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उज्जैन. समाजसेवा के लिए होने वाली राजनीति में अब परिवारवाद भी हावी हो गया है। जो नेता सांसद, विधायक रह चुके हैं वे अपनी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए पुत्रों को नेता बनाना चाहते हैं। जिले की चार विधानसभा सीट ऐसे है, जहां नेता अपने बेटों के टिकट दिलाने के लिए लामबंदी कर रहे हैं। हाालांकि इसके चलते उन दावेदारों की हालत पस्त हो रही है जो लंबे से समय इन क्षेत्रों में पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। पत्रिका की एक रिपोर्ट...।
बेटे को टिकट दिलाना चाहते हैं गेहलोत
आलोट विधानसभा से केंद्रीय मंत्री थावरचंद गेहलोत एक बार फिर अपने बेटे जितेंद्र गेहलोत के लिए टिकट चाह रहे हैं। हालांकि जितेंद्र गेहलोत पिछले चुनाव में यहां से भारतीय जनता पार्टी के विधायक बने हंै। इस बार एससी-एसटी एक्ट व सवर्ण आंदोलन के चलते आलोट विधानसभा में भाजपा की हालत पस्त हो रही है। चर्चा है कि पार्टी यहां से नया चेहरे को उम्मीदवार बना सकती है।
बेटे को नहीं मिला तो होंगे खुद खड़े
उज्जैन से सांसद और आलोट विधानसभा से विधायक रह चुके प्रेमचंद्र गुड्डू भी अपने बेटे अजीत बौरासी के लिए आलोट से टिकट मांग रहे हैं। पिछले चुनाव में अजीत के को टिकट दिलाने में कामयाब रहे थे लेकिन चुनाव में हार देखनी पड़ी थी। इस बार फिर से बेटे के लिए प्रयासरत हैं। हालांकि आलोट में गुड्डू खुद ही मैदान उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
बेटे को आगर या घट्टिया से मिले टिकट
उज्जैन से सांसद रहे और अब राज्यसभा सांसद सत्यनारायण जटिया भी अपने बेटे राजकुमार जटिया को चुनाव लड़वाना चाहते हैं। पिछले चुनाव में आरक्षित सीट घट्टिया से राजकुमार जटिया का नाम चला था। बताया जा रहा है कि सत्यनारायण जटिया इस बार फिर बेटे को घट्टिया या आगर विधानसभा से बेटे को टिकट दिलवाना चाहते हैं।
इधर, पिता की विरासत संभाल रहे नेता
तराना विधायक अनिल फिरोजिया भी पिता भूरेलाल फिरोजिया की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। पिता आगर से विधायक रहे हैं, वहीं उनकी बहन रेखा रत्नाकर आगर से विधायक रही हैं। अनिल फिरोजिया वर्ष 2013 में तराना से विधायक बने। इस बार दोबारा से यहीं से टिकट मांग रहे हैं।
पिता के नक्शेकदम पर मालवीय
घट्टिया विधानसभा से विधायक सतीश मालवीय भी अपने विधायक पिता नागूलाल मालवीय की छोड़ी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके पिता भी 1980 में तराना से कांग्रेस विधायक रहे हैं। वर्ष 2013 में पार्टी ने सतीश को टिकट दिया तो विधायक बने। अब फिर से क्षेत्र से टिकट मांग रहे हैं।
अब बेटे को मिल जाए टिकट
पूर्व विधायक महावीर प्रसाद वशिष्ठ भी अपने पुत्र राजेंद्र वशिष्ठ को उज्जैन दक्षिण से कांग्रेस को टिकट दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। हालांकि वर्ष 2008 में पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर राजेंद्र वशिष्ठ बागी होकर चुनाव लड़े थे। पूर्व सीएम दिग्विजसिंह के नजदीकी महावीरप्रसाद वशिष्ठ एक बार फिर बेटे को दक्षिण विधानसभा में टिकट दिलाने के लिए जोर लगा रहे हैं।
Published on:
22 Oct 2018 12:21 pm
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