
शराब पीने रुपए और समय पर रोटी नहीं देने पर ही घर में पिट जाती हैं महिलाएं, कार्यस्थलों पर भी प्रताडि़त हो जाती हैं
उज्जैन. समाज में भले ही शिक्षा के स्तर में इजाफा हुआ है और महिलाएं भी शिक्षित हुई हैं लेकिन आज भी समाज में महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं। यहीं नहीं महिलाएं घर ही नहीं कार्यस्थलों पर भी सुरक्षित नहीं हैं। स्थिति यह है कि घरों में महिलाएं अपने पति से सिर्फ इसलिए पिट जाती हैं कि वे उन्हें समय पर खाना नहीं देती या फिर शराब पीने के रुपए नहीं दे पाती। वहीं बच्चे नहीं होने, दहेज और चरित्र शंका को लेकर भी महिलाएं पति ही नहीं परिजनों के निशाने आ जाती हैं। हालांकि महिलाओं के प्रति हिंसा के पीछे समाज में ऐसी घटनाओं को लेकर प्रतिरोध व जागरुकता की भावना नहीं होना है। यही कारण है कि पुलिस थानों में हर रोज महिलाओं के साथ अपराध की दो से तीन मामले दर्ज हो रहे हैं। महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर विशेष ..।
इस तरह प्रताडि़त हो रही महिलाएं
मामला एक- इतना प्रताडि़त किया कि आग लगाकर आत्महत्या की
भैरवगढ़ थाने में हाल ही में एक महिला के आत्महत्या के मामले में पति और सास के खिलाफ पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया है। महिला ने दीपावली के समय खुद पर केरोसीन डालकर आग लगा ली थी। महिला का एक बच्चा भी है। वह ससुराल में इतनी प्रताडि़त थी कि उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाए। महिला को बच्चा भी कह रहा है पापा मारपीट करते थे।
मामला दो-शराब पीकर आने से टोका तो पीटा
चिमनगंजमंडी थाना स्थित छोटी मायापुरी की एक महिला ने अपने पति के खिलाफ ही रिपोर्ट लिखवाई। महिला का कहना है कि उसका पति रोज शराब पीकर आता है। जब उसे शराब पीने से टोका तो उल्टा उसने मारपीट करते हुए जान से मारने की धमकी दी। महिला का यहां तक कहना था कि पति कुछ कमाता भी नहीं, वह खुद उसे पाल रही है बावजूद उसके मारपीट करता है।
मामला तीन-स्कूल जाते समय छात्रा से छेड़छाड़
पुलिस थानों मे अमूमन हर रोज महिला, युवती व स्कूली छात्राओं के साथ छेड़छाड़ की रिपोर्ट दर्ज हो रही है। २३ नवंबर को ही विद्यापति नगर में एक १७ वर्षीय किशोरी के साथ क्षेत्र के युवक ने राह चलते न केवल बुरी नीयत से हाथ पकड़ा बल्की उसके विरोध करने पर मारपीट और जान से मारने की धमकी तक दे दी।
चारित्रिक पतन से बढ़ रही महिला के साथ हिंसा
महिलाओं के साथ हिंसा के पीछे समाज में नैतिकता और चारित्रिक गिरावट होना है। वर्तमान परिदृश्य में इंटरनेट व सोशल मीडिया पर फैली अश्लीलता भी एक बड़ा कारण बन रही है। वहीं समाज भी ऐसी घटनाओं के प्रति जागृत तो हो रहा है लेकिन सामूहिक विरोध या महिलाओं के प्रति अपराध करने वाले लोगों के प्रति मानसिकता पूरी तरह से नहीं बदली है। जब तक समाज में किसी महिला के अत्याचार होने पर विरोध की आवाज नहीं उठेगी तब तक ऐसी घटनाएं नहीं रुकने वाली हैं। हालांकि महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति पहले से ज्यादा जागरूक हुईं और यही वजह है हर घटना की थाने में रिपोर्ट दर्ज और लोगों के सामने भी आ रही है। फिर भी सामाजिक बंधनों के चलते महिलाएं खुलकर नहीं आ पाती। यह बंधन तोडऩे की जरूरत है, तभी महिलाओं पर होने वाले घरेलू हिंसा का रोका जा सकता है। एक बात अच्छी यह भी है कि पुलिस महिलाओं से जुड़े अपराधों को गंभीरता से लेने लगी है।
- सुलेखा भार्गव, प्रोफेसर, समाजशास्त्र
इसलिए आज मनाते हैं दिवस
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1993 में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन की घोषणा की थी। दअरसल महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा जारी है। इसमें अंतरंग साथी द्वारा हिंसा, पिटाई, मनोवैज्ञानिक दुव्र्यवहार, वैवाहिक बलात्कार, नशीला पदार्थ, यौन हिंसा और उत्पीडऩ बाल यौन शोषण, जबरन शादी, सड़क पर उत्पीडऩ, पीछा करना, साइबर उत्पीडऩ, मानव तस्करी व बाल विवाह सहित अन्य घटनाएं हैं। इन्हीं के प्रति रोकथाम और जागरुकता के लिए यह दिवस मनाया जाता है।
यूं रोक सकते हैं महिलाओं के प्रति अपराध
- महिलाएं खुद ही अपने साथ होने वाली मारपीट की घटना के लिए सीधे पुलिस से शिकायत कर सकती है।
- स्कूल व कॉलेज की छात्राए अपने साथ होने वाली छेड़छाड़ या अन्य घटना की कॉलेज के साथ डायल १०० पर शिकायत कर सकती है।
- कार्यस्थल पर महिला हिंसा से जुड़े प्रकोष्ठ बने हुए हैं। इसमें सीधे शिकायत की जा सकती है।
- पति, ससुराल पक्ष द्वारा प्रताडि़त किए जाने पर भी पुलिस में शिकायत दर्ज की जा सकती है। ऐसे मामलों में पुलिस काउंसलिंग भी करती है।
Published on:
25 Nov 2019 08:30 am
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