपुर जिसे भीकमपुर महादेव के नाम से जाना जाता है। 2 हजार की आबादी वाले इस गांव में वर्षों पुराना महाकाली का मंदिर, जहां मन्नत पूरी होते ही शराब का प्याला खाली हो जाता है, लेकिन पांच वर्ष पूर्व एक साधु के सपने में मां कामाख्या आई तो इसी मंदिर में मां की स्थापना कर दी गई। देशभर में मां कामाख्या देवी का यह तीसरा मंदिर है। अब यहां दर्शन के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं।
मान्यता है कि यहां स्थित महाकाली का मंदिर कई हजार वर्षों पुराना है। ग्रामीण कहते है कि यहां चढ़ाया हुआ शराब का प्याला मन्नत पूरी होते ही खाली हो जाता है। पांच वर्ष पूर्व पंच निर्मोही जूना अखाड़ा नागा साधु का आगमन हुआ। जिनका नाम चांदगिरी है। इनका कहना है कि मां कामाख्या ने मुझे सपने में दर्शन दिए कि यहां उनका मंदिर बनना चाहिए तो मैने मां की बात स्वीकारते हुए इसी मंदिर में मां कामाख्या देवी की स्थापना करा दी। जैसे-जैसे लोगों को पता चलता गया, दूर-दराज से लोग यहां मां देवी के दर्शन के लिए पहुंचने लगे। खास बात यह है कि मां देवी को चढऩे वाला सिंदूर किसी जड़ी बूटी से कम नहीं। मंदिर के पुजारी चांदगिरी का कहना है कि इस सिंदूर को घर में रखने से सभी कष्टों का निवारण हो जाता है व परिवार हमेशा निरोगी रहता है।
अखंड ज्योत 5 वर्षों से है प्रज्वलित
इस मंदिर में खास बात यह है कि मां के दरबार में 6 अखंड ज्योत प्रज्वलित की गई है। ज्योत के लिए श्रद्धालुओं का सहयोग मिलने मंदिर के निर्माण से अब तक जल रही है। हर माह 30 किलो से अधिक तेल ज्योत के उपयोग में आता है।
देशभर में तीन ही मंदिर, पहला असम में, दूसरा उज्जैन में और तीसरा भीकमपुर में
विश्व प्रख्यात तंंत्र की देवी मां कामाख्या का मंदिर देशभर में तीन ही जगह बने हुए है। पहला मंदिर असम में बना हुआ है। दूसरा मंदिर उज्जैन में है। इस बात की जानकारी मां के प्रति आस्था रखने वाले लगभग श्रद्वालुओं को है, लेकिन पांच वर्ष पूर्व नागदा शहर से 10 किमी दूर गांव भीकमपुर में मां कामाख्या का भी मंदिर का निर्माण हो चुका है, जो देशभर में तीसरा मंदिर है।
पहली बार होगा धार्मिक आयोजनों के साथ भंडारे का आयोजन
मंदिर के पुजारी चांदगिरी ने बताया कि मां के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था है। इसलिए इस वर्ष 5 दिवसीय धार्मिक आयोजन की शुरुआत 22 मई को जगराते से होगी। 23 मई को माताजी का झूला, 24 व 25 मई को जगराता होगा। 26 मई को हवन पूजन के बाद भंडारे के साथ आयोजन का समापन होगा।