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मालवा में अतिथि सत्कार की अपनी परंपरा है। यहां मेहमान को चाय के साथ नमकीन नहीं परोसा जाए तो सत्कार में कमी रह जाती है। आजकल पारंपरिक नमकीन के साथ ही आलू की चिप्स परोसने का चलन भी है। वहीं आम लोग भी इसे खूब पसंद करते हैं, लेकिन आलू को लेकर डायबिटीज को लेकर कुछ लोग इसे ना-नकुर भी करते हैं। अब बाजार में शुगर फ्री चिप्स आ गई है। जो स्वाद के साथ सेहत का भी खयाल रखती है। कच्चे आलू की करारी चिप्स में अगर सेंधा नमक और काली मिर्च डल जाए तो जायका और बढ़ जाता है। पत्रिका एक ऐसे ही जायके से रूबरू करवा रहा है।
75 साल पहले हुई शुरुआत
शहर को करारी और तीखी चिप्स का जायका चखा रहे हैं सती गेट के पास रतलामी सेंव भंडार के संचालक ओमप्रकाश शर्मा। शर्मा बताते हैं कि वे मूलत: रतलाम के रहने वाले हैं। उनके दादा सेठ हीरालाल 80-85 साल पहले सिंहस्थ देखने उज्जैन आए थे। उन्हें शहर इतना पसंद आया कि 75 साल पहले परिवार सहित यहां आ गए और नमकीन का व्यापार शुरू किया। उनके बाद पिता सेठ बाबूलाल ने कारोबार संभाला। अब शर्मा और उनके पुत्र निखिल काम कर रहे हैं। शर्मा के अनुसार उनके यहां रतलाम का स्वाद लिए हर तरह का नमकीन मिलता है। इस समय आलू चिप्स की डिमांड बढऩे लगी है, इस कारण खासतौर पर करारी और शुगर फ्री आलू चिप्स बनाई जाती है।
ऐसे बनती हैं करारी आलू चिप्स
कच्चे आलू की चिप्स बनाने के लिए सबसे जरूरी होता है आलू की क्वालिटी। आलू शुगर फ्री होना चाहिए। इससे चिप्स लाल नहीं होती। इसके लिए लॉकर, ज्योति और चिप्सोना आलू बेस्ट होता है। यह आसानी से मंडी में मिल जाता है। सबसे पहले आलू की छील लें, फिर पानी से भरे बर्तन में किस लें। अब आलू को जब तक धोएं तब तक उसका पावडर और टार (चिकनाई) निकल ना जाए। इसके बाद गर्म मूंगफली तेल में एक-एक चिप्स छोड़ें। थोड़ी देर तक चलाएं, फिर एक चिप्स निकालकर देखें कि करारी हुई है या नहीं। हल्की गुलाबी होने पर चिप्स निकाल लें। इसमें सेंधा नमक, काली मिर्च और चाहे तो लाल मिर्च डालकर खाएं।
प्रस्तुति : अनिल मुकाती
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