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सादे कागज पर भी शिकायत आए तो उसकी जानकारी भी देना होगी

राज्य सूचना आयोग का फैसला, दस्तावेजों में गड़बड़ पर एसपी उज्जैन को फटकार

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Ujjain Online

Jun 30, 2015

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नागदा.
मप्र राज्य सूचना आयोग भोपाल ने एक निर्णय में एसपी उज्जैन को फटकार लगाई है। आयोग को गुमराह करने पर भी टिप्पणी लिखी गई। साथ ही जनहित में एक अहम फैसला दिया है। पुलिस थाने में जो भी सादे कागज पर शिकायती आवेदन प्राप्त होंगे, उनकी जानकारी सूचना अधिकार में अब जनता को उपलब्ध कराना होगी। आयोग ने यह भी आदेश दिया कि जब कोई जानकारी मांगता है तो उसके औचित्य पूछने का अधिकार पुलिस को नहीं है।
इस प्रकरण में तीन वर्ष पहले तत्कालीन थाना प्रभारी मोहन सारवन ने जानकारी मांगने के औचित्य को लेकर सवाल उठाए थे। तीन वर्षों तक चली इस लड़ाई में आखिकार पुलिस को आदेश दिया कि पीडि़त को अब सात दिनोंं में नि:शुल्क सब जानकारी उपलब्ध कराई जाए। पीडि़त ने थाना नागदा में प्राप्त किए सादे कागज पर शिकायती आवेदनों की जानकारी मांगी थी।
राज्य सूचना आयोग तक यह लड़ाई आरटीआई कार्यकर्ता अभय चौपड़ा निवासी जैन कॉलोनी नागदा ने लड़ी। मामला यह था कि पुलिस थाना नागदा में चौपड़ा ने 20 मार्च 2012 को एक आरटीआई के माध्यम से थाने में तीन माह में प्राप्त सादे कागज पर शिकायतों व उनपर हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी। उस समय थाना प्रभारी बतौर लोक सूचना अधिकारी के मोहन सारवान थे। उन्होंने जानकारी देने से मना कर दिया। मामला प्रथम अपील अधिकारी एसपी तक पहुंचा तो यहां पर भी पीडि़त को न्याय नहीं मिला। आयोग के समक्ष वर्तमान एसपी ने 2 मई 2015 को यह लिख कर दे दिया कि जानकारी उपलब्ध करा दी गई है। इधर, लोकसूचना अधिकारी अर्थात थाना प्रभारी सारवान ने इंकार किया था। विरोधाभास पर आयोग ने एतराज जताया है। निर्णय में लिखा है कि आयोग को इस प्रकार गुमराह करना कदापि उचित नहीं कहा जा सकता।
आयोग में अपील मंजूर
प्रथम अपीली अधिकारी अर्थात एसपी से भी जब इंसाफ नहीं मिला तो पीडि़त ने मप्र राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया। आम लोगों की भाषा में राज्य सूचना आयोग को आरटीआई में प्रदेश का सुप्रीम कोर्ट माना जाता है। यहां का निर्णय अंतिम होता है। इसको अदालत में भी चुनौती नहीं दी जा सकती है। प्रकरण क्रमांक ए- 2433 / 2012 सुनवाई के लिए मंजूर हुई थी। हाल ही में अब फैसला भी सामने आया। राज्य सूचना आयोग के प्रभारी विधि अधिकारी संजीव पांडे ने निर्णय की प्रतिलिपि पीडि़त को प्रेषित की है। निर्णय में जानकारी अब नि:शुल्क 7 दिनों में उपब्लध कराने का आदेश दिया गया। यह फैसला राज्य सूचना आयुक्त सुखराज सिंह ने दिया है।


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