उज्जैन. भैरव अष्टमी पर शुक्रवार को महाकाल के सेनापति बाबा कालभैरव ने लाव-लश्कर के साथ भ्रमण किया। पालकी पर राजसी वस्त्र, आभूषण धारण कर कालभैरव निकले, तो भक्त जयकारे लगाने लगे। पुजारी पं. सदाशिव महाराज एवं धर्मेन्द्र चतुर्वेदी ने बताया कि बाबा कालभैरव का दिनभर पूजन चलता रहा। सिंधिया रियासत कालीन आभूषण, चंवर, पगड़ी, जरीदार वस्त्र, मालाएं धारण कराई गईं। कालभैरव मंदिर को फूलों और गुब्बारों से सजाया गया। आकर्षक विद्युत सज्जा की गई। शाम 4 बजे विधि-विधान से पूजन कर बाबा नवनिर्मित पालकी पर सवार होकर भ्रमण पर निकले। भूतभावन भगवान महाकाल के सेनापति बाबा कालभैरव की सवारी में झांकियां, बैंडबाजे, घोड़े, बग्घी आदि शामिल थे। केंद्रीय जेल भैरवगढ़ के बाहर जेल के अधिकारी एवं बंदियों द्वारा कालभैरव की पूजन-आरती की गई। इसके बाद सिद्धवट मंदिर पहुंची। सिद्धवट घाट पर आरती की गई। वहां से पालकी पुन: मंदिर पहुंची। सवारी का जगह-जगह पूजन कर स्वागत किया गया।