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रात में बताया स्वस्थ, सुबह मर गया बच्चा

चरक अस्पताल में लापरवाही, परिजनों ने डॉक्टर व स्टाफ पर लगाया आरोप, सिविल सर्जन ने सात को नोटिस जारी कर कार्रवाई का आश्वासन दिया

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उज्जैन. चरक अस्पताल में प्रसूति को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। निजी सोनोग्राफी सेंटर पर जिस गर्भवती की डिलिवरी की तारीख १३ अगस्त बताई गई थी, चरक हॉस्पिटल में उसे ४ जुलाई को ही भर्ती कर लिया गया। अलग-अलग तारीख देकर १५ दिन तक उसे भर्ती रखा गया। इस बीच अस्पताल में सोनोग्राफी में शिशु को स्वस्थ बताया गया और जब गर्भवती के पेट में असहनीय दर्द हुआ तो डिलिवरी करने पर बच्चा मृत पाया गया। परिजनों ने डॉक्टर व स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
इंदौर जिले की ग्राम गिरोटा निवासी रवीना पति अजय भारू को प्रसूति के लिए ४ जुलई को चरक अस्पताल में भर्ती किया गया था। शुक्रवार सुबह उसके पेट में तेज दर्द उठा, जिस पर डॉक्टर ने शिशु की धड़कन कम होने की आशंका जताते हुए सोनोग्राफी करवाई। सुबह १०.३० बजे जब डिलिवरी की गई तो शिशु मृत निकला। कोख में शिशु के पहले से ही मरे होने की आशंका को लेकर परिजनों ने हंगामा कर दिया। नाराज परिजन चिकित्सकों द्वारा गलत जानकारी देने और रवीना पर ध्यान नहीं देने का आरोप लगाते हुए मृत शिशु को लेकर सीएमएचओ डॉ रजनी डाबर से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे। डॉ डाबर के उपलब्ध नहीं होने पर परिजन सिविल सर्जन डॉ आरपी परमार से मिले और आक्रोश जताया। पति अजय के पिता शेखर भारू ने आरोप लगाया कि चिकित्सक व स्टाफ की लापरवाही से उनके पौते की मौत हुई है। रवीना की ट्रीटमेंट शीट देखने के बाद सिविल सर्जन डॉ परमार ने निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इसके बार परिजन सिविल सर्जन के कक्ष से लौटे।
रात में स्वस्थ बताया, सुबह बच्चा मृत मिला
परिजन शेखर भारु व आनंद भैरव ने बताया, अस्पताल में भर्ती के बाद तीन बार सोनोग्राफी कराई गई थी। सभी में बच्चे को स्वस्थ बताते हुए डिलिवरी के लिए अलग-अलग समय दिया गया। आखिरी सोनोग्राफी गुरुवार रात करीब ९.३० बजे हुई, तब भी डॉक्टर ने किसी प्रकार की समस्या नहीं होने की बात कही। सुबह रवीना को दर्द अधिक होने पर डॉक्टर को शिकायत की गई। शिशु की पल्स कम होने का हवाला देते हुए फिर सोनोग्राफी करवाई गई लेकिन चिकित्सकों को कोई जानकारी नहीं दी। बाद में डिलिवरी करने पर शिशु मृत मिला। परिजनों के अनुसार मौके पर मौजूद डॉक्टर का यह भी कहना था कि दो दिन पूर्व बच्चे की पल्स कम हो गई थी। यह जानकारी मिलने पर परिजनों ने अब तक के उपचार पर सवाल उठाते हुए आक्रोश जताया। परिजनों ने शिशु के शव को सिविल सर्जन की टेबल पर रखते हुए कहा कि इसके चेहरे की चमड़ी ही गल गई है फिर एक दिन पूर्व कैसे डॉक्टर ने इसे सोनोग्राफी में स्वस्थ बता दिया था।
कहते तो जमीन बेचकर इलाज करवाते
परिजनों के अनुसार लंबे समय तक महिला को अस्पताल में भर्ती रखने और डिलिवरी नहीं किए जाने को लेकर उन्होंने अन्य जगह उपचार करने का भी कहा था। कर्मचारियों ने यह कहकर उन्हें डरा दिया कि गर्भवती को लेकर जाना है तो अपनी जिम्मेदारी पर लेकर जाओ और फिर दोबारा यहां भर्ती नहीं किया जाएगा। इससे डरकर परिजनों ने महिला को चरक अस्पताल में ही भर्ती रखा। पिता शेखर ने कहा, यदि डॉक्टर उनसे पहले ही कह देते कि वे इलाज नहीं कर पाएंगे तो हम जमीन बेचकर निजी अस्पताल में इलाज करवा लेते, लेकिन कम से कम हमारा बच्चा तो हमें मिल जाता।
तीन स्त्री रोग विशेषज्ञ सहित सात को नोटिस
सिविल सर्जन ने प्रकरण से जुड़े सात महिला चिकित्सकों को नोटिस जारी किया है। इनमें तीन स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ संगीता पहसानिया, डॉ संगीता शर्मा व डॉ अनीता जोशी सहित डॉ रेखा गोमे, डॉ निधि जैन, डॉ कायनात कुरैशी और डॉ साधना दीक्षित शामिल हैं।
इनका कहना
निजी सोनोग्राफी में १३ अगस्त की तारीख दी गई है। किस आधार पर महिला को एडमिट किया गया था और जांच में क्या-क्या स्थिति सामने आई थी, संबंधित डॉक्टर्स को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ आरपी परमार, सिविल सर्जन