
वाहन चालकों को समझ नहीं आता रूके कि जाएं, कुछ पाइंट पर चल रहे सिग्नल तो कुछ पर सिर्फ एक लाइट ही नजर आती
उज्जैन. शहर की यातायात व्यवस्था को स्मार्ट बनाने के लिए प्रमुख स्थानों पर लगाए गए स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल वाहन चालकों को उलझन में डाल रहे हैं। कई पाइंट पर ठीक से नहीं चलने के कारण ये सिग्नल सिर्फ दिखावा बन कर रह गए हैं और एेसी जगह वाहन आमने-सामने हो रहे हैं। घर पर चालान आने के डर से कई बार वाहन चालकों को भी समझ नहीं आता है कि एेसी उन्हें एेसे सिग्नल पर रूकना है या फिर आगे बढऩा है।
स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा शहर में एक दर्जन से अधिक प्रमुख तीराहे-चौराहों पर स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए हैं। यह ऑटोमेटिक संचालित होते हैं वहीं इन पर आधुनिक कैमरों लगाए गए हैं जिनकी मदद से यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की जानकारी कंट्रोल रूप में बैठे-बैठे ही जुटाई जा सकती है। इसके अलावा इन पर स्पीकर भी लगे हैं जिनके जरिए कंट्रोल रूम में बैठ जरूरी अनाउंसमेंट भी किया जा सकता है। वर्तमान में शहर के कुछ स्थानों पर यह स्मार्ट सिग्नल ठीक से कार्य कर रहे हैं वहीं कुछ पर बंद पड़े हैं। खराब पड़े इन सिग्नलों पर हरी व लाल लाइट नहीं चल रही है। पूरे समय सिर्फ मध्य की ओरेंज लाइट ही झपकती रहती है। इससे वाहन चालक भी संशय में पड़ रहे हैं वहीं सभी मार्गों से वाहन आने-जाने के कारण इन क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था बिगड़ रही है।
संशय, कहीं चालान न आ जाए
रेड लाइट क्रास करने या यातायात के अन्य नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित वाहन को कैमरों के जरिए स्मार्ट सिटी कमांड कंट्रोल सेंटर पर बैठे पुलिसकर्मियों द्वारा ट्रेस कर लिय जाता है। इसके बाद संबंधित वाहन स्वामी के नाम ई-चालान की कार्रवाई की जाती है। मोबाइल पर संदेश के साथ ही घर पर चालान भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में चार-पांच दिन भी लग जाते हैं। एेसे में कई बार वाहन चालक को ही ध्यान नहीं रहता है कि उसके द्वारा कब ट्रैफिक नियम का उल्लंघन कर दिया गया था। हालंाकि पुष्टी के चालन में तारीख, समय व फोटो भी दर्शाया जाता है। वर्तमान में कुछ स्थानों पर सिग्नल ठीक से कार्य नहीं कर रहे हैं। न हीं यह पूरी तरह ठीक से क्रियाशील है और नहीं पूरी तरह बंद हैं। सिग्नल पर एक लाइट चलती दिखने से कई चालकों को सिग्लन ऑन होने का भ्रम भी हो जाता है।इससे संशय की स्थिति बन रही है। एेसे सिग्नल क्रास करने पर कुछ लोगों को यह संशय भी हो जाता है कि कहीं कुछ दिन बाद ई-चालन न मिल जाए।
एेसी हो रही सिग्नल पाइंट की स्थिति
स्पॉट-1
कोयला फाटक
समय- दोपहर १.४० बजे
चौराहे के चारों सिग्नल पर सिर्फ ओरेंज लाइट बंद-चालू हो रही थी। शेष लाइट बंद पड़ी थी। लाइट देख कई चालक कुछ सैकंड के लिए रुकते और फिर सिग्नल खराब होने का समझ आगे बढ़ रहे थे। एक साथ चारो ओर से वाहनों का आना-जाना जारी था। नजदीक ही यातातया पुलिस की टीम वाहन चालकों को रोक लाइसेंस, वाहन पेपर आदि जांच कर रहे थे लेकिन चौराहे की ट्रैफिक व्यवस्था बंद सिग्नल के भरोसे ही थी।
स्पॉट-2
नानाखेड़ा चौराहा
समय- शाम ४ बजे
यह शहर का व्यस्ततम चौराहा है जहां सामान्य के साथ ही भारी वाहनों की भी बड़ी संख्या में आवाजाही होती है। चौराहे पर कुछ दिना से सिग्नल ठीक से कार्य नहीं कर रहा है। शनिवार को भी सिर्फ औरेंज लाइट व पैदल चलने का सिग्नल बंद-चालू होता रहा। यहां भी सभी मार्गों से वाहनों की आवाजाही चालू रही।
स्पॉट-3
आरटीओ तीराहा
समय- शाम ४.०५ बजे
इस तीराहे पर भी भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। यह सिग्नल कुछ दिन क्रियाशील नहीं है। शनिवार को भी सिग्नल की हरी व लाल लाइट बंद रही वहीं ओरेंज लाइट बंद-चालू होती रही। इस दौरान तीनों मार्ग से टै्रफिक चालू रहा। एेसे में यहां सिग्नल होने-न होने का कोई महत्व नहीं रहा।
Published on:
20 Feb 2022 08:50 pm
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