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अक्षय तृतीया बनी खास, आकाश में दुर्लभ घटना, तो शिप्रा में शाही स्नान

यहां आने वाले श्रद्धालु अमृत स्नान के साथ इस दुर्लभ खगोलीय घटना के साक्षी भी बनेंगे। इस दिन अक्षय तृतीया भी है। दुर्लभ खगोलीय पारगमन घटना तब होती है, जब सूर्य व पृथ्वी के मध्य बुध या शुक्र ग्रह आता है। 

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Lalit Saxena

May 09, 2016

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ललित सक्सेना@उज्जैन.अक्षय तृतीया इस बार खास संयोग के साथ आई है। आकाश में जहां पारगमन की दुर्लभ घटना होगी, वहीं धरती पर महाकुंभ के पावन पर्व में साधु-संत और लाखों श्रद्धालु शाही स्नान का पुण्य कमा रहे हैं। सिंहस्थ कुंभ के दौरान सोमवार को दूसरा शाही स्नान हो रहा है। इस दिन आकाश मंडल में दुर्लभ खगोलीय घटना भी होने वाली है, जिसे पारगमन कहा जाता है।
यहां आने वाले श्रद्धालु अमृत स्नान के साथ इस दुर्लभ खगोलीय घटना के साक्षी भी बनेंगे। इस दिन अक्षय तृतीया भी है। दुर्लभ खगोलीय पारगमन घटना तब होती है, जब सूर्य व पृथ्वी के मध्य बुध या शुक्र ग्रह आता है।
अक्षय तृतीया के कारण बढ़ी भीड़
जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेन्द्र प्रकाश गुप्त ने बताया कि 9 मई, 2016 को बुध ग्रह सूर्य तथा पृथ्वी के मध्य आ रहा है। बुध ग्रह आकार में छोटा है तथा पृथ्वी से दूर होने के कारण जब यह सूर्य के सामने आएगा तो एक बिंदु के समान काला धब्बा सूर्य की सतह पर दृष्टि गोचर होगा। बुध का पारगमन मई व नवंबर माह में देखा जा सकता है।

नवंबर का बुध पारगमन 7, 13, अथवा 33 वर्ष के अंतराल पर एवं मई का पारगमन 13 अथवा 33 वर्ष के अन्तराल पर होता है। बुध का पहला पारगमन 7 नवंबर, 1631 को देखा गया था। पिछले तीन पारगमन 15 नवम्बर 1999, 7 मई 2003 तथा 8 नवम्बर 2006 को हुए हैं। अगले पारगमन 11 नवम्बर, 2019, 13 नवम्बर 2032, 7 नवम्बर 2039, 7 मई 2049 को होंगे। पारगमन की घटना शाम 4.43 बजे शुरू होगी और मध्य रात्रि 12.12 बजे तक चलेगी। चूंकि उज्जैन में 9 मई को सूर्यास्त 6.59 बजे होगा, इसलिए पारगमन सायं 4.43 से 6.59 बजे तक ही देखा जा सकेगा।

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