उज्जैन. वसंत ऋतु के आगमन के साथ ही मालवा में खाने-पीने का अंदाज भी बदलने लगता है। हल्की गर्मी और ठंडक के बीच मन को शीतलता देने वाली डिश लोगों को भाने लगी है। ऐसे ही शहर में बहुत चाव से खाने वाली कुल्फी का सीजन भी शुरू हो गया है। पहले सिर्फ गर्मी में कुल्फी की दुकानें दिखती थी, लेकिन स्वाद के शौक और बदलते वक्त के साथ अब 12 महीने ये ठिये आबाद रहते हैं। पत्ते के दोने में केसर, पिस्ता और काजू युक्त कुल्फी का ख्याल ही लोगों को उत्साह से भर देता है। कुल्फी का स्वाद भी ऐसा है, जो मिठाई की कमी पूरी कर देता है। पत्रिका इस बार 60 साल पुराने कुल्फी के स्वाद से रूबरू करवा रहा है।
ठेला लगाकर दादाजी ने शुरु किया था काम
शहर को केसर-पिस्ता की रसभरी और लच्छेदार कुल्फी का जायका चखा रहे फेमस कुल्फी एंड लस्सी सेंटर के संचालक निखिलेश नारंग। शहर में छत्रीचौक और फ्रीगंज में दुकान संचालित करने वाले निखिलेश बताते हैं कि उनके दादा रामलाल नारंग ने 60 साल पहले ठेला लगाकर कुल्फी बेचने की शुरुआत की थी। लोगों को यह स्वाद बहुत भाया। दूर-दूर से लोग फेमस की कुल्फी खाने आते हैं और कहते कि ऐसा स्वाद कहीं नहीं मिलता। निखिलेश बताते हैं कि पिता अनिल नारंग और भाई अखिलेश नारंग के साथ मिलकर वे शहर को कुल्फी खिला रहे हैं।
ऐसे बनती है लच्छेदार कुल्फी
कुल्फी बनाना बहुत आसान है। इसके लिए जरूरी होती है दूध की क्वालिटी। कम से कम साढ़े छह फेट का दूध होना चाहिए। सबसे पहले कढ़ाही में एक लीटर दूध गर्म होने के लिए रख दें। मध्यम आंच पर दूध को तब तक गर्म करें, जब तक वो 300 ग्राम ना रह जाए। इस दौरान दूध को चलाते रहे, ध्यान रहे दूध चिपके नहीं। अब स्वाद अनुसार शक्कर डालें। फिर गैस बंद कर दें। इसके बाद पहले से गली हुई केसर इसमें डालें। केसर पूरी तरह से घुल नहीं जाए, तब तक चलाएं। अब मिश्रण को ठंडा करें और पिस्ता, काजू और अन्य ड्रायफ्रूट डालें। इसके बाद मिश्रण को मनपसंद सांचे में डालकर डीफ्रीज करें। करीब 3 घंटे बाद आपकी केसर-पिस्ता युक्त लच्छेदार कुल्फी तैयार है।
प्रस्तुति : अनिल मुकाती