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एक शहर जहां पहली बार महिला अध्यक्ष चलाएगी निगम का सदन, कलावती यादव अध्यक्ष बनी

सबसे वरिष्ठ पार्षद कलावती यादव 39 मतों से निगम अध्यक्ष चुनी गईं, कांग्रेस प्रत्याशी को पार्टी पार्षदों के ही पूरे वोट नहीं मिले

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The first time a woman president will run the corporation's house

सबसे वरिष्ठ पार्षद कलावती यादव 39 मतों से निगम अध्यक्ष चुनी गईं, कांग्रेस प्रत्याशी को पार्टी पार्षदों के ही पूरे वोट नहीं मिले

उज्जैन. सबसे वरिष्ठ पार्षद कलावती यादव नगर निगम की नई अध्यक्ष चुनी गई हैं। इसके साथ निगम का सदन चलाने वाली पहली महिला सभापति बन उन्होंने नया इतिहास भी रच दिया है। यादव को महापौर व भाजपा पार्षदों की कुल संख्या से भी एक वोट अधिक मिला है।

शनिवार को निगम का पहला सम्मेलन कलेक्टर व पीठासीन अधिकारी आशीषसिंह की अध्यक्षता में हुआ। सबसे पहले कांग्रेस पार्षदों को शपथ दिलाई गई। इसके बाद निगम अध्यक्ष और अपील समिति सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। अपील समिति सदस्यों का निर्धारण आपसी सहमति से होने के चलते मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी। निगम अध्यक्ष पद के लिए महापौर सहित सभी ५४ पार्षदों ने मताधिकार का उपयोग किया। कुल ५५ मतों में से कलावती यादव को ३९ वहीं कांग्रेस प्रत्याशी गब्बर कुवाल को १६ मत मिले। सदन में भाजपा पार्षद योगेश्वरी राठौर ने कांग्रेस की दो महिला पार्षदों का चहरा नहीं दिखने पर आपत्ति लेते हुए परिचय की पुष्टी की मांग की। कलेक्टर आशीषसिंह ने सदन में आने से पहले सभी पार्षदों के परिचय की पुष्टी करने का कहा आपत्ति खारिज कर दी।

प्रत्याशी के नाम पर आखिरी तक खींचतान

निगम अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस ने एक दिन पहले ही नाम घोषित कर दिया वहीं भाजपा में आखिरी समय तक खींचतान जारी रही। सूत्रों के अनुसार अध्यक्ष पद के प्रत्याशी के लिए शनिवार सुबह भी पार्टी कार्यालय पर मंथन का दौर चला। कलावती यादव, शिवेेंद्र तिवारी और रामेश्वर दुबे के नाम पर कुछ का समर्थन तो कुछ का विरोध सामने आया। लंबी खींचतान के बाद एन वक्त पर कलावती यादव के नाम तय हुआ। बताया यह भी जा रहा है कि भोपाल से इस संंबंध में मोबाइल पर सूचना आई थी। इधर निगम सम्मेलन में शामिल होने से पहले सभी भाजपा पार्षदों को पार्टी कार्यालय पर बुला लिया गया था। वहां प्रत्याशी के नाम की घोषणा के साथ ही पार्षदों को मतदान की प्रक्रिया आदि की जानकारी दी गई।

6ठी बार में मिला आसंदी का अवसर

प्रथम सम्मेलन के साथ ही नई नगर सरकार का कार्यकाल शुरू हो गया है। कलावती यादव इस बोर्ड की सबसे वरिष्ठ पार्षद हैं। वे लगातार 6ठी बार पार्षद बनी हैं। वर्ष १९९४-९५ में पहला चुनाव जीतने के बाद नेता प्रतिपक्ष, नेता पक्ष व दो बार एमआइसी सदस्य रह चुकी हैं। इस दौरान गृह वार्ड के अलावा दो चुनाव बाहरी वार्डों से भी जीतीं। पीछले दो कार्यकाल से वे अध्यक्ष पद की दावेदारी कर रही थीं लेकिन उन्हें अवसर नहीं मिला। 6ठी बार पार्षद बनने के बाद अब वे आसंदी संभालेंगी।
निगम की ७वीं अध्यक्ष बनी यादव

निगम अध्यक्ष कार्यकाल
प्रेमनारायण यादव २१.४.९७ से ८.१.९९
प्रकाश चौबे २३.१.९९ से ४.१.००
प्रकाश चित्तौड़ा २७.६.०० से २६.६.०५
आजाद यादव ९.८.०५ से ८.८.२०१०
सोने गेहलोत १२.८.१० से ११.८.१५
सोनू गेहलोत ४.९.१५ से ३.७.२०२०
कलावती यादव ६.८.२०२२ से ....

कांग्रेस अध्यक्ष बोले- एक ही वोट गया, २-५ खरीद सकते थे
निगम चुनाव में कुल ५४ में से भाजपा के ३७ और कांगे्रस के १७ पार्षद जीतकर आए हैं। ऐसे में अध्यक्ष का चुनाव पहले से ही एक तरफा था लेकिन मतदान के बाद कांग्रेस की और भी कीरकरी हुई। पार्टी के १७ पार्षद होने के बावजूद निगम अध्यक्ष पद के कांग्रेस प्रत्याशी कुवाल को १६ ही वोट मिले। मसलन कांग्रेस के एक पार्षद ने पार्टी से दगा करते हुए भाजपा प्रत्याशी को वोट दिया जबकि एकजुटता और व्यवस्था के लिहाज से पूरे समय कांग्रेस अध्यक्ष रवि भदौरिया निगम में मौजूद थे। एक वोट कम मिलने पर भदौरिया ने कहा, यहां भाजपा की सरकार है, खरीद फरोख्त की सरकार है। उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव हैं। वह तो एक ही वोट गया, हो सकता था २-५ वोट खरीद लेते। कहीं न कहीं दबाव बनाया गया है। पाटी समीक्षा करेगी कि एक वोट कैसे कम हुआ है, किसका वोट नहीं मिला है।

अपील समिति के लिए १९९५ के बाद से मतदान नहीं
निगम अध्यक्ष के साथ अपील समिति के भी चुनाव हुए लेकिन आपसी सहमति के चलते मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी। समिति के चार सदस्यों में से तीन पर भाजपा पार्षद पंकज चौधरी, गजेन्द्र हिरवे, निलम कालरा और कांग्रेस पार्षद पूनम जयसवाल को निर्वाचित किया गया। दरअसल समिति के चुनाव की प्रक्रिया काफी जटील होती है इसलिए दोनो ही दल पार्षदों की संख्या के आधार पर आपसी सहमति से सदस्यों का चयन कर लेते हैं। मतदान की स्थिति को लेकर जानकार सेवा निवृत्त इइ पीएल टटवाल को विशेष रूप से बुलाया गया था। वर्ष १९९५ में अपील समिति सदस्यों के लिए मतदान की स्थिति बनी थी। इसके बाद से मतदान नहीं हुआ है।

जानिए निगम अध्यक्ष के अधिकार औ सुविधा
- ५ करोड़ रुपए का वार्षिक मद। किसी भी वार्ड में खर्च कर सकते हैं।
- १० करोड़ रुपए से अधिक के निर्माण कार्य स्वीकृति के लिए सदन में प्रस्तुत करना अनिवार्य।
- नितिगत सभी निर्णय सदन में लिए जाते हैं।
- अध्यक्ष को चार पहिया वाहन, विश्राम गृह, निज सचिव, कार्यालय कक्ष आदि सुविधा मिलती है।

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