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उज्जैन. विक्रम विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के कॉलेजों में प्रवेश को लेकर विद्यार्थियों में कोई खास रुझान नहीं दिख रहा। प्रदेशभर के सरकारी और निजी कॉलेजों में ऑनलाइन प्रक्रिया जारी है। इसमें स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में प्रवेश का पहला चरण पूरा होने के बाद विद्यार्थियों को कॉलेज आवंटन भी हो चुके हैं। इसके बाद कॉलेजों में 50 प्रतिशत से ज्यादा सीट खाली पड़ी हैं।
खास बात यह है कि विक्रम विवि परिक्षेत्र के 66 सरकारी कॉलेजों में अब तक 16 हजार 818 विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए सीट आवंटन हुई। इनमें से सिर्फ ११ हजार ८८३ विद्यार्थियों ने ही फीस जमा करने में रुचि दिखाई है। इसके अलावा उज्जैन शहर के प्रमुख चार कॉलेजों में २६३२ विद्यार्थियों को सीट आवंटन हुई। इनमें करीब १५३० विद्यार्थियों ने प्रवेश में हिस्सा लिया है।
कॉलेज चलो अभियान के तहत सरकारी कॉलेजों में १० प्रतिशत प्रवेश बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। जुलाई की शुरुआत के साथ नए सत्र की कक्षाएं भी शुरू हो गईं, लेकिन स्नातक स्तर की प्रवेश प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों में प्रवेश को लेकर कोई खासा रुझान देखने को नहीं मिला है। विद्यार्थियों ने प्रथम चरण में पंजीयन के दौरान ही उत्साह नहीं दिखाया। इसके बाद परिणास्वरूप आवंटन और फिर प्रवेश के दौरान आंकड़ा घटकर रह गया। हालांकि सभी कॉलेजों को पूरी उम्मीद है कि कॉलेज स्तर प्रवेश प्रक्रिया आते-आते प्रवेश का आंकड़ा काफी सुधर जाएगा।
पीजी प्रवेश में फिर रिजल्ट की दिक्कत
उच्च शिक्षा विभाग ने समस्त विश्वविद्यालय को स्नातक स्तर की परीक्षाओं के रिजल्ट जून माह से पहले जारी करने के निर्देश दिए थे। इसी के चलते विवि के गोपनीय विभाग में रिजल्ट का काम तेजी चल भी रहा था, लेकिन अधिकारी यह लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सके। प्रमुख कोर्स को छोड़ दिया जाए तो अभी बीए, बीएससी सहित कई रिजल्ट आना बाकी हैं। इधर, जुलाई का पहला सप्ताह बीत चुका है। स्नातक स्तर की परीक्षाओं का रिजल्ट पिछडऩे से पीजी कोर्स के प्रवेश पर असर पड़ेगा। अभी पंजीयन प्रभावित हुए। विभाग ५वें सेमेस्टर के आधार पर प्रवेश की व्यवस्था करेगा। इससे जुलाई बाद ही स्थिति सुधरेगी।
तय नहीं हुई पीएचडी प्रवेश परीक्षा की तारीख
विक्रम विश्वविद्यालय की पीएचडी प्रवेश परीक्षा २०१९ अब भी अधर में है। विवि अधिकारियों ने प्रवेश परीक्षा आयोजन की तैयारियों के लिए बैठक का आयोजन किया। इसमें रिक्त सीट की जानकारी प्रस्तुत की गई, लेकिन परीक्षा की प्रस्तावित तारीख तय नहीं हो सकी। इसके पीछे स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रमों के रिजल्ट घोषित नहीं होने का हवाला दिया गया। हालांकि अधिकारी पूर्व से ही पीएचडी प्रवेश परीक्षा सितंबर तक आयोजित किए जाने की बात कह रहे थे। साथ ही गत सत्र में भी प्रवेश परीक्षा अक्टूबर में आयोजित हुई थी।
विश्वविद्यालयों में स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी सहित समस्त प्रवेश की प्रक्रिया एक साथ होती है। विक्रम विवि में भी हर सत्र में जुलाई में पीएचडी प्रवेश परीक्षा करवाने की तैयारी की जाती है, लेकिन एेसा हो नहीं पाता है। विवि में पिछले पांच सत्र से पीएचडी परीक्षा की हालत खराब है। वर्ष २०१६ में स्थगित होने के बाद परीक्षा अक्टूबर के अंत तक पहुंची। २०१७ में आवदेन के बाद परीक्षा आयोजित ही नहीं हुई। इसके बाद २०१८ में भी स्थिति यह रही कि अक्टूबर में प्रवेश हुए। २०१९ की प्रवेश परीक्षा को समय पर करवाने के लिए सभी प्रयास हुए, जो असफल ही रहे।
तारीख तय नहीं होने से कार्रवाई आगे नहीं बढ़ेगी
विवि प्रशासन पीएचडी प्रवेश परीक्षा की तारीख तय करवाने के लिए लंबे समय से बैठक का इंतजार कर रहा था। दो दिन पहले बैठक आयोजित हो गई। इसमें रिक्त सीट के साथ सभी विषयों पर चर्चा हुई, लेकिन तारीख निर्धारित नहीं हो सकी। इधर, तारीख तय नहीं होने के चलते अब कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकती है। इसके पीछे कारण यह है कि तारीख के बाद ही विज्ञापन तैयार होगा।
Published on:
08 Jul 2019 01:49 pm
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