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दिनभर तपन, शाम को बरसे बदरा, 15 जून को सूर्य बदलेंगे राशि, होगा वर्षा ऋतु चक्र तैयार

22 जून को पर्जन्य नक्षत्र का आद्र्रा में प्रवेश, कहीं होगी खंड वर्षा, तो कहीं बनेंगे प्रबल वर्षा के योग

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22 जून को पर्जन्य नक्षत्र का आद्र्रा में प्रवेश, कहीं होगी खंड वर्षा, तो कहीं बनेंगे प्रबल वर्षा के योग,22 जून को पर्जन्य नक्षत्र का आद्र्रा में प्रवेश, कहीं होगी खंड वर्षा, तो कहीं बनेंगे प्रबल वर्षा के योग,22 जून को पर्जन्य नक्षत्र का आद्र्रा में प्रवेश, कहीं होगी खंड वर्षा, तो कहीं बनेंगे प्रबल वर्षा के योग,22 जून को पर्जन्य नक्षत्र का आद्र्रा में प्रवेश, कहीं होगी खंड वर्षा, तो कहीं बनेंगे प्रबल वर्षा के योग

उज्जैन. शनिवार को सुबह से तीखी धूप थी, दिन तपन की चुभन के साथ बीता, लेकिन शाम होते-होते ठंडी हवा चली और कुछ ही पल में आसमान में काले घने बादल छा गए। बूंदों ने ऐसी शुरुआत की, कि शहर की सडक़ें उफन गईं। राहगीरों के साथ-साथ दोपहिया वाहन सवारों को भी इधर-उधर छुपना पड़ा।
आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि बुधवार के दिन 22 जून को सूर्य का पर्जन्य नक्षत्र आद्र्रा में प्रवेश दिन 11 बजकर 50 मिनट पर होगा। इसी दिन से मेष वाहन श्रेष्ठ वर्षा के योग शुरू हो जाएंगे। मेदिनी ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वर्षा का प्रबल कारक सूर्य तथा वर्षा ऋतु का कारक बुध ग्रह अपनी राशि के या मित्र राशि के परिभ्रमण में गोचरस्थ हो या गोचर करते हो तब इस प्रकार के योगों में वर्षा का चक्र बनता है, उसी क्रम में वर्षा की दिशा तथा दशा दोनों तय हो जाती है।

15 जून को सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश
ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया पंचांग की गणना अनुसार 15 जून को सूर्य का वृषभ राशि को छोडक़र मिथुन में प्रवेश होगा। प्रवेश का यह समय दोपहर 12.30 बजे रहेगा, मान्यता है कि सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश के बाद से ही वर्षा ऋतु चक्र तैयार होता है, इसी के एक मास में चक्र लगभग तैयार होकर अलग-अलग दिशाओं में वर्षा के रूप में बरसता है।

22 जून को सूर्य का पर्जन्य नक्षत्र आद्र्रा में प्रवेश होगा
वर्षा के लिए बेहद खास माना जाने वाला नक्षत्र आद्र्रा है जब सूर्य का आद्र्रा नक्षत्र में प्रवेश होता है तो वर्षा ऋतु का चक्र तैयार होता है। आर्दा नक्षत्र पर्जन्य नक्षत्र की श्रेणी में आता है। इस दृष्टि से इसे विशेषता प्रदान की गई। विशेष तौर पर यह भी कहा जा सकता है कि आषाढ़ मास में इस नक्षत्र का प्रभाव सर्वत्र भूमंडल पर अलग प्रकार का होता है। यही नक्षत्र अगले 4 महीने वर्षा ऋतु को अपने प्रवेश काल से संतृप्त करता है। यदि इस नक्षत्र में कोई ग्रह का दृष्टि भेद हो तो कहीं-कहीं खंड वृष्टि की स्थिति भी उत्पन्न होती है।

आषाढ़ मास में 5 ग्रह रहेंगे स्वराशि में
ग्रह गोचर तथा परिभ्रमण की दृष्टिकोण से देखें तो आषाढ़ मास में पांच ग्रह स्वयं की राशि में परिभ्रमण करेंगे, जिसमें प्रमुख तौर पर मंगल मेष राशि, बुध मिथुन राशि, गुरु मीन राशि, शुक्र वृषभ राशि, शनि कुंभ राशि में गोचरस्थ रहेंगे। मंगल का मेष राशि में प्रवेश 26 जून को होगा, वहीं शुक्र 18 जून को वृषभ में बुध का मिथुन में प्रवेश 1 जुलाई को होगा और गुरु तथा शनि पहले से अपने अपनी राशि में गोचर कर रहे हैं।

उज्जैन में भी उत्तम वर्षा के योग
इस बार ग्रह गोचर में स्थान विशेष की गणना करें तो उज्जैन में भी वर्षा की स्थिति अनुकूल रहेगी, हालांकि कुछ-कुछ स्थानों पर वर्षा के खेंच की स्थिति भी दिखाई देगी। फिर भी ग्रहों के सहयोग तथा दृष्टि संबंध से उत्तम वृष्टि के योग बन रहे हैं। क्योंकि 26 जून को मंगल का मेष राशि में प्रवेश होगा, हालांकि मेष राशि पर पहले से राहु विद्यमान है इस दृष्टिकोण से राहु मंगल का अंगारक योग बनेगा। फिर भी स्वयं की राशि में मंगल का होना तथा उज्जैन का मंगल की भूमि कहलाना यह एक प्रकार की अच्छी स्थिति बना रहा है। इस दृष्टि से बाहरी सिस्टम का लाभ उज्जैन को प्राप्त होगा अर्थात ट्रफ लाइन से जुड़े पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव उत्तम वृष्टि के रूप में दिखाई देंगे।

हर साल 8 से 11 दिन का होता था पर्जन्य अनुष्ठान- पं. व्यास
ज्योतिर्विद पं. आनंदशंकर व्यास का कहना है कि हर साल 8 से 11 दिन का पर्जन्य अनुष्ठान बाबा महाकाल के दरबार में होता था। ऋग्वेदियों द्वारा इस अनुष्ठान की परंपरा थी। इसके सहित रूद्राभिषेक भी किया जाता था। सूर्य के रोहिणी में 25 मई से प्रवेश से सतत ग्रीष्म की तीव्रता, हवा, बादल, बूंदा-बांदी से भावी वर्षा का आंकलन किया जाता था। 8 जून से मृगशिरा नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश होने पर उपयोगी वृष्टि और उत्तम उत्पादन के लिए 11 दिवसीय अखंड पर्जन्य अनुष्ठान किया जाता था। आजादी के बाद से महाकाल मंदिर में पर्जन्य की परंपरा टूटी है। कभी 3 दिन, कभी 5 दिन तथा कभी 24 घंटे ही पर्जन्य अनुष्ठान हुआ है। यह एक समस्त संसार के लिए महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, इसे पूर्व विधि-विधान के साथ किया जाना चाहिए।