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उज्जैन. शहर से करीब 9 किलोमीटर दूर उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत चिंतामण जवासिया में पेयजल, सड़क और साफ-सफाई को लेकर लोग मुखर हो रहे हैं। लोगों से बात करने पर उनका गुस्सा और दर्द दोनों ही उभर कर सामने आ गया। ग्रामीण बेबाकी से बोले कि इस बार विकास के नाम पर झूठे वादे करने वालों का बहिष्कार करेंगे। उन्हें गांव में घुसने तक नहीं देंगे। चिंतामण गणेश मंदिर के कारण धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र बन चुके इस गांव के बाशिंदे इस बार राजनेताओं को सबक सिखाने के मूड में है।
चिंतामण रोड पर पंजाब नेशनल बैंक की शाखा के सामने चाय की दुकान पर कन्हैया लाल बैठे हैं। चर्चा करने पर उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र नगर निगम के वार्ड 33 में आता है। सिंहस्थ के दौरान यहां सड़क बनी, स्ट्रीट लाइट भी लगी, लेकिन अब शाम होते ही यहां अंधेरा पसर जाता है। सारी लाइटें बंद पड़ी हैं। इस वजह से असामाजिक तत्व यहां मंडराते रहते हैं। सामने बैंक है, वहां पर कोई सुरक्षाकर्मी भी नहीं होता है ऐसे में खतरा और बढ़ जाता है। नगरीय सीमा में होने के बाद भी यहां नल नहीं आते हैं। मच्छरों के कारण जीना मुश्किल हो चुका है।
यहां से थोडा आगे जाने पर ग्राम पंचायत चिंतामण जवासिया की सीमा प्रारंभ होती है। पंचायत में चिंतामण और जवासिया 2 गांव हैं। दोनों की आबादी 5500 के करीब है। ग्राम चिंतामण में प्रवेश करते ही सीधे हाथ पर है शिव शक्ति कॉलोनी। यहां घुसते ही किसी पिछड़े गांव में आने का अहसास होता है। कॉलोनी में पक्की सड़क नहीं है। नाली के भी पते नहीं। घरों से निकला गंदा पानी सड़कों पर फैला हुआ था। सामने बैठे ईश्वर सिंह ने कहा कि नेता यहां चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं। अभी कुछ दिन पहले कहा गया था कि गांव को स्मार्ट बना देंगे, लेकिन हालत देखकर ऐसा तो नहीं लगता कि यह गांव कभी स्मार्ट हो पाएगा।
थोड़ा आगे चलने पर मिले गंगाराम ने कहा कि गांव में पीने के पानी की सुविधा नहीं है। नल कनेक्शन दे दिए गए, टंकी बना दी गई, लेकिन उनमें से आज तक एक बूंद पानी भी नहीं टपका। गर्मी में तो गांव में हालात बेकाबू हो जाते हैं। यहां से आगे जब यादव साहब की गली में पहुंचे तो यहां बैठी प्रेमबाई का गुस्सा उबल पड़ा। उन्होंने कहा कि अबकी बार किसी भी पार्टी को वोट नहीं देंगे। हर बार झूठे वादे कर कर जाते हैं। गांव में पीने के पानी की इतनी गंभीर समस्या है लेकिन इस पर कोई ध्यान देने को तैयार ही नहीं है। सड़क नहीं होने के कारण बारिश में घुटने-घुटने पानी भर जाता है। तभी यहां से गुजर रहे पंकज शर्मा रुकते हैं और कहते हैं कि यादव गली में बड़े जनप्रतिनिधि के रिश्तेदार रहते हैं। इसके बाद भी यहां की रोड करीब 15 साल से नहीं बनी है। उन्हें बोलो तो वे कहते हैं कि यह पंचायत का काम है। सरपंच राजेश पुजारी को बोलो तो वे फंड नहीं होने की बात कहते हैं। पंकज ने कहा कि हमारे गुस्सा करने से क्या होता है। नेताओं का कुछ नहीं बिगड़ता, लेकिन इस बार अनदेखी करने वालों को सबक सिखाया जाएगा।
नागूलाल कहते हैं कि सफाई की भी एक बहुत बड़ी समस्या है। सरपंच को बोलो तो कहते हैं कि मैं कचरा उठाने आऊंगा क्या। सफाईकर्मी को जब आना होगा, तब सफाई कर देगा। गली से कचरा पेटी भी हटा ली गई है। चाय की दुकान चलाने वाले विशाल कहते हैं कि सिंहस्थ के समय बड़ी टंकी बनाई, लेकिन उसका उपयोग नहीं हो रहा। दूसरी ओर विशाल क्षेत्र में हुए कुछ कार्यों से संतुष्ट भी नजर आए। उनका कहना है कि ग्राम हासामपुरा में खेल मैदान का निर्माण क्षेत्र के लिए अच्छी सौगात है।
जवासिया गांव की भी यही कहानी
चिंतामण से एक किलोमीटर दूर है जवासिया। इस गांव की भी लगभग वैसे ही परेशानी है, लेकिन यहां प्रमुख मोहल्लों और गलियों में सड़कें पक्की हैं। पानी और सफाई की समस्या है। चौराहे पर बैठे महेश कहते हैं कि गांव में मुख्य समस्या गंदे पानी की निकासी और सफाई की है। यहां पर नालियां नहीं है। घरों से निकलने वाला पानी सड़क पर ही फैला रहता है। इस कारण से मच्छर पनप रहे हैं। पास ही बैठे घीसूलाल कहते हैं कि सिंहस्थ के दौरान क्षेत्र में कार्य हुए हैं, लेकिन अब उनकी कोई देखरेख नहीं हो रही है। सड़क पर गड्ढे पडऩे लगे हैं। थोड़ा आगे एक घर के बाहर पांच बुजुर्ग महिलाएं बैठी हैं। संकोच के कारण उन्होंने नाम तो नहीं बताया, लेकिन समस्या बताकर अपना गुस्सा जाहिर कर दिया। वे बोली कि दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। सफाई भी नहीं होती। नेताओं को इस गांव पर भी ध्यान देना चाहिए।
Published on:
24 Oct 2018 12:49 pm
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