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Video>>महाकाल की शयन आरती में करें दिव्य ज्योति के दर्शन, कभी नहीं देखी होगी ऐसी आरती

ज्योतिर्लिंग भगवान श्रीमहाकालेश्वर की यूं तो दिनभर में कई आरतीयां होती हैं, लेकिन सावन में शयन आरती का अपना ही आनंद है। भस्म आरती के दर्शन की तरह ही शयन आरती भी खास मानी जाती है।

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Lalit Saxena

Jul 25, 2017

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उज्जैन. ज्योतिर्लिंग भगवान श्रीमहाकालेश्वर की यूं तो दिनभर में कई आरतीयां होती हैं, लेकिन सावन में शयन आरती का अपना ही आनंद है। भस्म आरती के दर्शन की तरह ही शयन आरती भी खास मानी जाती है। इस वीडियो के जरिए आप शयन आरती के दर्शनों का लाभ लें। दीपक की लौ में बाबा महाकाल का स्वरूप दमकता नजर आ रहा है। सभी भक्त अपने आराध्य देव बाबा महाकाल की आराधना कर स्वयं को धन्य मानते हैं। भोग आरती में भी अनूठा शृंगार किया जाता है।


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सावन में सजा है बाबा का दरबार
सावन के पवित्र महीने में प्रतिदिन भोले बाबा के जयकारे और झांझ-डमरू गूंजते हैं। तो भोग आरती में बाबा को अनूठे स्वरूप में सजाया जाता है। राजा महाकाल पर नित-नए शृंगार किए जा रहे हैं। सावन में महाकाल दर्शनों के लिए भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लगी हैं। एक झलक पाने की दीवानगी देखते ही बनती है।





कई रूपों में दर्शन
श्रावण मास में महाकाल के भक्तों को कई रूपों के दर्शन हो रहे हैं, जिससे सभी का मन आनंदित हो रहा है। बिल्व पत्र, पुष्प हार और चंदन आदि से उन्हें सजाया जा रहा है। भस्म आरती के बाद सुबह 10.30 बजे भोग आरती के दर्शन होते हैं। भोलेनाथ भगवान महाकाल अपने भक्तों को अलौकिक स्वरूप में दर्शन देते हैं। चंदन-ड्रायफ्रूट आदि से उन्हें सजाया जाता है। शृंगार भी ऐसा कि देखते ही मन आनंदित हो जाए।

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पंचामृत पूजन और मनभावन शृंगार
भोलेनाथ को जल-दूध, दही और चंदन से स्नान के बाद पंचामृत पूजन किया गया। गले में पुष्पों का हार सुशोभित था, तो त्रिपुंड व त्रिनेत्र से मुखारविंद दमक रहा था। राजाधिराज महाकाल का मनभावन शृंगार हुआ। श्रावण मास में ज्योतिर्लिंग पर चंदन से आकर्षक स्वरूप बनाया गया, भक्तों ने इस निराले रूप के दर्शन किए तो पूरा हॉल जयकारों से गूंज उठा।

फूलों के हार से सजे हैं महाकाल
भस्मी रमाने वाले बाबा महाकाल को पहले जल-दूध से स्नान कराया, इसके बाद भस्मी रमाई। बिल्व पत्रों और फूलों के हार से सजाया गया। यह रूप भक्तों को हर पल आनंदित करता है। प्रतिदिन अनूठे शृंगार होते हैं। भांग और ड्रायफ्रूट का शृंगार किया जाता है। उनके मुख पर चंदन का त्रिपुंड तो गले में पुष्पों की माला शोभा बढ़ा रही थी। तरह-तरह के सूखे मेवे भी शृंगार में उपयोग किए जाते हैं। बाबा का यह रूप बड़ा ही मनोहारी होता है। विविध प्रकार के शृंगारों में भांग शृंगार सबसे अनूठा और खास माना जाता है।


भोले रमाते हैं हर दिन भस्मी
बाबा महाकाल भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। उनके कई रूप हैं, सभी झलक पाने को आतुर रहते हैं। हमेशा श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर में उमड़ती है। जब भोले भस्मी रमाए बैठते हैं, तो उनका स्वरूप बड़ा ही मनोहारी नजर आता है। सुबह भस्मी से स्नान करते हैं। तन पर भस्मी लगाते हैं और मृगछाला ओढ़कर भक्तों को धन-धान्य का आशीर्वाद देते हैं। गर्भगृह में चारों तरफ भस्मी फैली होती है। जिससे ऐसा लगता है, मानों भक्त बाबा के हिमालय पर्वत पर दर्शन कर रहे हों। बाबा अनेक रूपों में भक्तों को दर्शन देकर धन्य करते हैं। महाकाल मंदिर में अनेक छोटे-बड़े मंदिर हैं। इनके दर्शन के लिए भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।




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बड़े जतन से लगता है बाबा को भोग
हर दिन सुबह 10.30 बजे नियमित बालभोग आरती झांझ-डमरू, शंख-नगाड़ों के साथ होती है। भोग आरती में सुंदर आकृति से शृंगार किया गया। भोले को बिल्व पत्रों से सजाया गया। उनके भोग में लड्डू और पकवान रखे जाते हैं। वे बड़े ही जतन से भोग लगाते हैं। मंगलवार को बाबा महाकाल की शंख-झालर और डमरू के साथ बाबा की आरती हुई। (यह खबर आप पत्रिका डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं)। पंडे-पुजारी इनका अनोखा शृंगार करते हैं। फिर बाबा महाकाल को नैवेद्य का भोग अर्पण किया जाता है। भोग आरती में बाबा कुछ इस अंदाज में नजर आए।