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MP CM Mohan Yadav : ‘मुख्यमंत्री नहीं, मुख्य सेवक के रूप में करूंगा काम’, पहली कैबिनेट उज्जैन में

MP CM Mohan Yadav: स्वागत से अभिभूत होकर सीएम बोले सीेएम, 'जो उपलब्धियां मिलीं, उससे बढ़कर यह स्वागत, मैं आपका अहसान मानता हूं'...
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MP CM Mohan Yadav: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छत्री चौक पर आयोजित आम सभा में कहा कि 'प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में नहीं बल्कि मुख्य सेवक के रूप में काम करूंगा। पूरा फोकस प्रदेश के विकास पर रहेगा और 24 घंटे काम करूंगा।' उन्होंने प्रदेश की पहली कैबिनेट बैठक महाकाल की नगरी में करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने शहर में हुए स्वागत से अभिभूत होकर कहा, 'जो उपलब्धियां मिलीं, उससे बढ़कर यह स्वागत है। मैं आपका अहसान मानता हूं।'

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की स्वागत रैली रात 11.30 बजे छत्रीचौक पर पहुंचने के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस तरह से मेरे स्वागत के लिए आइडिये लगाए गए हैं, वह अद्भुत हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास की जो रफ्तार है उसे और बढ़ाया जाएगा। इसके लिए रविवार को उज्जैन संभाग के कलेक्टर की पहली बैठक ले रहे हैं। इसी तरह अगले दिनों में सभी 10 संभाग की बैठकें लेंगे। इसमें क्षेत्र के विकास के तत्काल मंजूरी दी जाएगी। हमने पहली कैबिनेट में प्रदेश में हर जिले में बैंड टीम बनाने की घोषणा की है। हम मंत्रियों के साथ पहली कैबिनेट जनवरी में उज्जैन में करेंगे। इसी बैठक में उज्जैन के विकास के मुद्दों को स्वीकृति दी जाएगी।

रात में पहुंचे केडी गेट, सेंट्रल लाइटिंग लगेगी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव रात में ही केडी गेट चौड़ीकरण मार्ग को देखने पहुंचे। इसके पूर्व उन्होंने मंच से घोषणा की कि मार्ग में ओर मकान नहीं टूटे, इसके सेंट्रल लाइटिंग की जाएगी। विधायक कालूहेडा ने इसके लिए रुपए मांगे हैं तो उन्हें राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री यादव ने रीगल टॉकिज की जमीन को पार्किंग के लिए खुला रखने की बात कहते हुए कहा कि जिनकी दुकानें हैं, उन्हें बनाकर दी जाए बाकी जगह खुली रखी जाए।

रात्रि विश्राम नहीं करने के पीछे राजनीतिक रणनीति, मैं महाकाल का बेटा
मुख्यमंत्री यादव ने उज्जैन में रात्रि विश्राम नहीं करने के मिथक को तोड़ने की बात कही। उन्होंने कहा कि '1812 में जब उज्जैन से राजधानी ग्वालियर गई तो एक राजनीतिक रणनीति के तहत यह फैलाया लिया गया कि यहां महाकाल राजा के कारण कोई दूसरा नहीं रह सकता। दुनिया में तो राजा बाबा महाकाल ही हैं। उनकी इच्छा के बगैर कुछ हो सकता है क्या? अगर बुरा होना है तो क्या उज्जैन की सीमा के बाहर नहीं होगा। ब्रह्मांड में ऐसी कोई ताकत है, जहां बाबा से बचा सके। मैं तो बाबा महाकाल को बेटा हूं। उनकी इच्छा से उनका बेटे को ही जिम्मेदारी सौंप दी। रात्रि विश्राम नहीं करने का लोगों के मन से डर मिटाना है।'

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