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हाथी-घोड़ों पर चढ़कर पहुंचे साधु-संत, PHOTOS में देखें रॉयल अंदाज

श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़े की पेशवाई से शहर की धरा फिर धर्ममयी हो गई। रथों पर सवार संत-महात्मा  और नागा साधुओं का आशीर्वाद पाने के लिए आमजन उमड़ पड़े।

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Lalit Saxena

Apr 11, 2016

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उज्जैन. श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़े की पेशवाई से शहर की धरा फिर धर्ममयी हो गई। रथों पर सवार संत-महात्मा और नागा साधुओं का आशीर्वाद पाने के लिए आमजन उमड़ पड़े। बच्चे, युवा और बुजुर्गों में संतों के प्रति आस्था और भक्ति परवान चढ़ती दिखाई दी। दो किमी लंबी पेशवाई के लिए लोग घंटों कतारबद्ध होकर संतों को नमन करते रहे।

श्रद्धालुओं की आस्था देख संत भी भावविहल हुए। रास्ते भर भक्तों पर आशीर्वाद के रूप में टॉफियां तो फल बांटते चले। नागा साधुओं ने भी जौहर दिखाकर लोगों को आनंदित कर दिया। आठ किमी लंबे पेशवाई मार्ग पर संतों के दर्शन कर मानों जनता खुद को धन्य महसूस करती दिखाई दी।


नागाओं ने पेशवाई में दिखाए जौहर
नीलगंगा स्थित पड़ाव से श्री पंच दशनाम आवाहन अखाड़े ने रविवार सुबह 10 बजे हाथों में निशान भाला (गणेश प्रकाश) चांदी की पालकी में ईष्ट देवता श्रीगणेश विराजित कर सिंहस्थ महापर्व का आगाज किया। इसके पूर्व सुबह 9 बजे पड़ाव स्थल पर निशान भाला, देवताओं और ध्वज का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पुरोहित शैलेंद्र वधेका के आचार्यत्व में रमतापंच के पदाधिकारियों पूजन अर्चन किया। खिचड़ी, दही, पापड, घी और आचार पाने के बाद घोड़े पर सवार पंच के कारोबारी नागा राहुलगिरि डमरू बजाकर और दूसरे घोड़े पर महंत संगम भारती ने नगाड़े का डंका देकर पेशवाई का आगाज किया।


इसके बाद सुबह 10.15 बजे निशन भाल, शाही ध्वज फहराते रणकौशल दिखाते साधुओं की टोली अखाड़े के श्रीमहंत, महामण्डलेश्वर ओर नागा साधुओं की फौज दो किलामीटर का कारवां लेकर छह घंटे तक नगर भ्रमण करती रही। शाम 4 बजे छावनी में ईष्ट देवता श्री गणेश ओर चरण पादुकाओं की स्थापना कर पूजन अर्चन किया। यहां आचार्य पीठाधीश्वर से लेकर श्रीमहंत और महामण्डलेश्वर ने छावनी प्रवेश की पुकार कर अखाड़े को करीब 3 लाख रुपए की राशि भेंट की।
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भ्रूण हत्या और कन्या रक्षा का संकल्प
आचार्य पीठाधीश्वर डॉ. शिवेंद्रपुरी ने कन्या रक्षा और भ्रूण हत्या रोकने का आह्वान करते हुए संकल्प दिलाया। इसके बाद धर्म ध्वजा फहराने के साथ पेशवाई विधिवत शुरू हुई।

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यह रहा आकर्षण
पेशवाई में साधु-संतों के साथ ईष्ट देवता गणेश और शिव की प्रतिमा आकर्षण का केंद्र रही। इसमें आकर्षक रथ, हाथी, घोड़े, ऊंट और बैंड की मधुर लहरियां भी लोगों को आकर्षित करती रही। रास्ते में घोड़े के डांस भी लोगों को खूब पसंद आया।

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